Ganesha Chaturthi 2021: जानिए क्या है 'गणेश चतुर्थी' की कथा?
नई दिल्ली, 10 सितंबर। आज पूरे देश में गणेश चतुर्थी का त्योहार पूरे हर्षोल्लास से मनाया जा रहा है। पूरे 10 दिन चलने वाले इस उत्सव को लेकर बच्चे से लेकर बड़े तक काफी उत्साहित रहते हैं। भले ही कोरोना महामारी के कारण देश में इस बार चतुर्थी पर भव्य आयोजन नहीं हो रहे हैं लेकिन फिर भी त्योहार को लेकर लोगों का जोश बिल्कुल भी ठंडा नहीं पड़ा है। गणेश उत्सव के बारे में कई कहानियां प्रचलित हैं, इनमे से एक कहानी है जो सबसे ज्यादा मशहूर है, उसके बारे में आपको बताते हैं।

पौराणिक मान्यताओं में मुताबिक एक बार नर्मदा नदी के किनारे भगवान शिव और पार्वती बैठे हुए थे, ऐसे में पार्वती जी को चौपण खेलने की इच्छा जागी। उन्होंने भगवान से आग्रह किया तो भगवान शिव भी तैयार हो गए। लेकिन पार्वती जी ने कहा कि हमारी हारजीत का फैसला कौन करेगा तो इस पर शिव जी ने वहीं पड़े कंकड़-पत्थर से एक बालक को बनाया, जो देखने में काफी सुंदर था। लेकिन खेल में तीनों बार पार्वती जी के जीतने पर भी उस बालक ने महादेव को ही विजेता बताया।

इस पर पार्वती जी गुस्सा हो गईं और उन्होंने उस बालक को श्राप दे दिया और कहा कि तुम इसी कीचड़ में पड़े रहो। इस पर बालक ने मां पार्वती से माफी मांगी और कहा कि जानबूझकर उसने ऐसा नहीं किया, उससे अंजाने में ये हो गया है इस पर पार्वती जी ने कहा कि ठीक है, यहां नागकन्याएं गणेश जी पूजा करने आएंगी, उनसे गणेश पूजा का विधिपूछकर तुम भीगणेश जी पूजा करना, तुम श्राप मुक्त हो जाओगे। एक साल बाद कन्याएं वहां आईं और उन्होंने गणेश भगवान की स्तुति की।
बालक ने गणपति की पूजा की
इसके बाद उस बालक ने उन कन्याओं से प्रार्थना की, वो भी गणेश पूजा की विधि बताएं, इस पर उन नाग कन्याओं ने उसे गणेश पूजा के बारे में बताया। जिसके बाद उस बालक ने गणपति की पूजा की और उसके बाद गणेश जी उसके सामने प्रकट हुए। गणेश जी ने उससे पूछा कि बोलो बालक क्या चाहिए। इस पर बालक ने पूरी कहानी उन्हें बता दी। इस पर गणेश जी ने उसे श्राप मुक्त कर दिया। इसके बाद बालक ने कहा कि मुझे इतनी शक्ति दीजिए बप्पा जी, जिससे मैं पैदल चलकर कैलाश पर्वत पहुंच जाऊं और अपने मां-बाप यानी कि शिव-पार्वती से मिल जाऊं। इस पर गणेश जी ने उसे तथास्तु बोला और अंतरध्यान हो गए।

इसके बाद वो बालक शिव और पार्वती से मिलने कैलाश पर्वत पहुंचा। जहां पार्वती जी उसे देखकर बहुत प्रसन्न हुई और उसे गले लगा लिया। पार्वती जी ने उससे पूछा कि वो यहां कैसे पहुंचा तो उसने गणेश जी का पूरी बात बता दी। पार्वती जी ने कहा कि मैं भी इस व्रत को करूंगी। और उन्होंने भी उस व्रत को करने का प्रण लिया। जिस दिन बालक के सामने गणेश जी प्रकट हुए थे वो भाद्रमाह की चतुर्थी थी। तब से ही गणेश चतुर्थी का त्योहार लोग मनाने लग गए। गणेश जी की पूजा करने से भक्त की हर इच्छा पूरी होती है।












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