भोपाल, इंदौर व जबलपुर स्मार्ट सिटी बनने की दौड़ में शामिल, 95 फीसदी प्रोजेक्ट पूरे
भोपाल। कई साल की प्रतीक्षा के बाद आखिरकर मध्यप्रदेश के इंदौर, भोपाल और जबलपुर को देश के पहले स्मार्ट शहर घोषित करने की सूची में शामिल किया जाना तय किया गया है। अब तक इन शहरों ने 95 फीसदी प्रोजेक्ट पूरे कर लिए गए हैं। ऐसे में उम्मीद है कि इस साल के अंत तक ये तीनों शहर स्मार्ट सिटी का दर्जा पा लेंगे।

दरअसल, केन्द्र सरकार ने प्रदेश सहित देश के सभी 78 शहरों को स्मार्ट शहरों में तब्दील करने के लिए जून 2023 तक का समय दिया है। मप्र के सातों शहरों के लिए 4,203 करोड़ से अधिक की राशि जारी की गई है, जिसमें से 3,795 करोड़ सौ से अधिक प्रोजेक्ट्स को पूरा करने में खर्च किए गए हैं।
भोपाल स्मार्ट सिटी ने 95प्रतिशत प्रोजेक्ट्स पूरे कर लिए हैं। सरकार ने इस सिटी को 990 करोड़ दिए थे, जिसमें से 987.61 करोड़ खर्च हो चुके हैं। इंदौर ने 90 फीसदी प्रोजेक्ट पूरे कर 885.45 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। ताजा स्थिति के हिसाब से भोपाल, इंदौर, जबलपुर में दो से चार माह के अंदर प्रोजेक्ट पूरे हो जाएंगे।
वहीं, ग्वालियर, उज्जैन, सागर और सतना स्मार्ट शहर के विकास और निर्माण कार्य के सौ फीसदी टेंडर जारी कर दिए गए हैं। इनका काम भी समय-सीमा में पूरा होने के आसार हैं।
मध्यप्रदेश के अलावा 90 प्रतिशत से ज्यादा प्रोजेक्ट पूरा करने वाली स्मार्ट सिटी, राशि केंद्रांश की...
शहर : मिली राशि(करोड़ रुपए में) : राशि खर्च : पूर्ण प्रोजेक्ट
अहमदाबाद : 392 : 392 : 95प्रतिशत
फरीदाबाद : 295 : 294 : 95प्रतिशत
धर्मशाला : 245 : 245 : 95प्रतिशत
नामची : 294 : 294 : 95प्रतिशत
गंगटोक : 243 : 242 : 95प्रतिशत
पुणे : 392 : 392 : 95प्रतिशत
भुवनेश्वर : 399.93 : 392 : 92प्रतिशत
सूरत : 498 : 490 : 93प्रतिशत
आगरा : 392 : 392 : 95प्रतिशत
कानपुर : 294 : 290 : 94प्रतिशत
मध्यप्रदेश के 7 शहरों की स्थिति, केंद्रांश और राज्यांश
शहर : जारी राशि : खर्च राशि
भोपाल : 990 : 987.61
इंदौर : 935 : 885.45
जबलपुर : 742 : 591.20
ग्वालियार : 322 : 251.01
उज्जैन : 631.50 : 559.12
सागर : 336.50 : 327
सतना : 246 : 193
कुल : 4,203 : 3,795.32
शहरों को तेजी से स्मार्ट बनाने में आंध्रप्रदेश आगे
शहरों को स्मार्ट सिटी की शक्ल देने में आंध्र प्रदेश सबसे आगे है। यहां के चार शहरों का चयन स्मार्ट सिटी के लिए हुआ था, जिसमें विशाखापटऩम, तिरुपति, काकीनाड़ा, अमरावती शहर शामिल हैं, इन सभी शहरों में 87 फीसदी प्रोजेक्ट पूरे हो गए हैं।
85 फीसदी धन का उपयोग
सरकार ने वर्ष 2015 से 2018 तक चार चरणों में 100 स्मार्ट सिटी का चयन किया था। इसमें करीब 22 शहरों ने प्रस्ताव वापस ले लिए अथवा वे इसके लिए तैयार नहीं हुए थे। इसमें से 78 स्मार्ट सिटी और 10 अन्य शहरों को केन्द्र सरकार ने स्मार्ट सिटी मिशन के तहत 28413 करोड़ रुपए से अधिक की राशि जारी की थी, जिसमें से मार्च तक इन शहरों ने 23,668 करोड़ रुपए अत्याधुनिक सेवाएं देने और स्मार्ट शहर बनाने में खर्च कर दिए हैं। इन सभी शहरों को स्मार्ट बनाने के लिए 6,721 परियोजनाएं तैयार की जानी हैं।
सभी प्रोजेक्टों के टेंडर जारी
काम करने वाली एजेंसियों को एक वर्ष के अंदर पूरा करने के लिए टारगेट दिया गया है। सतना स्मार्ट सिटी का काम पीछे है। दरअसल, वहां स्मार्ट सिटी बनाने के संबंध में दो बार स्थान बदला गया। यहां अभी तक सिर्फ 40 फीसदी काम हो पाया है।












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