Falgun Month Vrat & festival List: 'फाल्गुन आयो रे...', जानिए कब है होली?
Falgun Month Vrat & festival List: फाल्गुन महीने में महाशिवरात्रि भी पड़ती है तो वहीं इस माह में एकादशी और संकष्टी भी आती है और इस माह का समापन होली से होता है।

Falgun Month Vrat & festival List: फाल्गुन का महीना मस्ती का महीना कहलाता है, कड़कड़ाती सर्दी के बाद धूप की गर्मी ना केवल इंसान को ऊर्जा से भर देती है बल्कि वो मन में चंचलता भी पैदा करती है, जिसकी वजह से ही इंसान का मन इस मौसम में काफी मस्ती भरा होता है। इस महीने का प्रारंभ आज से हो गया है और इसका समापन होली के त्योहार के साथ 7-8 मार्च को होगा, इसी महीने में महाशिवरात्रि भी पड़ती है तो वहीं इस माह में एकादशी और संकष्टी भी आती है। इस महीने की शुरुआत होते ही ब्रजवासियों के चेहरे पर मुस्कान बिखर जाती है क्योंकि फाल्गुन शुरू होते ही फगुआ जो शुरू हो जाता है, इस महीने कभी वो फूलों से , कभी रंग से तो कभी दूध-दही और बांस से होली खेला करते हैं। चलिए आपको विस्तार से बताते हैं इस महीने के त्योहारों और व्रत की लिस्ट जिसे देखकर आप अपने पूरे महीने की रूपरेखा तैयार कर सकते हैं।
फाल्गुन माह के व्रत-त्योहार
- 9 फरवरी- संकष्टी चतुर्थी व्रत
- 12 फरवरी- यशोदा जयंती
- 13 फरवरी- शबरी जयंती
- 14 फरवरी- जानकी जयंती
- 16 फरवरी- विजया एकादशी
- 18 फरवरी- महाशिवरात्रि
- 18 फरवरी- प्रदोष व्रत
- 19 फरवरी- पंचक प्रारंभ
- 20 फरवरी- सोमवती अमावस्या
- 22 फरवरी- फुलैरा दूज
- 23 फरवरी- विनायक चतुर्थी
- 24 फरवरी- पंचक समाप्त,
- 24 फरवरी- माता शबरी जयंती
- 27 फरवरी- होलाष्टक प्रारंभ
- 3 मार्च- आमलकी एकादशी
- 3 मार्च- रंगभरी एकादशी
- 4 मार्च- प्रदोष व्रत
- 4 मार्च- गोविंद द्वादशी
- 7 मार्च- होलिका दहन
- 8 मार्च- होलाष्टक समाप्त, होली, फाल्गुन मास समाप्त
क्यों मनाते हैं होली?
होली प्रेम, हंसी, दुलार और बुराई पर अच्छाई का पर्व है, फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाले इस पर्व से जुड़ी तो कई कहानियां है लेकिन सबसे प्रचलित कहानी भक्त प्रहलाद और हिरण्याकश्यप असुर की है। प्रहलाद बहुत बड़ा विष्णु भक्त था लेकिन हिरण्याकश्यप को ये बिल्कुल अच्छा नहीं लगता था, वो खुद को ही ईश्वर मानता था इसलिए सोचता था कि उसका बेटा प्रहलाद उसकी पूजा करे लेकिन ऐसा हुआ नहीं, वो अपने ही बेटे को काफी प्रताड़ित करता था। उसकी एक बहन थी होलिका, जिसे कि वरदान मिला था कि वो अग्नि से नहीं जलेगी इसलिए हिरण्याकश्यप ने कहा कि वो प्रहलाद को लेकर आग में बैठ जाए लेकिन हुआ ठीक उल्टा, होलिका आग में जल गई और प्रहलाद सकुशल आग से वापस आ गया। इसी वजह से होलिका दहन किया जाता है और इसके दूसरे दिन रंग वाली होली खेली जाती है। माना जाता है होलिका दहन के साथ बुराईयों का नाश होता है और प्रहलाद यानी खुशी का संचार होता है।












Click it and Unblock the Notifications