पंजाब सरकार की सभी बिल्डिंग बनेंगी पावर जेनरेटर, लगाए जाएंगे सोलर फोटोवोल्टिक पैनल

पंजाब सरकार ने कहा कि जितने भी सरकारी बिल्डिंग है, सभी पावर जेनरेटर होंगी। सभी बिल्डिंग के ऊपर सोलर फोटोवोल्टिक पैनल लगाए जाएंगे।

भगवंत मान

पंजाब सरकार के राज्य में स्थित सभी सरकारी कार्यालय व सरकारी अधिकारियों की रिहायशें अगले कुछ ही महीनों में पावर जैनरेटर यानि बिजली पैदा करने वाले स्थान बनेंगे। इसके लिए कसरत शुरू हो चुकी है और पंजाब सरकार की नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत विभाग अधीन काम करने वाली पंजाब एनर्जी डिवैल्पमैंट अथॉरिटी द्वारा आगामी चंद महीनों के दौरान राज्य के 100 फीसद सरकारी कार्यालयों पर सोलर फोटोवोल्टिक पैनल लगा दिए जाएंगे।

1500 सरकारी इमारतों को किया गया है चिन्हित
पंजाब सरकार की एजैंसी पंजाब एनर्जी डिवैल्पमैंट अथॉरिटी द्वारा अब तक जो राज्य के सरकारी कार्यालयों का डाटा तैयार किया गया है, उसके मुताबिक सरकारी कार्यालयों में औसतन 88 मैगावॉट बिजली की जरूरत पड़ती है। इसके लिए सभी सरकारी कार्यालयों की इमारतों की पेडा द्वारा जांच की जा रही है ताकि उनकी छतों के ऊपर लगने वाले सोलर पैनलों का डाटा तैयार किया जा सके। पेडा द्वारा इस योजना के पहले चरण के लिए 1500 सरकारी इमारतों को चिन्हित किया है और उनकी छतों के बिना छाया वाले क्षेत्र का डाटा तैयार किया है, जिसके मुताबिक यह क्षेत्र 30 लाख वर्ग फुट के आसपास आंका गया है। इन सरकारी कार्यालयों की बिजली खपत का आंकलन भी तकरीबन 27 मैगावॉट तक का किया गया है।

पेडा के डायरैक्टर सुमित जारंगल आई.ए.एस. का कहना है कि योजना के पहले फेज की इंस्टॉलेशन करने के लिए प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इसी माह के अंत तक टैंडर प्रक्रिया पूरी करके काम अलॉट कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पेडा ने अपनी तरफ से हर महीने औसतन 1-2 मैगावॉट कैपेसिटी जोड़ऩे का लक्ष्य रखा है ताकि जल्द सभी सरकारी इमारतों को क्लीन एनर्जी जैनरेशन के भागीदार बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि सोलर पैनल स्थापित करने से पहले इमारतों की इंजीनियरिंग की भी जांच की जाती है ताकि पता चल सके कि सोलर पैनल लगने के बाद इमारत को कोई नुक्सान तो नहीं पहुंचेगा।

रैसको मॉडल के अधीन चल रहा है सरकारी इमारतों के सोलराइजेशन का काम
पंजाब सरकार की सरकारी इमारतों को सोलर एनर्जी जैनरेट करने वाली जगहों में बदलने के लिए पंजाब एनर्जी डिवैल्पमैंट अथॉरिटी द्वारा रीन्यूएबल एनर्जी सर्विसेज कंपनी (रैसको) मॉडल के तहत काम किया जा रहा है। इसके लिए सरकार को सोलर फोटोवोल्टिक पैनल लगाने के लिए किसी भी प्रकार का खर्चा नहीं करना पड़ेगा, बल्कि निजी कंपनियां यह फोटोवोल्टिक सोलर पैनल लगाएंगी और वहां से उत्पन्न होने वाली बिजली को पंजाब सरकार के पास बेचेंगी। यह अनुबंध 25 वर्ष के लिए होंगे और सबसे कम प्रति यूनिट बिजली मूल्य देने वाली कंपनी को ही उक्त कॉन्ट्रैक्ट दिया जाएगा। इस योजना से सरकारी कार्यालयों के बिजली बिलों के खर्च में 40 फीसदी से 60 फीसदी तक की कमी आएगी और इन सरकारी कार्यालयों की बचने वाली बिजली आम लोगों व इंडस्ट्री के काम आएगी।

एक मैगावॉट के लिए छह करोड़ का खर्च
सोलर फोटोवोल्टिक पैनलों से मिलने वाली बिजली क्लीन बिजली की श्रेणी में आती है क्योंकि पनबिजली या थर्मल पावर प्लांट्स की तरह इससे पर्यावरण को कोई नुक्सान नहीं होता, लेकिन यह थोड़ी महंगी भी पड़ती है। तकनीकी माहिर बताते हैं कि एक मैगावाट कैपेसिटी के सोलर एनर्जी सिस्टम के लिए तकरीबन 6 करोड़ रुपए का खर्चा आता है। इसीलिए सरकारें अपने खर्च पर इन्हें स्थापित करने से कतराती रही हैं, लेकिन निजी कंपनियों के साथ लंबी अवधि के करार करके सरकार इस खर्च से भी बच जाती है और साथ ही इन प्रोजैक्टों की सांभ-संभाल के लिए तैनात किए जाने वाले स्टाफ के खर्च की भी बचत होती है।

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