तेलंगाना को लेकर केंद्र का सौतेला रवैया, जनजातीय विश्वविद्यालय को लेकर नहीं दिया आश्वासन
बीआरएस सदस्य केआर सुरेश रेड्डी द्वारा उठाए गए एक सवाल का जवाब देते हुए, धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि एक केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना एक सतत प्रक्रिया थी लेकिन इस मुद्दे पर विस्तार से उन्होंने कुछ नहीं बताया।

तेलंगाना को लेकर केंद्र सरकार का सौतेला रवैया एक बार फिर से दिखा है। एक तरफ पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश में जहां केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय पहले ही स्थापित हो चुका है और कक्षाएं शुरू हो गई हैं, वहीं तेलंगाना में विश्वविद्यालय की स्थापना के संबंध में कोई काम अभी शुरू नहीं हुआ है।
दिलचस्प बात यह है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बुधवार को भी तेलंगाना में केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय की स्थापना के बारे में कोई आश्वासन नहीं दिया और सिर्फ यह बताया कि शिक्षा मंत्रालय द्वारा गठित साइट चयन समिति ने मुलुगु में एक साइट को अंतिम रूप दे दिया है और एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की गई है।
बीआरएस सदस्य केआर सुरेश रेड्डी द्वारा उठाए गए एक सवाल का जवाब देते हुए, धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि एक केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना एक सतत प्रक्रिया थी, लेकिन इस मुद्दे पर विस्तार से उन्होंने कुछ नहीं बताया। यहां यह भी गौर करने वाली बात है कि तेलंगाना सरकार द्वारा इस उद्देश्य के लिए भूमि और भवन पहले ही आवंटित किए जा चुके हैं।
आपको बता दें कि तेलंगाना राज्य के गठन को आठ साल हो गए हैं, लेकिन केंद्र, जिसने विश्वविद्यालय स्थापित करने की अनुमति दी थी, आज तक इससे संबंधित कोई भी कार्य करने में विफल रहा है। केंद्र ने आंध्रप्रदेश पुनर्गठन अधिनियम-2014 में राज्य में जनजातीय विश्वविद्यालय शुरू करने का आश्वासन दिया था, लेकिन इसे पूरा करने में देरी हुई है।












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