सिद्धारमैया ने खुद CM पद से दिया इस्तीफा या जबरन लिया गया? अब प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुद किया खुलासा, 5 बड़ी बात
Siddaramaiah Press Conference: कर्नाटक की राजनीति में 28 मई को बड़ा उलटफेर देखने को मिला। लंबे समय से चल रही अटकलों के बीच आखिरकार मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफा देने के बाद बेंगलुरु में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने साफ कर दिया कि यह फैसला कांग्रेस आलाकमान के आदेश पर लिया गया है। सिद्धारमैया ने कहा कि उन्होंने पहले ही तय कर रखा था कि पार्टी नेतृत्व जब कहेगा, तब वह सीएम पद छोड़ देंगे।
सिद्धारमैया के इस्तीफे के साथ अब कर्नाटक की राजनीति में डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने का रास्ता लगभग साफ माना जा रहा है। प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले बैठक के दौरान भावुक कर देने वाला पल भी आया, जब डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने सिद्धारमैया के पैर छुए और सिद्धारमैया ने उन्हें गले लगा लिया। इसके तुरंत बाद, दोपहर 3 बजे वे लोकभवन पहुंचे और अपना इस्तीफा सौंप दिया।

पद छोड़ते ही सिद्धारमैया ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और साफ कर दिया कि आखिर उन्हें यह कदम क्यों उठाना पड़ा। आइए जानते हैं उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस की 5 सबसे बड़ी बातें, जो कर्नाटक की नई सियासी तस्वीर बयां कर रही हैं।
🔷1. दो दिन पहले आया दिल्ली से संदेश: आलाकमान का आदेश मान लिया
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सिद्धारमैया ने इस बात का साफ-साफ खुलासा किया कि उन्होंने यह इस्तीफा स्वेच्छा से नहीं, बल्कि कांग्रेस आलाकमान के निर्देश पर दिया है। उन्होंने कहा कि वे पहले भी कई बार कह चुके थे कि जब भी पार्टी नेतृत्व उनसे पद छोड़ने को कहेगा, वे पीछे नहीं हटेंगे।
दो दिन पहले ही कांग्रेस हाईकमान ने उनसे मुख्यमंत्री का पद छोड़ने के लिए कहा था। सिद्धारमैया ने नेतृत्व को भरोसा दिया था कि वे 28 मई को अपना इस्तीफा दे देंगे और उन्होंने अपना वादा पूरा किया। उन्होंने कहा कि अब राज्य के अगले मुख्यमंत्री को काम करने का मौका मिलना चाहिए।
सिद्धारमैया बोले, ''मैं पहले भी कई बार कह चुका हूं कि जब पार्टी हाईकमान मुझसे इस्तीफा मांगेगा, तो मैं इस्तीफा दे दूंगा। दो दिन पहले हाईकमान ने मुझसे सीएम पद छोड़ने को कहा था और मैंने आज अपना इस्तीफा दे दिया है।''
🔷2. सिद्धारमैया बोले- राज्यपाल आकर मेरा इस्तीफा स्वीकार कर लेंगे
सिद्धारमैया ने बताया कि उन्होंने अपना इस्तीफा लोकभवन में राज्यपाल के निजी सचिव को सौंप दिया है। दरअसल, कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत इस समय पारिवारिक वजहों से बेंगलुरु से बाहर गए हुए हैं और उनके गुरुवार रात तक वापस लौटने की उम्मीद है।
- क्या कहता है नियम: संवैधानिक नियमों के मुताबिक, अगर राज्यपाल राज्य में मौजूद न हों, तब भी मुख्यमंत्री अपना लिखित इस्तीफा राजभवन के अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से या ई-मेल के जरिए भेज सकते हैं।
- मंजूरी का इंतजार: राज्यपाल के लौटने के बाद ही इस इस्तीफे को आधिकारिक रूप से स्वीकार किया जाएगा। जब तक इस्तीफा मंजूर नहीं होता, तब तक सिद्धारमैया ही कार्यवाहक मुख्यमंत्री के तौर पर जिम्मेदारी संभालेंगे।
🔷3. सिद्धारमैया बोले- 'मैंने कभी नहीं सोचा था कि MLA बनूंगा'
अपनी पुरानी यादों को ताजा करते हुए सिद्धारमैया भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि वे एक बेहद साधारण ग्रामीण पृष्ठभूमि से आते हैं। उनके पूरे खानदान या माता-पिता का राजनीति से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं था। उन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि वे कभी विधायक, मंत्री या फिर दो-दो बार राज्य के मुख्यमंत्री बनेंगे। राजनीति में उनका आना महज एक इत्तेफाक था।
सिद्धारमैया बोले,
"उन सभी लोगों का शुक्रिया जिन्होंने मुझे प्यार दिया, जब मैं 2 बार मुख्यमंत्री रहा, 2013 से 2018 तक। 2013 से लेकर आज तक, मेरे जिन साथियों ने इस मौके पर मेरे साथ काम किया है, उन्होंने मेरे लिए हर तरह का समर्थन, सहयोग और प्यार दिखाया है। मैं उनका दोस्त हूं, मैं एक गांव से आता हूं, मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि एक दिन मैं MLA, मंत्री या मुख्यमंत्री बनूंगा। मैं राजनीति में इत्तेफाक से आया क्योंकि मेरे परिवार में कोई भी राजनीति में नहीं था।"
उन्होंने अपनी राजनीति के मूल सिद्धांतों का जिक्र करते हुए कहा कि महात्मा गांधी, गौतम बुद्ध, डॉ. बीआर अंबेडकर और बसवेश्वर की शिक्षाएं ही उनकी राजनीति की जड़ें रही हैं। वे एक ऐसे समाज में विश्वास रखते हैं जहां सभी जातियों और धर्मों के लोग एक साथ रहें और संसाधनों का समान बंटवारा हो।
सिद्धारमैया बोले,
''मेरा मानना है कि संविधान ही हमारा धर्म है और वोटर हमारे देवता और प्रशंसक हैं। मुझे दो बार मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला और दो बार विपक्ष का नेता बनने का मौका मिला। ये मेरे लिए गर्व की बात है। मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मैं कभी विधायक भी बन पाऊंगा।''
🔷4. नए सीएम के लिए लोकतांत्रिक और संवैधानिक रास्ता
सिद्धारमैया ने जोर देकर कहा कि कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री के चयन की प्रक्रिया पूरी तरह से लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वे देश के संविधान को अपना 'धर्म' मानते हैं, जबकि राज्य के वोटर्स उनके लिए 'भगवान' की तरह हैं।
उन्होंने सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे का विशेष रूप से आभार जताया कि पार्टी ने उन्हें दो बार राज्य का मुख्यमंत्री और दो बार नेता प्रतिपक्ष बनने का गौरवशाली अवसर दिया। उन्होंने कहा, 'मैंने राजभवन में मुख्यमंत्री के पद से अपना इस्तीफ़ा दे दिया है," निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा। कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि उन्होंने यह फ़ैसला पार्टी आलाकमान के कहने पर लिया है।'
🔷5. सिद्धारमैया ने बताया उनकी सरकार ने क्या-क्या काम किया?
कर्नाटक के CM सिद्धारमैया कहते हैं,
"हमने अपने घोषणापत्र में किए गए वादों को पूरा करने के लिए काम किया है। 2013 में, हमने 163 वादे किए थे, जिनमें से हमने 158 वादे पूरे किए हैं। 2023 में, हमने 550 से ज़्यादा वादे किए। जिनमें से हमने 300 वादे पूरे किए हैं। इसके अलावा, हमने 5 गारंटी योजनाओं की घोषणा की थी, जिन्हें हमने पहले ही साल में पूरा कर दिया है।"
सिद्धारमैया ने अपने दोनों कार्यकाल (साल 2013 से 2018 और साल 2023 से अब तक) को याद करते हुए अपने सभी कैबिनेट मंत्रियों और साथी विधायकों को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि सभी के सहयोग के बिना सरकार चलाना मुमकिन नहीं था।
जब उनसे सरकार के भविष्य और बहुमत को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने बड़े ही आश्वस्त अंदाज में कहा कि कर्नाटक में कांग्रेस सरकार पूरी तरह सुरक्षित है। कांग्रेस के पास 136 विधायक हैं और इसके साथ ही 2 निर्दलीय विधायकों का भी समर्थन हासिल है। पार्टी के पास सदन में पूर्ण बहुमत है, इसलिए सरकार पर कोई संकट नहीं है। कैबिनेट मंत्री एचके पाटिल के मुताबिक, नए मुख्यमंत्री के तौर पर डीके शिवकुमार के नाम पर सहमति बन चुकी है और वे जल्द ही कमान संभालेंगे।

अब डीके शिवकुमार का सीएम बनना लगभग तय!
इस्तीफे से पहले सिद्धारमैया ने अपने आवास पर मंत्रियों के साथ ब्रेकफास्ट मीटिंग भी की थी। इस बैठक में डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार मौजूद रहे। बैठक के दौरान शिवकुमार ने सिद्धारमैया के पैर छुए और दोनों नेताओं के बीच भावुक तस्वीरें सामने आईं।
कर्नाटक सरकार में मंत्री एचके पाटिल ने दावा किया कि बैठक में डीके शिवकुमार के नाम पर सहमति बन गई है। माना जा रहा है कि शुक्रवार को कांग्रेस विधायक दल की बैठक में उन्हें औपचारिक रूप से नेता चुना जा सकता है।
सूत्रों के मुताबिक सिर्फ मुख्यमंत्री ही नहीं, बल्कि मंत्रिमंडल में भी बड़ा बदलाव हो सकता है। करीब 15 से 20 नए चेहरों को मौका दिए जाने की चर्चा है। साथ ही दो डिप्टी सीएम बनाए जाने की भी संभावना जताई जा रही है, ताकि जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधा जा सके।
आखिर क्यों बदला गया मुख्यमंत्री?
कांग्रेस के अंदर 2023 से ही ढाई-ढाई साल के फॉर्मूले की चर्चा चल रही थी। उस समय मुख्यमंत्री पद को लेकर सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच लंबी खींचतान हुई थी। बाद में पार्टी हाईकमान ने संतुलन बनाते हुए सत्ता साझा करने का फॉर्मूला तैयार किया था।
इसके अलावा वाल्मीकि डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन घोटाले समेत कई मुद्दों पर सरकार विपक्ष के निशाने पर थी। कांग्रेस नेतृत्व को यह भी लग रहा था कि समय रहते नेतृत्व परिवर्तन करने से एंटी-इंकम्बेंसी का असर कम किया जा सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि डीके शिवकुमार की अगुवाई में कांग्रेस सरकार कितनी नई दिखाई देती है और क्या यह बदलाव 2028 के चुनावी समीकरणों को प्रभावित करेगा।














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