Ajit Doval in Russia: Moscow में गरजे अजीत डोभाल, बिना नाम लिए पाकिस्तान को किया नॉक-आउट, तबीयत से धोया?
Ajit Doval in Russia: गुरुवार की दोपहर इंटरनेशनल जगत से आई एक खबर ने भारतीयों के कान खड़े कर दिए। दरअसल भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने 28 मई को रूस की राजधानी मॉस्को पहुंचे। जिसके बाद सभी को लग रहा है कि ऐसा क्या हुआ कि खुद अजीत डोभाल को रूस जाना पड़ा है।
अजीत डोभाल भले ही ही रूस में आयोजित पहले अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा मंच और सुरक्षा मामलों के लिए उच्च प्रतिनिधियों की 14वीं बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व करने पहुंचे हैं, लेकिन जिस ढंग से उन्होंने भारत का पक्ष रखा है वो वाकई काबिल-ए-तारीफ है। इस मंच पर दुनियाभर के सुरक्षा अधिकारियों और रणनीतिक विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। हालांकि अजीत डोभाल का ये दौरा पहले से तय था, लेकिन इसकी जानकारी बहुत ज्यादा चर्चा में नहीं थी। अब जानते हैं कि क्या है ये मंच और क्यों अजीत डोभाल ने इसमें ऐसा क्या कहा जिस पर चर्चा हो रही।

आतंकवाद पर बरसे डोभाल
इस इंटरनेशनल मंच पर आतंकवाद के मुद्दे पर अजीत डोभाल ने बेहद सख्त रुख अपनाया। उन्होंने साफ कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में डबल स्टैंडर्ड बिल्कुल स्वीकार नहीं किए जा सकते। डोभाल ने कहा-
"जिम्मेदार देशों को यह तय करना होगा कि वे आतंकवाद को समर्थन देने वालों के साथ खड़े हैं या आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई का समर्थन करते हैं।"उनके इस बयान को आतंकवाद को समर्थन देने वाले देश पाकिस्तान के खिलाफ भारत के कड़े संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
रेड सी और होर्मुज पर क्या बोले डोभाल?
मॉस्को में अपने संबोधन के दौरान NSA अजीत डोभाल ने पश्चिमी एशिया की मौजूदा स्थिति पर खास फोकस किया। उन्होंने कहा कि होर्मुज़ स्ट्रेट (Hormuz Strait) और लाल सागर (Red Sea) जैसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों में व्यापार का बिना रुकावट संचालन बेहद जरूरी है। डोभाल ने संकेत दिया कि इन इलाकों में बढ़ते तनाव का असर पूरी दुनिया की सप्लाई चेन और ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।
वैश्विक संस्थाओं में सुधार जरूरी
अजीत डोभाल ने द्वितीय दूसरे विश्वयुद्ध के बाद बनी वैश्विक संस्थाओं में तेजी से सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं अब पूरी तरह वर्तमान जियो-पॉलिटिकल हालात को नहीं दिखातीं। NSA ने कहा कि ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों को वैश्विक मंचों पर ज्यादा मजबूत प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए ताकि दुनिया की नई शक्ति संरचना सही तरीके से सामने आ सके।
नई सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा
इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर दुनिया के कई देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारी और रणनीतिक प्रतिनिधि मौजूद थे। Multipolar World Order के दौर में उभरती नई सुरक्षा चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। साइबर सुरक्षा, क्षेत्रीय संघर्ष, समुद्री सुरक्षा और वैश्विक स्थिरता जैसे मुद्दे भी बातचीत का हिस्सा रहे।
कई देशों के प्रतिनिधियों से करेंगे द्विपक्षीय मुलाकात
अधिकारियों के मुताबिक NSA अजीत डोभाल 28 और 29 मई को इस फोरम के इतर कई देशों के प्रतिनिधियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे। इन बैठकों के जरिए भारत वैश्विक सुरक्षा, रणनीतिक साझेदारी और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर अपने सहयोग को और मजबूत करने की कोशिश करेगा।
वैश्विक मंच पर भारत का मजबूत संदेश
मॉस्को में डोभाल की मौजूदगी को भारत की बढ़ती वैश्विक रणनीतिक भूमिका के तौर पर देखा जा रहा है। पश्चिमी एशिया में बढ़ते तनाव, समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर भारत लगातार अपनी स्पष्ट और सख्त नीति दुनिया के सामने रख रहा है। इस मंच के जरिए भारत ने एक बार फिर यह संकेत दिया कि वह वैश्विक सुरक्षा और स्थिरता से जुड़े बड़े मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
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