Nag Panchami 2022: जानिए क्यों विषधारी नाग की होती है पूजा? क्या है इसका महत्व

नई दिल्ली, 02 अगस्त। आज पूरा भारत 'नागपंचमी' का पर्व मना रहा है। आपको बता दें कि श्रावण कृष्ण पंचमी और श्रावण शुक्ल पंचमी दोनों ही तिथियों को नागपंचमी का त्योहार मनाया जाता है। बिहार, बंगाल, उड़ीसा, राजस्थान में लोग कृष्ण पक्ष में यह त्योहार मनाते हैं जबकि देश के बाकी हिस्सों में श्रावण शुक्ल पंचमी को ये पर्व मनाया जाता है। अक्सर लोग प्रश्न करते हैं कि सांप और नाग विषधारी होते हैं, वो लोगों के लिए घातक होते हैं तो ऐसे में उनकी पूजा क्यों की जाती है?

प्रभु शिव के गले का आभूषण

प्रभु शिव के गले का आभूषण

तो इसके पीछे कारण ये है कि जहां श्रद्दा होती हैं, वहां प्रश्न नहीं होते हैं लेकिन फिर भी पुराणों में इस कारण को स्पष्ट किया गया है। दरअसल नाग को प्रभु शिव के गले का आभूषण माना जाता है, उनका प्रिय है और इसलिए लोग नाग देवता की पूजा करके शिव-शंभू को खुश करने की कोशिश करते हैं। बिंब (सांपों के बिल) की पूजा करके सांपों से प्रार्थना की जाती हैं कि वो खेत, हमें और हमारे परिवार को कष्ट ना पहुंचाएं

नाग यज्ञ का आयोजन

नाग यज्ञ का आयोजन

वैसे इसके पीछे एक खास कहानी भी प्रचलित है, कहा जाता है कि अर्जुन के पोते जन्मजेय के पिता को तक्षक सांप ने मार दिया था, जिससे क्रोधित होकर जन्मजेय ने नागों के पूरे समुदाय को ही खत्म करने का प्रण किया और इसलिए उन्होंने नाग यज्ञ का आयोजन किया।

तक्षक ने भी जन्मजेय से माफी मांगी

तक्षक ने भी जन्मजेय से माफी मांगी

जिसे देखने के बाद नागों को बड़ी चिंता हुई, वो सभी घबराकर आस्तिक मुनि के पास पहुंचे और मदद की गुहार लगाई, जिस पर आस्तिक मुनि ने जाकर नाग यज्ञ को बंद करवाया और जन्मजेय को समझाने की कोशिश की, तक्षक ने भी जन्मजेय से माफी मांगी, तब जाकर उनका गुस्सा शांत हुआ, ये सबकुछ सावन मास की पंचमी के दिन हुआ था, तब से ही नाग पंचमी का त्योहार मनाया जाने लगा।

 नाग देवता की आरती

नाग देवता की आरती

आज पूजा करने के दौरान नाग देवता की आरती करने से इंसान को हर सुख-वैभव की प्राप्ति होती है...

  • श्रीनागदेव आरती पंचमी की कीजै ।
  • तन मन धन सब अर्पण कीजै ।
  • नेत्र लाल भिरकुटी विशाला ।
  • चले बिन पैर सुने बिन काना ।
  • उनको अपना सर्वस्व दीजे।।
  • पाताल लोक में तेरा वासा ।
  • शंकर विघन विनायक नासा ।
  • भगतों का सर्व कष्ट हर लिजै।।
  • शीश मणि मुख विषम ज्वाला ।
  • दुष्ट जनों का करे निवाला ।
  • भगत तेरो अमृत रस पिजे।।
  • वेद पुराण सब महिमा गावें ।
  • नारद शारद शीश निवावें ।
  • सावल सा से वर तुम दीजे।।
  • नोंवी के दिन ज्योत जगावे ।
  • खीर चूरमे का भोग लगावे ।
  • रामनिवास तन मन धन सब अर्पण कीजै ।
  • आरती श्री नागदेव जी कीजै ।।

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