Radha Ashtami 2025 : राधा अष्टमी आज, पढ़ें कथा और आरती, जानिए शुभ मुहूर्त
Radha Ashtami 2025 Today : भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा अष्टमी का पावन पर्व मनाया जाता है, आज ये पावन दिन आया है। यह दिन श्रीकृष्ण की परमप्रिय राधारानी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। राधा जी को भक्ति, प्रेम और आत्मसमर्पण का प्रतीक माना जाता है। भक्तगण सुबह से ही राधारानी के मंदिरों में दर्शन के लिए लाइन लगाए हैं, चारों ओर 'राधे-राधे' का उद्घोष है।
राधा अष्टमी पूजन मुहूर्त (Radha Ashtami 2025 Puja Muhurat)
31 अगस्त, 11:56 AM से 12:47 PM

राधा अष्टमी 2025 की पूजा विधि (Radha Ashtami 2025 Puja Vidhi)
- सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और राधारानी के जन्मोत्सव का व्रत करने का संकल्प लें।
- कुछ लोग निर्जला उपवास करते हैं तो कुछ फलाहार का सेवन करते हैं।
- घर या मंदिर में राधा-कृष्ण की प्रतिमा अथवा चित्र को स्थापित करें।
- पीले और लाल फूलों से सजावट करें।
- दीपक और धूप जलाएं।
- गंगाजल से राधा-कृष्ण का अभिषेक करें।
- तुलसी पत्र, पीले फूल, माखन-मिश्री और पान अर्पित करें।
- राधा जी की आरती करें और 'राधे-राधे' नाम जपें।
राधा अष्टमी व्रत के नियम (Radha Ashtami 2025)
- व्रत के दिन सात्विक आहार लें, मांस, मदिरा और तामसिक भोजन का सेवन न करें।
- क्रोध, लोभ और असत्य वचन से बचें।
- दिनभर राधा-कृष्ण का स्मरण करते रहें।
- व्रत का समापन अगले दिन दान-दक्षिणा और भोजन वितरण के साथ करें।
राधा अष्टमी व्रत कथा (Radha Ashtami 2025 Vrat Katha)
शास्त्रों के अनुसार वृषभानु एक बार नदी पर गए, तब उन्हें वहां एक सुनहरे कमल पर एक दिव्य कन्या लेटी हुए दिखाई दी, जिसे उन्होंने गोद में उठा लिया और अपने घर ले आए और पुत्री के रूप में स्वीकार किया लेकिन लंबे वक्त तक राधा रानी ने अपनी आंखें नहीं खोली थीं। जब श्रीकृष्ण का जन्म हुआ और नंद बाबा ने उनका नामकरण संस्कार कराया, उसके कुछ समय बाद माता यशोदा गोपालकृष्ण को लेकर वृषभानु जी के घर आईं। जैसे ही बालकृष्ण राधा जी के पास आए, उसी क्षण राधा जी ने पहली बार अपनी आँखें खोलीं और श्रीकृष्ण के दर्शन किए। इसलिए जो भी महिला श्रद्धापूर्वक राधा अष्टमी का व्रत करती है, उसे अखंड सौभाग्य, दांपत्य सुख, भक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
राधा रानी की आरती (Radha Rani ki Aarti)
- श्री राधा रानी की आरती
- आरती श्री वृषभानु लली की, मंजुल मूर्ति मोहन ममता की...आरती श्री वृषभानु लली की।
- त्रिविध तापयुत संसृति नाशिनि, विमल विवेकविराग विकासिनि ।
- पावन प्रभु पद प्रीति प्रकाशिनि, सुन्दरतम छवि सुन्दरता की ॥
- ॥ आरती श्री वृषभानु लली की, मंजुल मूर्ति मोहन ममता की ॥
- मुनि मन मोहन मोहन मोहनि, मधुर मनोहर मूरति सोहनि ।
- अविरलप्रेम अमिय रस दोहनि, प्रिय अति सदा सखी ललिता की ॥
- ॥ आरती श्री वृषभानु लली की, मंजुल मूर्ति मोहन ममता की ॥
- संतत सेव्य सत मुनि जनकी, आकर अमित दिव्यगुन गनकी ।
- आकर्षिणी कृष्ण तन मनकी, अति अमूल्य सम्पति समता की ॥
- ॥ आरती श्री वृषभानु लली की, मंजुल मूर्ति मोहन ममता की ॥
- कृष्णात्मिका, कृष्ण सहचारिणि, चिन्मयवृन्दा विपिन विहारिणि ।
- जगजननि जग दुखनिवारिणि, आदि अनादिशक्ति विभुता की ॥
- ॥ आरती श्री वृषभानु लली की, मंजुल मूर्ति मोहन ममता की ॥
Disclaimer: इस आलेख का मतलब किसी भी तरह का अंधविश्वास पैदा करना नहीं है। यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।












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