Karnataka CM: हो गया फाइनल, DK Shivakumar होंगे कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री! सिर्फ CM नहीं, पूरी सरकार बदलेगी?
Karnataka Next CM DK Shivakumar: कर्नाटक की राजनीति में महीनों से चल रही अटकलों पर अब लगभग मुहर लगती दिखाई दे रही है। कांग्रेस के भीतर सत्ता परिवर्तन का रास्ता साफ हो चुका है और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार को राज्य का अगला मुख्यमंत्री बनाए जाने की तैयारी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने गुरुवार (28 मई) को अपने आवास पर मंत्रियों के साथ अहम ब्रेकफास्ट मीटिंग की। इसी बैठक के बाद कर्नाटक सरकार में मंत्री एचके पाटिल ने बड़ा दावा किया कि सिद्धारमैया दोपहर 3 बजे इस्तीफा देंगे और डीके शिवकुमार नए मुख्यमंत्री होंगे।
राजनीतिक संकेत भी इसी ओर इशारा कर रहे हैं। बैठक में पहुंचे डीके शिवकुमार ने सिद्धारमैया के पैर छुए, जिसके बाद दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को गले लगाया। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक यह सिर्फ शिष्टाचार नहीं, बल्कि सत्ता हस्तांतरण का सार्वजनिक संकेत था।

सिद्धारमैया ने खुद क्यों आगे बढ़ाया डीके का नाम?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर सिद्धारमैया ने खुद डीके शिवकुमार के नाम को आगे क्यों बढ़ाया? दरअसल इसकी जड़ 2023 में कांग्रेस सरकार बनने के समय हुए उस समझौते में मानी जा रही है, जिसकी चर्चा पिछले ढाई साल से लगातार होती रही। उस समय मुख्यमंत्री पद को लेकर सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार दोनों दावेदार थे।
बताया जाता है कि कांग्रेस हाईकमान ने तब "रोटेशनल सीएम फॉर्मूला" बनाया था। इसके तहत पहले ढाई साल सिद्धारमैया मुख्यमंत्री बने और बाद में डीके शिवकुमार को मौका देने पर सहमति बनी। अब सरकार का ढाई साल का कार्यकाल पूरा होने के करीब है और डीके समर्थक लगातार दबाव बना रहे थे। ऐसे में कांग्रेस नेतृत्व ने सत्ता परिवर्तन का फैसला आगे बढ़ाया।
दिल्ली में राहुल-खड़गे संग 6 घंटे चली बैठक
26 मई को सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार दिल्ली पहुंचे थे। वहां कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के साथ करीब 6 घंटे लंबी बैठक हुई। सूत्रों के मुताबिक इसी बैठक में नेतृत्व परिवर्तन के फार्मूले पर अंतिम सहमति बनी। पार्टी हाईकमान नहीं चाहता था कि सत्ता संघर्ष खुलकर सामने आए और इसका असर 2029 की तैयारी पर पड़े। यही वजह है कि बदलाव को "संगठनात्मक फैसला" बताकर पेश किया जा रहा है।

सिर्फ CM नहीं, पूरी सरकार बदलेगी?
कर्नाटक में सिर्फ मुख्यमंत्री बदलने की चर्चा नहीं है। सूत्रों के मुताबिक पूरी कैबिनेट में बड़ा फेरबदल हो सकता है। बताया जा रहा है कि मौजूदा 35 मंत्रियों में से करीब 25 मंत्रियों को बदला जा सकता है। कांग्रेस नेतृत्व राज्य सरकार की छवि को पूरी तरह रीसेट करना चाहता है।
इसके अलावा दो डिप्टी सीएम बनाए जाने की भी चर्चा है। इनमें एक पद दलित चेहरे को और दूसरा लिंगायत या ओबीसी समुदाय के नेता को दिया जा सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस सामाजिक समीकरण साधने के साथ-साथ एंटी-इंकम्बेंसी कम करने की रणनीति पर काम कर रही है।
कांग्रेस को बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी?
कांग्रेस नेतृत्व के इस फैसले के पीछे तीन बड़े कारण बताए जा रहे हैं।
🔹पहली वजह: पुराना सत्ता समझौता
2023 में सरकार बनने के समय ही सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर तनाव सामने आ गया था। पार्टी ने तब समझौते के जरिए स्थिति संभाली थी। अब डीके खेमा उसी समझौते को लागू करने की मांग कर रहा था।
🔹दूसरी वजह: सरकार पर बढ़ते विवाद
सिद्धारमैया सरकार वाल्मीकि डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन घोटाले समेत कई मुद्दों पर विपक्ष के निशाने पर रही। भाजपा लगातार भ्रष्टाचार और प्रशासनिक कमजोरी के आरोप लगा रही थी।
🔹तीसरी वजह: एंटी-इंकम्बेंसी का डर
कांग्रेस हाईकमान का मानना है कि समय रहते नेतृत्व बदलने से सरकार के खिलाफ बढ़ रही नाराजगी को कम किया जा सकता है। नए चेहरे के जरिए पार्टी 2028 के विधानसभा चुनाव की तैयारी करना चाहती है।

इस्तीफे की प्रक्रिया क्या होगी?
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मुलाकात के लिए समय मांगा था। हालांकि राज्यपाल फिलहाल पारिवारिक कारणों से बेंगलुरु से बाहर बताए जा रहे हैं। ऐसे में नियमों के तहत सिद्धारमैया अपना इस्तीफा राजभवन कार्यालय को सौंप सकते हैं या ई-मेल के जरिए भी भेज सकते हैं। राज्यपाल बाद में उसे औपचारिक मंजूरी देंगे। जब तक इस्तीफा स्वीकार नहीं होता, तब तक सिद्धारमैया कार्यवाहक मुख्यमंत्री बने रहेंगे।
डीके शिवकुमार के सामने क्या होंगी सबसे बड़ी चुनौतियां?
अगर डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री बनते हैं तो उनके सामने कई बड़ी चुनौतियां होंगी। सबसे पहले उन्हें कांग्रेस के भीतर दोनों गुटों के बीच संतुलन बनाना होगा। सिद्धारमैया खेमे के कई नेता कैबिनेट में अपनी जगह बचाने की कोशिश करेंगे।
दूसरी चुनौती प्रशासनिक होगी। कांग्रेस सरकार पर भ्रष्टाचार और सुस्त प्रशासन के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे में डीके को एक मजबूत और निर्णायक प्रशासक की छवि बनानी होगी। तीसरी चुनौती भाजपा और जेडीएस से होगी। विपक्ष इस पूरे बदलाव को "कुर्सी की लड़ाई" बताकर कांग्रेस को घेरने की तैयारी में है।
अब आगे क्या होगा?
सूत्रों के मुताबिक शुक्रवार को कांग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाई जा सकती है, जिसमें डीके शिवकुमार को औपचारिक रूप से विधायक दल का नेता चुना जाएगा। इसके बाद कांग्रेस राज्यपाल के सामने सरकार बनाने का दावा पेश करेगी।
साथ ही नई कैबिनेट के गठन और बड़े संगठनात्मक फेरबदल की प्रक्रिया भी शुरू हो सकती है। कर्नाटक की राजनीति में यह बदलाव सिर्फ चेहरे का नहीं, बल्कि कांग्रेस के अंदर शक्ति संतुलन बदलने वाला बड़ा मोड़ माना जा रहा है।














Click it and Unblock the Notifications