Punjab BJP New Chief: कौन हैं केवल सिंह ढिल्लों? कांग्रेस के दिग्गज से कैसे बने भाजपा का नया ‘मालवा चेहरा’
Kewal Singh Dhillon New Punjab BJP President: आगामी 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राज्य की सियासत में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासि क दांव खेला है। पार्टी हाईकमान ने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ की जगह बरनाला के पूर्व विधायक और कद्दावर नेता सरदार केवल सिंह ढिल्लों (Sardar Kewal Singh Dhillon) को पंजाब भाजपा का नया प्रदेश अध्यक्ष (State President) नियुक्त किया है।
उनके नाम की घोषणा के साथ ही राज्य की राजनीति में नए समीकरणों और भाजपा की आगामी रणनीति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

माना जा रहा है कि भाजपा ने पंजाब में संगठन को मजबूत करने, खासकर मालवा क्षेत्र और ग्रामीण वोट बैंक में पकड़ बढ़ाने के उद्देश्य से यह बड़ा फैसला लिया है। भाजपा ने शिरोमणि अकाली दल (SAD) से अलग होने के बाद अब ग्रामीण सिखों और मालवा क्षेत्र के किसानों व व्यापारियों के बीच अपनी पैठ मजबूत करने के लिए यह मास्टरस्ट्रोक खेला है।
Who is New Punjab BJP Chief: कौन हैं केवल सिंह ढिल्लों?
सरदार केवल सिंह ढिल्लों पंजाब के बरनाला जिले के तल्लेवाल गांव से ताल्लुक रखते हैं। उनका जन्म 16 मई 1950 को हुआ था। वह पंजाब के बड़े उद्योगपतियों और प्रभावशाली राजनीतिक चेहरों में गिने जाते हैं। ढिल्लों ग्रुप के प्रमुख के रूप में उन्होंने कारोबारी दुनिया में अपनी मजबूत पहचान बनाई और बाद में सक्रिय राजनीति में कदम रखा।
उनकी शुरुआती शिक्षा बरनाला में हुई। केवल सिंह ढिल्लों 12वीं पास हैं और उन्होंने 1969-70 में एसडी कॉलेज बरनाला से बीए पार्ट-1 की पढ़ाई की थी। उनके पिता का नाम सजन सिंह ढिल्लों है, जबकि उनकी पत्नी का नाम मनजीत कौर है। उनके दो बेटे-कंवरइंदर सिंह ढिल्लों और करणइंदर सिंह ढिल्लों पारिवारिक बिजनेस और रियल एस्टेट कारोबार संभालते हैं।
कांग्रेस से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
केवल सिंह ढिल्लों पिछले करीब दो दशकों से पंजाब की राजनीति में सक्रिय हैं। उन्होंने कांग्रेस पार्टी से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी। 2007 और 2012 के विधानसभा चुनावों में वह कांग्रेस टिकट पर बरनाला सीट से विधायक चुने गए। खासतौर पर 2012 के चुनाव में उन्होंने बड़ी जीत दर्ज कर मालवा क्षेत्र में अपनी मजबूत पकड़ साबित की थी।
वह पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं और लंबे समय तक कांग्रेस के मालवा क्षेत्र के बड़े नेताओं में शामिल रहे। हालांकि 2017 विधानसभा चुनाव और 2019 के संगरूर लोकसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, जिसके बाद उनकी राजनीतिक दिशा बदलती दिखाई दी।
2022 में कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में हुए थे शामिल
जून 2022 में केवल सिंह ढिल्लों ने कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। भाजपा ने उन पर भरोसा जताते हुए संगरूर लोकसभा उपचुनाव में उम्मीदवार भी बनाया था। हालांकि वह चुनाव जीत नहीं पाए, लेकिन पार्टी संगठन में उनकी सक्रियता लगातार बढ़ती गई। भाजपा में शामिल होने के बाद वह पंजाब भाजपा की कोर कमेटी के अहम सदस्य बने और संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे। अब उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाकर भाजपा ने साफ संकेत दिए हैं कि पार्टी पंजाब में क्षेत्रीय संतुलन और नए नेतृत्व के साथ आगे बढ़ना चाहती है।
भाजपा ने 'जट-सिख' चेहरे पर क्यों लगाया दांव?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ और केंद्रीय संगठन मंत्रियों के फीडबैक के बाद यह फैसला लिया गया है। इसके पीछे तीन मुख्य रणनीतिक कारण हैं:
सिख विरोधी छवि को तोड़ना: कृषि कानूनों के आंदोलन के बाद से पंजाब के ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा को लेकर जो नाराजगी थी, उसे दूर करने के लिए एक प्रामाणिक सिख चेहरे की जरूरत थी।
मालवा की घेराबंदी: पंजाब की सत्ता का रास्ता 'मालवा' क्षेत्र की 69 सीटों से होकर गुजरता है। ढिल्लों की कारोबारी पृष्ठभूमि और इस क्षेत्र के किसान परिवारों में मजबूत पकड़ का फायदा भाजपा को सीधा माइलेज दे सकता है।
क्यों अहम है भाजपा का यह फैसला?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा ने केवल सिंह ढिल्लों को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर मालवा क्षेत्र पर विशेष फोकस किया है। पंजाब की राजनीति में मालवा बेल्ट सबसे प्रभावशाली मानी जाती है और यहां किसान, व्यापारी तथा ग्रामीण वोटरों का बड़ा प्रभाव है।
ढिल्लों की कारोबारी पृष्ठभूमि और ग्रामीण इलाकों में पकड़ भाजपा के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।इसके अलावा, भाजपा पंजाब में अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान मजबूत करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में एक अनुभवी नेता को प्रदेश अध्यक्ष बनाना पार्टी की रणनीतिक चाल माना जा रहा है।














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