Mangalnath Temple: उज्जैन के मंगलनाथ मंदिर में क्यों होती है शिवजी की पूजा?

Mangalnath Temple: मध्यप्रदेश की प्रमुख धार्मिक नगरी, सप्तपुरियों में से एक अवंतिका और बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में विश्व प्रसिद्ध मंगलनाथ का मंदिर है। इस मंदिर में भगवान शिव का दिव्य शिवलिंग स्थापित है और यहां देशभर से लोग मंगलग्रह की शांति करवाने आते हैं। मंगल दोष के निवारण के इस इस स्थान पर पूरे वर्ष भात पूजा करवाने वालों का मेला सा लगा रहता है और श्रावण मास में तो यहां विशेष अनुष्ठान पूजन होता है।

Mangalnath Temple

लेकिन क्या आप जानते हैं मंगल ग्रह की शांति के लिए इस स्थान पर शिवजी की पूजा क्यों की जाती है। यहां मंगलनाथ के रूप में शिवजी क्यों प्रतिष्ठित हैं। शिवजी का मंगल से क्या संबंध है। ऐसे अनेक प्रश्नों का उत्तर शिव महापुराण में मिलता है।

28 श्लोकों में भगवान शिव और मंगल के संबंधों में वर्णन

शिव महापुराण की रुद्रसंहिता के पार्वतीखंड के दसवें अध्याय में इस संबंध में एक कथा मिलती है। 28 श्लोकों में भगवान शिव और मंगल के संबंधों में वर्णन दिया हुआ है। इसके अनुसार सती के विरह में भगवान शिव शोक प्रकट करते हुए संपूर्ण लोकों में विचरण कर रहे थे किंतु उन्हें कहीं भी सती का दर्शन नहीं हो पा रहा था। दुख से पीड़ित शिव ने यत्नपूर्वक मन को एकाग्र कर दुख दूर करने वाली महासमाधि लगाई और अपने अविनाशी स्वरूप का दर्शन किया। इस प्रकार उन्हें समाधि लगाए बहुत वर्ष बीत गए तो उन्होंने समाधि का त्याग किया।

धरती माता एक सुंदर स्त्री का रूप धरकर प्रकट हुई

प्रभु ने जब समाधि तोड़ी और अपने नेत्र खोले तो उनके ललाट से पसीने की एक बूंद धरती पर गिरी जिससे शीघ्र ही एक बालक उत्पन्न हुआ। वह बालक चार भुजाओं से युक्त, लाल वर्ण वाला, अत्यंत सुंदर रूप वाला, अलौकिक तेज से संपन्न, तेजस्वी तथा शत्रुओं के लिए कष्टकारी था। वह बालक शिवजी के समीप जाकर साधारण बालक की तरह रोने लगा। बालक को रोता देख शिवजी के भय से धरती माता एक सुंदर स्त्री का रूप धरकर प्रकट हुई और बालक को गोद में उठा लिया और उसे दुलार करने लगी।

तुम मेरे पुत्र का प्रेमपूर्वक पालन करो

यह दृश्य देख शिवजी मुस्कुराए और बोले हे धरणि, तुम मेरे पुत्र का प्रेमपूर्वक पालन करो। यद्यपि यह मेरा पुत्र है किंतु यह तुम्हारे पुत्र के रूप में ख्यात होगा। इसका पूजन सदैव मंगलप्रद रहेगा इसलिए इसका नाम मंगल प्रसिद्ध होगा। तब पुत्र को लेकर धरती अपने स्थान को चली गई। बालक बड़ा हुआ और उसका नाम भौम प्रसिद्ध हुआ। इस प्रकार भूमिपुत्र मंगल विश्वेश्वर की कृपा से ग्रहपद पाकर शुक्र लोक से भी आगे दिव्य लोक में प्रतिष्ठित हुआ।

मंगल ग्रह की शांति

चूंकि मंगल शिवजी का ही पुत्र है इसलिए शिवजी का पूजन करने से मंगल ग्रह की शांति होती है। इसीलिए उज्जैन में मंगलनाथ के रूप में भगवान प्रतिष्ठित हैं।

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