Sakat Chauth 2023: आज है सकट चौथ, पढ़ें मंत्र, चालीसा और आरती
Sakat Chauth Mantra : सकट चौथ के दिन भगवान गणेश की विशेष मंत्रों से पूजा, आरती और चालीसा पाठ करने से भक्त को दोहरा फल प्राप्त होता है।

Sakat Chauth 2023 (मंत्र, चालीसा और आरती): पु्त्र की सलामती के लिए रखा जाने वाला सकट चौथ या संकष्टी चतुर्थी व्रत 10 जनवरी को है। इस दिन माएं अपने बेटे के लिए पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं और शाम को चांद देखकर अपना व्रत खोलती हैं। उत्तर भारत में इस उपवास की बहुत मान्यता है। माना जाता है कि इस पूजा को करने से इंसान के सारे कष्टों का अंत होता है और उस विघ्नहर्ता की कृपा हमेशा बनी रहती है। उसे यश, ज्ञान और वैभव की प्राप्ति होती है। मुश्किलें उसका कुछ भी बिगाड़ नहीं पाती है और वो हमेशा खुश और सेहतमंद रहता है। इस दिन भगवान गणेश की विशेष मंत्रों से पूजा, आरती और चालीसा पाठ करने से भक्त को दोहरा फल प्राप्त होता है।

गणेश जी को खुश करने के लिए कीजिए इन मंत्रों का जाप
- ॐ गं गणपतये सर्व कार्य सिद्धि कुरु कुरु स्वाहा ॥
- गजाननाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्।।श्री वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटी समप्रभा निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व-कार्येशु सर्वदा॥
- ॐ एकदन्ताय विहे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात् ॥
- ॐ ऐं ह्वीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे'
- ऊं ह्रीं ग्रीं ह्रीं
गणेश चालीसा
दोहा
- जय गणपति सद्गुण सदन कविवर बदन कृपाल।
- विघ्न हरण मंगल करण जय जय गिरिजालाल॥
चौपाई
- जय जय जय गणपति राजू। मंगल भरण करण शुभ काजू॥
- जय गजबदन सदन सुखदाता। विश्व विनायक बुद्धि विधाता॥
- वक्र तुण्ड शुचि शुण्ड सुहावन। तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन॥
- राजित मणि मुक्तन उर माला। स्वर्ण मुकुट सिर नयन विशाला॥
- पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं। मोदक भोग सुगन्धित फूलं॥
- सुन्दर पीताम्बर तन साजित। चरण पादुका मुनि मन राजित॥
- धनि शिवसुवन षडानन भ्राता। गौरी ललन विश्व-विधाता॥
- ऋद्धि-सिद्धि तव चँवर डुलावे। मूषक वाहन सोहत द्वारे॥
- कहौ जन्म शुभ कथा तुम्हारी। अति शुचि पावन मंगल कारी॥
- एक समय गिरिराज कुमारी। पुत्र हेतु तप कीन्हा भारी॥
- भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा। तब पहुंच्यो तुम धरि द्विज रूपा।
- अतिथि जानि कै गौरी सुखारी। बहु विधि सेवा करी तुम्हारी॥
- अति प्रसन्न ह्वै तुम वर दीन्हा। मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा॥
- मिलहि पुत्र तुहि बुद्धि विशाला। बिना गर्भ धारण यहि काला॥
- गणनायक गुण ज्ञान निधाना। पूजित प्रथम रूप भगवाना॥
- अस कहि अन्तर्धान रूप ह्वै। पलना पर बालक स्वरूप ह्वै॥
- बनि शिशु रुदन जबहि तुम ठाना। लखि मुख सुख नहिं गौरि समाना॥
- सकल मगन सुख मंगल गावहिं। नभ ते सुरन सुमन वर्षावहिं॥
- शम्भु उमा बहुदान लुटावहिं। सुर मुनि जन सुत देखन आवहिं॥
- लखि अति आनन्द मंगल साजा। देखन भी आए शनि राजा॥
- निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं। बालक देखन चाहत नाहीं॥
- गिरजा कछु मन भेद बढ़ायो। उत्सव मोर न शनि तुहि भायो॥
- कहन लगे शनि मन सकुचाई। का करिहौ शिशु मोहि दिखाई॥
- नहिं विश्वास उमा कर भयऊ। शनि सों बालक देखन कहऊ॥
- पड़तहिं शनि दृग कोण प्रकाशा। बालक शिर उड़ि गयो आकाशा॥
- गिरजा गिरीं विकल ह्वै धरणी। सो दुख दशा गयो नहिं वरणी॥
- हाहाकार मच्यो कैलाशा। शनि कीन्ह्यों लखि सुत को नाशा॥
- तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधाए। काटि चक्र सो गज सिर लाए॥
- बालक के धड़ ऊपर धारयो। प्राण मन्त्र पढ़ शंकर डारयो॥
- नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे। प्रथम पूज्य बुद्धि निधि वर दीन्हे॥
- बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा। पृथ्वी की प्रदक्षिणा लीन्हा॥
- चले षडानन भरमि भुलाई। रची बैठ तुम बुद्धि उपाई॥
- चरण मातु-पितु के धर लीन्हें। तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें॥
- धनि गणेश कहि शिव हिय हरषे। नभ ते सुरन सुमन बहु बरसे॥
- तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई। शेष सहस मुख सकै न गाई॥
- मैं मति हीन मलीन दुखारी। करहुं कौन बिधि विनय तुम्हारी॥
- भजत रामसुन्दर प्रभुदासा। लख प्रयाग ककरा दुर्वासा॥
- अब प्रभु दया दीन पर कीजै। अपनी शक्ति भक्ति कुछ दीजै॥
दोहा
- श्री गणेश यह चालीसा पाठ करें धर ध्यान। नित नव मंगल गृह बसै लहे जगत सन्मान॥
- सम्वत् अपन सहस्र दश ऋषि पंचमी दिनेश। पूरण चालीसा भयो मंगल मूर्ति गणेश॥

गणेश आरती
- जय गणेश जय गणेश,
- जय गणेश देवा ।
- माता जाकी पार्वती
- पिता महादेवा ॥
- एक दंत दयावंत,
- चार भुजा धारी ।
- माथे सिंदूर सोहे
- मूसे की सवारी ॥
- जय गणेश जय गणेश,
- जय गणेश देवा ।
- माता जाकी पार्वती
- पिता महादेवा ॥
- पान चढ़े फल चढ़े,
- और चढ़े मेवा ।
- लड्डुअन का भोग लगे
- संत करें सेवा ॥
- जय गणेश जय गणेश,
- जय गणेश देवा ।
- माता जाकी पार्वती
- पिता महादेवा ॥
- अंधन को आंख देत,
- कोढ़िन को काया ।
- बांझन को पुत्र देत
- निर्धन को माया ॥
- जय गणेश जय गणेश,
- जय गणेश देवा ।
- माता जाकी पार्वती
- पिता महादेवा ॥
- 'सूर' श्याम शरण आए,
- सफल कीजे सेवा ।
- माता जाकी पार्वती
- पिता महादेवा ॥
- जय गणेश जय गणेश,
- जय गणेश देवा ।
- माता जाकी पार्वती
- पिता महादेवा ॥
- दीनन की लाज रखो,
- शंभु सुतकारी ।
- कामना को पूर्ण करो
- जाऊं बलिहारी ॥
- जय गणेश जय गणेश,
- जय गणेश देवा ।
- माता जाकी पार्वती
- पिता महादेवा ॥












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