उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के लिए CM धामी कर रहे जी तोड़ मेहनत, बदल दी पूरी दिनचर्चा

देहरादून, 07 दिसंबर: महासमर की दहलीज पर खड़े उत्तराखंड में अब इंतजार चुनाव तिथि घोषित होने का है। इस बीच चुनावी रण की नीति तैयार करने और साधने में नेताओं की नींद उड़ी है। ऐसा होना सही है और सकारात्मक भी। आखिर इसी आधार पर तो उन्हें जनादेश के लिए मतदाताओं के बीच जाना है। इसमें विजेता वही होगा जिसकी तैयारी सबसे बेहतर होगी। मोर्चेबंदी मजबूत होगी। गिनाने के लिए काम होगा। जताने के लिए विकास के साथ विश्वास भी होगा। ऐसे में यह पल मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के लिए ज्यादा अहम है। इसके लिए उन्होंने पूरी दिनचर्या ही बदल ली है।

pushkar singh dhami

देवभूमि को प्रचंड बहुमत वाली भाजपा सरकार के पांच साल के कार्यकाल में तीन-तीन मुख्यमंत्री देखने पड़े। त्रिवेंद्र और तीरथ का कार्यकाल जैसा भी रहा, मगर तीसरे मुख्यमंत्री के रूप में सत्ता संभालने वाले धामी के लिए ताज कुछ ज्यादा ही चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा। वजह यह कि उनके पास समय कम और जनता का विश्वास हासिल कर पार्टी को फिर सत्ता दिलाना है। इसके लिए वह दिन-रात मोर्चेबंदी पर जुटे हैं। विकास योजनाओं की सौगात दे रहे हैं।

खटीमा पहुंचे मुख्यमंत्री जब सभी कार्यक्रम निपटाकर रात करीब नौ बजे फाइबर फैक्ट्री के गेस्ट हाउस में अपने करीबी कार्यकर्ताओं के साथ बैठे थे तब उन्होंने अपनी दिनचर्या पर चर्चा कर सभी को हतप्रभ कर दिया। धामी बोले, एक सामान्य विधायक और मुख्यमंत्री के रूप में बहुत अंतर है। कम समय में पार्टी ने उनको जब इस जिम्मेदारी के लायक समझा है तो यह भी निश्चित है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व गृहमंत्री अमित शाह की प्रेरणा से वह निरंतर लक्ष्य हासिल करेंगे।

हालांकि दिनचर्या के बारे में बताने से पहले वह मुस्कुराने लगे। बोले- इसके बारे में मत पूछो...। चापर हो या कार उसमें सफर के दौरान ही नींद पूरी हो जाती है, रही बात भोजन की तो कई बार इसके लिए भी समय नहीं मिल पाता। रास्ते में ही गुड़ और चाय इस कमी को पूरा कर देती है। हालांकि यह सब उनके लिए बहुत ज्यादा मायने नहीं रखता। जनता और राज्य के हित के लिए जुटना ज्यादा जरूरी है। क्योंकि प्रदेश का मुख्य सेवक ही अगर सो गया तो तमाम विरोधी शक्तियां विकास कार्य प्रभावित करने लगेंगी। यह वह होने नहीं देंगे। राज्य की अर्थव्यवस्था और विकास बड़ी मुश्किल से पटरी पर आया है। अगर सत्ता लड़खड़ाई तो प्रदेश फिर वर्षों पीछे पहुंच जाएगा।

मोदी और शाह हैं बूस्टर डोज

पुष्कर सिंह धामी पर भले ही जिम्मेदारी बढ़ी है। लेकिन चेहरे और वाणी से झलकता आत्मविश्वास ही आज भी उनकी पहचान है। कोरोना काल की चुनौती और चुनाव जैसी व्यस्तता में सेहत का ध्यान वह कैसे रख रहे हैं? इस सवाल के जबाब में बोले कि उनका बूस्टर डोज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की प्रेरणा है।

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