CM हेमंत सोरेन पहुंचे गोइलकेला, जंगल आंदोलन के नायक शहीद देवेंद्र माझी को अर्पित की श्रद्धांजलि
रांची,14 अक्टूबर- झारखंड सरकार के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन शुक्रवार को पश्चिमी सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर अनुमंडल स्थित गोइलकेरा पहुंचे, जहां उन्होंने जंगल आंदोलन के नायक रहे शहीद देवेंद्र माझी को श्रद्धांजलि अर्पित की।
रांची,14 अक्टूबर- झारखंड सरकार के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन शुक्रवार को पश्चिमी सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर अनुमंडल स्थित गोइलकेरा पहुंचे, जहां उन्होंने जंगल आंदोलन के नायक रहे शहीद देवेंद्र माझी को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने शहीद को याद करते हुए उनके अधूरे सपनों को पूरा करने का भरोसा दिलाया।

गोइलकेरा हाट बाजार में आयोजित शहीद देवेंद्र माझी की श्रद्धांजलि सभा में सिंहभूम की सांसद गीता कोड़ा, जगन्नाथपुर विधायक सोनाराम सिंकू, चक्रधरपुर विधायक सुखराम उरांव और शहीद देवेंद्र माझी की पत्नी, मनोहरपुर की विधायक व मंत्री जोबा माझी समेत झामुमो के तमाम नेता व हजारों कार्यकर्ता मौजूद रहे। इससे पहले मंत्री जोबा माझी के आगमन के साथ ही कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत हो गई थी। मंत्री समेत झारखंड मुक्ति मोर्चा के पदाधिकारी व कार्यकर्ता मंच पर मौजूद रहे। मंत्री जोबा माझी ने सबसे पहले चक्रधरपुर के पंप रोड स्थित अपने आवास पर शहीद देवेंद्र माझी की समाधि स्थल पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। इसके बाद चक्रधरपुर से उनका काफिला गोइलकेरा के लिए रवाना हुआ। सोनुआ पहुंचने पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। गोइलकेरा में भी बालिका मध्य विद्यालय के पास झामुमो कार्यकर्ताओं ने मंत्री जोबा माझी का ढोल-नगाड़ों के साथ पारंपरिक व भव्य स्वागत किया। गोइलकेरा हाट बाजार में शहीद शक्ति स्थल पर उन्होंने शहीद देवेंद्र माझी को श्रद्धांजलि दी। यहां आपकी योजना, आपकी सरकार-आपके द्वार कार्यक्रम भी चल रहा है। मुख्यमंत्री इस कार्यक्रम में भी शामिल होंगे।
जल जंगल जमीन के लिए आजीवन संघर्ष किया
शहीद देवेंद्र माझी जल जंगल जमीन के लिए आजीवन संघर्ष करते रहे। देवेंद्र माझी को जंगल में रहने वाले आदिवासियों की आवाज कहा जाता था। एक गरीब किसान परिवार में 15 सितंबर 1947 को जन्मे देवेंद्र माझी तीन भाइयों व छह बहनों में सबसे छोटे थे। पांच वर्ष की उम्र में ही पिता का साया उठ गया था। उनके भाई कालीदास माझी स्वतंत्रता सेनानी थे, जिनकी एक दुर्घटना में मृत्यु हाे गई थी। मरं कुनी माझी ने किसी तरह अपने बच्चों को पाला-पोसा। देवेंद्र ने सबसे पहले 1969 में बीड़ी कारखाना में काम करने वाले मजदूरों के लिए कंपनियों के खिलाफ आंदोलन शुरू किया था।












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