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Vishwakarma Puja 2017: रावण की 'सोने की लंका' का निर्माण विश्वकर्मा ने ही किया था

नई दिल्ली। हमारी पौराणिक कथाओं में ऐसी बहुत सारी कहानियां हैं जो ये साबित करती है कि विश्वकर्मा ही निर्माण और सृजन के देवता हैं। इन्होंने ही सोने की लंका का निर्माण किया था। विश्वकर्मा एक हस्तलिपि कलाकार थे। जिन्होंने हमें सभी कलाओं का ज्ञान दिया था।

आइए जानते हैं इनके बारे में कुछ खास बातें...

महर्षि अंगिरा के ज्येष्ठ पुत्र बृहस्पति की बहन भुवना जो ब्रह्मविद्या जानने वाली थी वह अष्टम् वसु महर्षि प्रभास की पत्नी बनी और उससे सम्पुर्ण शिल्प विद्या के ज्ञाता प्रजापति विश्वकर्मा का जन्म हुआ।

शिल्पशस्त्र का अविष्कार करने वाला

शिल्पशस्त्र का अविष्कार करने वाला

  • भारत में विश्वकर्मा को शिल्पशस्त्र का अविष्कार करने वाला देवता माना जाता है।
  • प्राचीन ग्रन्थों के मनन-अनुशीलन से यह विदित होता है कि जहां ब्रहा, विष्णु ओर महेश की वन्दना-अर्चना हुई है वहीं भगवान विश्वकर्मा को भी स्मरण-परिष्टवन किया गया है।
  • विश्वकर्मा" शब्द से ही यह अर्थ-व्यंजित होता है।
  • 17 सितंबर

    17 सितंबर

    • भारत में विश्वकर्मा जयंती हर बार 17 सितंबर को बड़े धूमधाम से मनाई जाती है।
    • इस दिन औद्योगिक क्षेत्रों, फैक्ट्रियों, लोहे की दुकान, वाहन शोरूम, सर्विस सेंटर, कम्प्यूट सेन्टर, हार्डवेयर दुकाने आदि में विश्वकर्मा भगवान की विधिवत पूजा की जाती है।
    • अधिकतर कल-कारखाने बंद

      अधिकतर कल-कारखाने बंद

      • विश्वकर्मा जयंती वाले दिन अधिकतर कल-कारखाने बंद रहते हैं और लोग हर्षोल्लास के साथ भगवान विश्वकर्मा की पूजा करते है।
      • कुछ लोग पूजा अर्चना के बाद गरीबों को दान भी करते हैं और गंगा किनारे आरती भी करते हैं।
      • कैसे करें पूजा?

        कैसे करें पूजा?

        • विश्वकर्मा पूजा के लिए व्यक्ति को प्रातः स्नान आदि करने के बाद अपनी पत्नी के साथ पूजा करना चाहिए।
        • हाथ में फूल, अक्षत लेकर भगवान विश्वकर्मा का नाम लेते हुए घर में अक्षत छिड़कना चाहिए।
        • भगवान विश्वकर्मा की पूजा करते समय दीप, धूप, पुष्प, गंध, सुपारी आदि का प्रयोग करना चाहिए।
        • पूजा स्थान पर कलश में जल तथा विश्वकर्मा की मूर्ति स्थापित करनी चाहिए।
        • पूजा के बाद...

          पूजा के बाद...

          • पूजा के बाद विविध प्रकार के औजारों और यंत्रों आदि को जल, रोली, अक्षत, फूल और मि‍ठाई से पूजें।
          • फ‍िर व‍िध‍िव‍त हवन करें, जिससे शुद्धिकरण हो।

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