Mahila Naga Sadhus: कौन होती हैं महिला नागा साधु? क्या सच में रहती हैं बिना कपड़ों के?
Mahila Naga Sadhus Hindi: 13 जनवरी से प्रयागराज में महाकुंभ (Mahakumabh) का आयोजन होने जा रहा है, इस धार्मिक समागम को हर तरह से भव्य बनाने की तैयारियां की जा रही हैं। 12 साल बाद होने वाले इस कुंभ मेले में नागा साधु भी पधारेंगे, जिनकी अपनी एक अलौकिक दुनिया होती है।
ये बेहद ही तपस्वी और मानसिक रूप से बलवान होते हैं।इतिहास कहता है कि 8वीं सदी में शंकराचार्य ने नागा साधुओं को हिंदू धर्म का सैनिक नियुक्त किया था, जिनका उद्देश्य धर्म का प्रचार और बचाव था।

इसलिए नागा साधु कुंभ जैसे कार्यक्रमों में दिखाई देते हैं और इसके बाद वो कहीं नजर नहीं आते हैं। आपको जानकर हैरत होगी का महिलाएं भी नाागा साधु होती हैं, जिनका जीवन बहुत ही कठिन होता है। किसी भी महिला को नागा साधु बनने के लिए बहुत ही कठिन रास्ते से गुजरना पड़ता है।
महिला नागा साधु बनने की प्रक्रिया तीन प्रमुख चरणों सो होकर गुजरती है (Mahila Naga Sadhus)
- जो महिला नागा रूप धारण करती है, उसे सबसे पहले अपने गुरु से संन्यास मार्ग के नियम सिखने होते हैं औऱ दीक्षा लेनी होती है और इसके बाद अपने परिवार से मोहत्याग करना पड़ता है। ये नागा साधु बनने का पहला चरण है
- महिला नागा साधु को किसी अखाड़े से जुड़ना पड़ता है। ये दूसरा चरण है।
- तीसरा चरण है निर्वाण दीक्षा, जिसके तहत साध्वी को "नागा साधु" की उपाधि दी जाती है, जिसके बाद उसका पूरा जीवन धर्म को समर्पित हो जाता है।
निभाने पड़ते हैं ये कठिन नियम (Mahila Naga Sadhus)
- आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन करना पड़ता है।
- सांसारिक सुख-सुविधाओं, परिवार, और व्यक्तिगत इच्छाओं का त्याग।
- ध्यान, योग, और मौन साधना नियमित करनी होती है जिससे मन को कंट्रोल में किया जा सके।
- निर्वस्त्र का अर्थ यहां पर वैराग्य और सांसारिक बंधनों से मुक्ति से है।
गेरुआ वस्त्र धारण करती हैं महिला नागा साधु (Mahila Naga Sadhus)
साध्वी ब्रह्मा गिरी इकलौती महिला थीं, जिन्हें सार्वजनिक रूप से नग्न रूप धारण करने की परमिशन मिली थी लेकिन
उनके बाद ये परमिशन किसी को नहीं दी गई क्योंकि ऐसा महिला साधु की सुरक्षा और सामाजिक सम्मान के मद्देनजर किया गया है इसलिए महिला नागा साधु गेरुआ वस्त्र धारण करती हैं।जिसमें केवल एक गांठ होती है, ये कपड़े सिले हुए नहीं होते हैं।
कुंभ मेले के दौरान दी जाती है दीक्षा (Mahila Naga Sadhus)
- कुंभ मेले के दौरान ही महिलाओं को नागा साधु होने की दीक्षा दी जाती है।
- जिसके लिए पहले उनका मुंडन किया जाता है और फिर पवित्र नदियों में उनका स्नान करवाया जाता है।
- फिर ये महिलाएं खुद का पिंडदान करती हैं, जिसका अर्थ ये होता है कि उनका उनके परिवार और समाज से रिश्ता हमेशा के लिए खत्म हो गया।
DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।
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