Nirjala Ekadashi 2025: आज है निर्जला एकादशी, क्या है पूजाविधि? जानिए क्या करें और क्या ना करें?
Nirjala Ekadashi 2025 : साल की सबसे बड़ी एकादशी में से एक है निर्जला एकादशी, जो कि ज्येष्ठ मास में आती है, इसे 'पुण्यदायी एकादशी' कहते हैं, इसका व्रत निर्जला रखा जाता है इसलिए ये 'निर्जला एकादशी' कहलाती है। ये पावन पर्व आज है, एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा सच्चे मन से करने पर इंसान को मोक्ष की प्राप्ति होती है और उसके सारे कष्टों का अंत होता है।
वैदिक पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 5 जून को देर रात 2 बजकर 15 मिनट से शुरू हुई थी तो वहीं इसका समापन आज रात 9 बजकर 33 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, निर्जला एकादशी का व्रत आज रखा गया है, इसे 'भीम एकादशी' भी कहा जाता है, क्योंकि 'भीम' ने भी इस व्रत को किया था।

निर्जला एकादशी का महत्व (Nirjala Ekadashi 2025)
ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति साल भर की सभी एकादशियों का व्रत नहीं कर पाता, वह केवल निर्जला एकादशी का व्रत करके उन्हीं के बराबर पुण्य प्राप्त कर सकता है। इस दिन व्रत करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है, भगवान विष्णु की विशेष कृपा इस व्रत से प्राप्त होती है।
निर्जला एकादशी व्रत और पूजा विधि (Nirjala Ekadashi 2025)
- प्रातः स्नान करके व्रत का संकल्प लें।
- भगवान विष्णु की प्रतिमा को गंगाजल से स्नान कराएं।
- पीले वस्त्र अर्पित करें और तुलसी दल अर्पण करें।
- विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें या "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करें।
- व्रत के दौरान जल भी ग्रहण न करें (निर्जला व्रत)।
- शाम को आरती करें और भजन कीर्तन करें।अगले दिन द्वादशी को व्रत का पारण करें।
- ब्राह्मण या गरीब को भोजन कराकर स्वयं अन्न-जल ग्रहण करें।
क्या करें (Do's Nirjala Ekadashi 2025)
- इस दिन तुलसी पत्र से भगवान विष्णु की पूजा अवश्य करें।
- गरीबों को जल, फल, वस्त्र या पंखा दान करें।
- अपने व्रत का दृढ़ संकल्प रखें और संयम से रहें।
- धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें या सुनें।
- ब्राह्मणों को भोजन कराने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है।
क्या न करें (Don's Nirjala Ekadashi 2025)
- इस दिन जल भी ग्रहण नहीं करना चाहिए, ये उपवास बिना पानी के होता है।
- इस दिन झूठ, गाली-गलौज, द्वेष, विवाद और अहिंसा से दूर रहें।
- इस दिन प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा का सेवन न करें।
एकदशी मंत्र (Ekadashi Mantras)
- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
- ॐ विष्णवे नमः
- शांताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं।
- विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्॥
- लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम्।
- वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥
DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है।












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