सीएम जयराम के गढ़ मंडी में ही क्यों रोड शो करेंगे अरविंद केजरीवाल?
मंडी, 25 मार्च: पंजाब में अप्रत्याशित जीत के बाद उत्साहित आम आदमी पार्टी अब हिमाचल प्रदेश में भी अपने पांव पसारने में जुट गई है। पंजाब की जोरदार जीत के बाद पार्टी ने हिमाचल प्रदेश में अपना अगला टारगेट सेट किया है। इसके लिए पार्टी ने कदमताल भी शुरू कर दी है।

6 अप्रैल को आम आदमी पार्टी ने मंडी में एक रोड शो को आयोजित करने की रूपरेखा बनाई है। इस रोड शो में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और पंजाब के सीएम भगवंत मान विशेष रूप से शामिल होकर आम आदमी पार्टी की तरफ से प्रदेश में चुनावों का शंखनाद करेंगे। आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रभारी रत्नेश गुप्ता ने ज्यादा से ज्यादा लोगों से इस रोड शो में शामिल होने की अपील की है।
सीएम के गृह जिला ही क्यों?
अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर आम आदमी पार्टी ने अपनी चुनावी हुंकार के लिए मंडी का ही चयन क्यों किया? राजनीति के लिहाज से देखा जाए तो कांगड़ा (15 सीटें) हिमाचल प्रदेश का सबसे बड़ा जिला है और इसी जिला (10 सीटें) में सबसे अधिक सीटें भी हैं, लेकिन फिर भी पार्टी ने मंडी जिला का चुनाव किया। इसके पीछे आम आदमी पार्टी की रणनीति सीएम जयराम ठाकुर के गृहजिला से उन्हें घेरने की शुरूआत करने से है। प्रदेश के सीएम जयराम ठाकुर मंडी जिला से ही आते हैं और यहां पर उनका सर्वाधिक जनाधार है। ऐसे में आम आदमी पार्टी यही चाह रही है कि सीएम को उनके गृहजिला में घेरने के साथ अपने चुनाव प्रचार का आगाज किया जाए।
आखिर क्या अस्तित्व है हिमाचल में तीसरे विकल्प का
हिमाचल प्रदेश की राजनीति की बात करें तो यहां तीसरा विकल्प अधिक टिकता हुआ नजर नहीं आया। कांग्रेस से मुखर होकर पूर्व केंद्रीय मंत्री पंडित सुखराम ने हिमाचल विकास कांग्रेस के नाम से पार्टी बनाई। पांच विधायकों के साथ उन्होंने 1998 में भाजपा के साथ गठबंधन की सरकार बनाई और पांच साल तक यह सरकार चली भी, लेकिन 2003 के चुनावों में सिर्फ पंडित सुखराम ही जीत पाए और बाकी सभी विधायक हार गए। 2007 में उन्होंने फिर से अपनी पार्टी का विलय कांग्रेस में कर दिया. इसके बाद 2012 के चुनावों में भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष एवं पूर्व सांसद महेश्वर सिंह ने हिमाचल लोकहित पार्टी का गठन किया। पूरे प्रदेश में सिर्फ महेश्वर सिंह ही जीत पाए. 2017 तक उनकी पार्टी का भी अस्तित्व समाप्त हो गया और उन्होंने फिर से भाजपा ज्वाइन कर ली। इसके अलावा बसपा, सपा, टीएमसी, एनसीपी और अन्य कई प्रकार की पार्टियां यहां चुनावों के समय आती रहती हैं, लेकिन कभी जीत नहीं पाती. सपा को कभी कभार एक-आध विधायक मिल जाता है, लेकिन वो भी बाद में पलटी मार लेता है।
क्या कहते हैं सदर से विधायक अनिल शर्मा
पूर्व केंद्रीय मंत्री पंडित सुखराम के बेटे सदर विधायक अनिल शर्मा का कहना है कि क्षेत्रिय दलों को संचालित करने में संसाधनों की कमी आड़े आती है। आम आदमी पार्टी के पास संसाधनों की कमी नहीं है। लेकिन यह आने वाला समय बताएगा कि कांग्रेस और भाजपा के कितने रूष्ठ नेता इसमें शामिल होते हैं और उसी आधार पर पार्टी के आगामी भविष्य के बारे में कुछ कहा जा सकता है, लेकिन कभी भी किसी पार्टी को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
भाजपा और कांग्रेस बोली- तीसरे विकल्प का कोई वजूद नहीं
इससे हटकर हिमाचल प्रदेश में सिर्फ कांग्रेस और भाजपा का ही वजूद रहा है। हिमाचल प्रदेश में एक बार भाजपा की सरकार बनती है तो दूसरी बार कांग्रेस की. यहां पर इन्हीं दो दलों का वजूद रहा है। यही कारण है कि दोनों की दल आपस में मुकाबला होने की बात कहकर तीसरे विकल्प को पूरी तरह से नकार रहे हैं। भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सुरेश कश्यप का कहना है कि आम आदमी पार्टी के आने से उन्हें कोई नुकसान नहीं होगा। वहीं, कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता सोहन लाल ठाकुर का कहना है कि अगर पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बनी है तो उसके लिए वहां पर लोगों ने दस वर्ष पूर्व से काम करना शुरू किया था. ऐसा नहीं है कि आज पार्टी खड़ी कर दी हो और जीतकर आ गए हों. आम में सिर्फ रूष्ठ लोग जाएंगे, जिसका कोई नुकसान नहीं होगा।
हिमाचल प्रदेश के लोग भी आम आदमी पार्टी को लेकर मिलीजुली प्रतिक्रिया दे रहे हैं. लोगों का कहना है कि पंजाब में अगर आम आदमी पार्टी को सरकार बनाने का मौका मिला है तो अब यह देखना होगा कि वहां पर किए गए वायदों को पार्टी की सरकार कितना पूरा कर पाती है. उसी आधार पर हिमाचल में भी पार्टी का भविष्य तय होगा। यहां पर सरकार बनाने के लिए संगठन को न सिर्फ खड़ा करना होगा बल्कि उसे मजबूत भी बनाना होगा।












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