तेलंगाना विधानसभा चुनाव से पहले राजनीति में हुई बैंगन की एंट्री, BRS ने कांग्रेस की गारंटियों पर किया कटाक्ष
तेलंगाना विधानसभा चुनाव की तारीखों की अभी घोषणा नहीं हुई है, इससे पहले राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई है। वहीं राज्य के पिछले चुनाव की तरह इस बार के चुनाव में भी बैंगन की एंट्री हो चुकी है। तेलंगाना की सत्तारुढ़ पार्टी भारतीय राष्ट्र समिति (बीआरएस) ने अपने अधिकारिक सोशल मीडिया पेज पर एक मीम पोस्ट किया है जिसमें 'बैगन के कांग्रेस - बैगन की गारंटी' वाक्यों का इस्तेमाल किया गया है।

बीआरएस ने अपनी पोस्ट में कांग्रेस की चुनाव से पहले ऐलान की गई छह गारंटियों पर तंज कसा है। छह के नंबर को बैगन का रंग और शेप देकर लिखा है 'छह गारंटी, शून्य विश्वसनीयता! वहीं दूसरी और तीसरी लाइन में लिखा हैं तेलंगाना कांग्रेस की 6 गारंटी एक मजाक है, हैदराबादी भाषा में कहें तो बैगन के कांग्रेस - बैगन की गारंटी।
बता दें एक सप्ताह पहले कांग्रेस पार्टी की मुखिया सोनिया गांधी ने अन्य पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में तेलंगाना में कांग्रेस की विशाल सार्वजनिक बैठक के दौरान तेलंगाना के लोगों के लिए छह गारंटियों को घोषण की। जिसके बाद बीआरएस लगातार विपक्षी पार्टी कांग्रेस पर हमले कर रही है।
बीआरएस ने इसे कांग्रेस की झूठी और काल्पनिक गारंटियां भी कहा था। इसके बाद अब कांग्रेस की छह गारंटी, शून्य विश्वसनीयता! बताया है। वहीं राज्य के मंत्री जनता को यह समझाने का प्रयत्न कर रहे हैं कि तेलंगाना में इन गारंटी या योजनाओं को लागू करने से राज्य के वित्त पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
बता दें कांग्रेस तेलंगाना में इन योजनाओं को लागू करने की अपनी प्रतिबद्धता पर लगातार जोर दे रही है। कांग्रेस नेता डोर टू डोर जाकर लोगों को इन गारंटियों के बारे में बता रहे हैं और कांग्रेस शासित पड़ोसी राज्य कर्नाटक का उदाहरण देते हुए दावा कर रहे हैं कि तेलंगाना में सत्ता में आते ही कांग्रेस अपनी छह गारंटियों के वादे को पूरा करेगी।
सत्तारूढ़ बीआरएस जनता को यह समझाने के लिए कहा है कि ये गारंटी एक मजाक से ज्यादा कुछ नहीं हैं। बीआरएस मंत्रियों के द्वारा समझाए जाने के बावजूद कांग्रेस की छह गारंटी जनता के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।
बता दें 20218 के चुनाव में भी ऐसे ही तेलंगाना विधानसभा चुनाव प्रचार में बैंगन को प्रमुखता से स्थान मिला था। दरअसल, उस समय जब ऐप्पल इंक ने हैदराबाद के बजाय बेंगलुरु में अपनी विनिर्माण इकाई की घोषणा की, तो राज्य में निवेश के महत्व पर जोर देते हुए बीआरएस ने ये कहा था बेंगलुरु को ऐप्पल मिला, और हैदराबाद को बैगन मिला, ये खूब लोकप्रिय हुआ था।












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