एकनाथ शिंदे सरकार के लिए बड़ी जीत, बॉम्बे हाईकोर्ट ने BMC पर फैसले को बताया सही
शिंदे सरकार के इस फैसले के खिलाफ शिवसेना (ठाकरे गुट) के पूर्व नगरसेवक राजू पेडणेकर और समीर देसाई ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसपर आज कोर्ट ने फैसला सुना दिया।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) के प्रभाग (वॉर्ड) परिसीमन को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जो कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे सरकार के लिए बड़ी जीत के रूप में सामने आया है, जबकि राज्य की पूर्व महा विकास आघाडी के लिए बड़ा झटका साबित हुआ है।
न्यायमूर्ति एस. बी. शुकरे व न्यायमूर्ति एम. डब्ल्यू. चंदवानी की खंडपीठ ने कहा कि बीएमसी के वॉर्ड परिसीमन के संबंध में शिंदे सरकार की ओर से लिया गया फैसला न तो मनमानीपूर्ण है और न ही अतार्किक है। इसके उलट परिसीमन के फैसले के खिलाफ दायर की गई याचिका सारहीन नजर आ रही है, लिहाजा इसे खारिज किया जाता है। खड़पीठ के इस फैसले से अब साफ हो गया है कि बीएमसी के 236 नहीं, 227 वॉर्ड ही होंगे।
राज्य की शिंदे सरकार ने अगस्त 2022 में अध्यादेश जारी कर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की अगुआई में बनी महा विकास अघाड़ी सरकार के उस फैसले को पलट दिया था, जिसके तहत बीएमसी की वॉर्ड संख्या 227 से बढ़ाकर 236 कर दी थी।
शिंदे सरकार के इस फैसले के खिलाफ शिवसेना (ठाकरे गुट) के पूर्व नगरसेवक राजू पेडणेकर और समीर देसाई ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका पर शिंदे सरकार के फैसले को मनमानीपूर्ण और असंवैधानिक होने का दावा किया गया था। इसके साथ ही वार्ड परिसीमन के संबंध में जारी किए गए अध्यादेश को निरस्त करने की मांग की गई थी।
सुनवाई के दौरान राज्य के महाधिवक्ता बिरेंद्र सराफ ने दावा किया था कि नगरसेवकों की संख्या कानून के तहत तय की गई है। साल 2011 की जनगणना आधार पर दो बार बीएमसी के चुनाव हुए हैं। इस दौरान 227 वॉर्ड में चुनाव हुए है। तत्कालीन समय में भी जनसंख्या बढ़ी हुई थी। ऐसे में केवल जनसंख्या के ताजे आंकड़ों के आधार पर वॉर्ड संख्या को बढ़ाया और बदला नहीं जा सकता है। राज्य सरकार का फैसला सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुरूप है।












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