नहीं टल रहा तेलंगाना में भाजपा का संकट, प्रदेश अध्यक्ष बदलते ही निष्क्रिय हुआ संगठन
तेलंगाना में केसीआर सरकार को चुनौती देने का दावा कर रही भारतीय जनता पार्टी की मुश्किलें हर दिन बढ़ रही हैं। दरअसल हाल में कर्नाटक विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद भाजपा के कैडर का उत्साह लगभग खत्म होता हुआ नजर आ रहा है।
हाल ही में प्रदेश अध्यक्ष पद पर हुए बदलाव के बाद पार्टी कार्यक्रमों की कमी और निष्क्रियता की वजह से भाजपा में ठहराव और भी ज्यादा स्पष्ट दिखाई दे रहा है।

पहले लगातार प्रेस कॉन्फ्रेंस, कड़े बयानों और तुरंत जवाबी हमले के लिए जाना जाने वाला भाजपा का प्रदेश कार्यालय अब खामोश रहता है, जिससे भाजपा का नेतृत्व भी चिंतित है। यहां तक कि वारंगल में हुई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली भी कार्यकर्ताओं के सुस्त मूड में कोई बदलाव नहीं ला सकी, और संगठन एकदम निष्क्रिय सा पड़ा है।
भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने मौजूदा हालात पर चर्चा करते हुए बताया कि नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी इस समय विदेश में हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि वो 21 जुलाई को अपना पदभार संभालेंगे और माना जा रहा है कि इसके बाद प्रदेश भाजपा के कार्यक्रमों में कुछ तेजी देखने को मिलेग।
पार्टी में नई जान फूंकने की रणनीति का खुलासा करते हुए इन नेताओं ने बताया कि किशन रेड्डी और चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष एटाला राजेंदर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में बस यात्रा शुरू करने पर विचार कर रहे हैं। इस यात्रा का उद्देश्य पार्टी की पकड़ मजबूत करना और कैडर में विश्वास पैदा करना है।
भाजपा के सामने राज्य में एक और मुश्किल है। पूर्व अध्यक्ष बंदी संजय का समर्थन करने वाले पार्टी के कुछ नेता पूरी तरह से चुप्पी की स्थिति में आ गए हैं। प्रदेश स्तर पर हुए नेतृत्व परिवर्तन के बाद से वे ना तो पार्टी कार्यालय गए हैं और ना ही उन्होंने कांग्रेस या बीआरएस के खिलाफ कोई जवाबी बयान जारी किया है।












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