Sawan 2024 ka Somwar: सावन का तीसरा सोमवार आज, चारों ओर 'हर-हर महादेव की गूंज'
Sawan 2024 ka Somwar aaj: आज सावन माह का तीसरा सोमवार है, सुबह से शिवालयों में भक्तों की भी़ड़ देखी जा रही है, लोगों में शिवलिंग पर जल चढ़ाने की होड़ मची है।
चारों ओर 'हर-हर महादेव' की गूंज है। आपको बता दें कि सावन के सोमवार की बहुत ज्यादा मान्यता है।सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होता है और इस दौरान श्रद्धालु भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।

सावन के तीसरे सोमवार पर बहुत सारे श्रद्धालुओं ने व्रत रखा हुआ है , कहते हैं कि आज के दिन जो भी भागवान शिव की पूजा सच्चे मन से करता है उसकी हर मनोकामना पूरी होती है।
पूजा विधि ( Puja Vidhi)
- सबसे पहले प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- फिर व्रत रख रहे हैं तो व्रत का संकल्प लें।
- शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, शहद और घी से चढ़ाएंथ
- शुद्ध जल से शिवलिंग का अभिषेक करें और "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करें।
- शिवलिंग को चंदन, भस्म, धूप, दीप आदि अर्पित करें।
- शिवलिंग पर फूल और माला अर्पित करें।
- शिव जी की आरती करें और उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।
मंत्र ( Lord Shiva Mantra)
महामृत्युंजय मंत्र:
- ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
- उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
पंचाक्षर मंत्र
ॐ नमः शिवाय।
मुहूर्त ( Puja Muhurat, 5th August)
- अभिजीत मुहूर्त: प्रातः 11:36 बजे से 12:24 बजे तक।
- संध्याकाल मुहूर्त: 6:30 बजे से 7:30 बजे तक।
आरती ( Shiv ji ki Aaarti)
- ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
- ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
- एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे।
- हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
- दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
- त्रिगुण रूप निरखत त्रिभुवन जन मोहे॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
- अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
- त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
- श्वेताम्बर पीताम्बर बाघंबर अंगे।
- सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
- कर के मध्य कमण्डल चक्र त्रिशूलधारी।
- जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
- ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
- प्रणवाक्षर के मध्ये ये तीनों एका॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
- पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा।
- भांग धतूरे का भोजन, भस्मी में वासा॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
- जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला।
- शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
- काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
- नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
- त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ नर गावे।
- कहत शिवानन्द स्वामी, मनवान्छित फल पावे॥
- ओम जय शिव ओंकारा॥ स्वामी ओम जय शिव ओंकारा॥
Disclaimer: इस आलेख का मतलब किसी भी तरह का अंधविश्वास पैदा करना नहीं है। यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।












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