TMC में टूट क्या बदल देगी संसद का पूरा समीकरण? NDA वाली मोदी सरकार को क्या होगा फायदा?
लोकसभा में संख्या बल को लेकर पिछले कुछ महीनों से जूझ रही मोदी सरकार के लिए पश्चिम बंगाल से आई एक राजनीतिक हलचल बड़ी राहत साबित हो सकती है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 सांसदों के पार्टी से अलग होकर एनडीए सरकार को समर्थन देने की खबरों ने संसद के बदलते समीकरणों पर नई बहस छेड़ दी है।
यदि यह टूट औपचारिक रूप से मान्यता प्राप्त कर लेती है, तो क्या संसद में समीकरण बदलेगा और लोकसभा में एनडीए की ताकत बढ़ेगी। आइए समझते हैं...

TMC के 20 सांसदों ने बनाई अलग राह
याद रहे पश्चिम बंगाल के चुनावों में करारी हार के बाद ममता बजर्नी टुकड़ों में बंट गई है। टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया कि पार्टी के 20 सांसदों ने अलग गुट बनाने का फैसला किया है। उनके अनुसार, इस नए समूह को मान्यता देने के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र भी सौंपा जा चुका है। सूत्रों के मुताबिक, बागी सांसदों ने बाद में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर बैठक कर आगे की रणनीति और एनडीए को समर्थन देने के फैसले पर चर्चा की।

लोकसभा में क्या है मौजूदा गणित?
लोकसभा की कुल स्वीकृत सदस्य संख्या 543 है, लेकिन फिलहाल तीन सीटें-बसीरहाट, शिलांग और नौगांव-खाली हैं। दो सीटें सांसदों के निधन के कारण रिक्त हुईं, जबकि नौगांव सीट प्रद्युत बोरदोलोई के भाजपा में शामिल होने के बाद खाली हुई। ऐसे में सदन की प्रभावी सदस्य संख्या घटकर 540 रह गई है और दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा 360 वोट पर आ गया है।
वर्तमान में एनडीए के पास 293 सांसदों का समर्थन है। यदि टीएमसी के 20 सांसदों का नया गुट मान्यता प्राप्त कर लेता है और वह एनडीए के साथ खड़ा होता है, तो गठबंधन की ताकत 313 तक पहुंच सकती है।
DMK के समर्थन की अटकलें भी तेज
वहीं राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी है कि द्रमुक (DMK) कुछ मुद्दों पर सरकार को समर्थन दे सकती है। कांग्रेस और डीएमके के बीच बढ़ती दूरी तथा विजय की तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) को लेकर बदलते राजनीतिक समीकरणों को इसकी वजह माना जा रहा है। यदि डीएमके के 22 लोकसभा सांसद इस विधेयक के समर्थन में आते हैं, तो एनडीए की संख्या और मजबूत हो जाएगी।
दो-तिहाई बहुमत तक कैसे पहुंचेगी सरकार?
अप्रैल में संवैधानिक संशोधन विधेयक पर हुए मतदान के दौरान सरकार को 298 सांसदों का समर्थन मिला था, जो एनडीए के आधिकारिक आंकड़े से अधिक था। इससे संकेत मिला था कि कुछ गैर-एनडीए सांसदों ने भी सरकार का साथ दिया था।
अब यदि टीएमसी के बागी सांसद, डीएमके का संभावित समर्थन और शिवसेना (यूबीटी) में संभावित विभाजन जैसे कारक सरकार के पक्ष में जाते हैं, तो एनडीए का आंकड़ा करीब 345 तक पहुंच सकता है। ऐसे में दो-तिहाई बहुमत के लिए उसे केवल 15 अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी। यह कमी निर्दलीय सांसदों, छोटे दलों और विपक्षी खेमे में संभावित क्रॉस-वोटिंग के जरिए पूरी करने की कोशिश की जा सकती है।
क्या मोदी सरकार के लिए गेमचेंजर साबित होगी TMC में टूट?
टीएमसी में संभावित टूट केवल पश्चिम बंगाल की राजनीति तक सीमित नहीं है। इसका सीधा असर संसद के शक्ति संतुलन पर पड़ सकता है। यदि बागी सांसदों का समर्थन औपचारिक रूप से एनडीए को मिलता है, तो लंबे समय से अटके Delimitation Bill और Women's Reservation Bill जैसे अहम विधेयकों को आगे बढ़ाने की मोदी सरकार की रणनीति को बड़ा बल मिल सकता है। हालांकि अंतिम तस्वीर लोकसभा अध्यक्ष के फैसले, कानूनी प्रक्रियाओं और अन्य दलों के रुख पर निर्भर करेगी।
क्या राज्यसभा में भी बदल सकते हैं हालात?
टीएमसी में संभावित असंतोष का असर राज्यसभा में भी दिखाई दे सकता है। पार्टी के राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि वे भाजपा के समर्थन से दोबारा संसद पहुंच सकते हैं। इसके अलावा, टीएमसी के कुछ अन्य असंतुष्ट सांसदों के भी अलग रास्ता अपनाने की अटकलें हैं। यदि ऐसा होता है, तो भाजपा को राज्यसभा में भी अपनी स्थिति मजबूत करने का अवसर मिल सकता है।
Delimitation Bill को मिल सकता है नया जीवन
सरकार ने अप्रैल में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 यानी Delimitation Bill पेश किया था। इस विधेयक का उद्देश्य 2011 की जनगणना के आधार पर संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण करना है। महिला आरक्षण लागू करने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
हालांकि, संवैधानिक संशोधन होने के कारण इस विधेयक को पारित कराने के लिए लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता है और इसी मोर्चे पर सरकार पहले पिछड़ गई थी। अब टीएमसी में संभावित टूट के बाद सरकार को फिर से उम्मीद जगी है कि मानसून सत्र में इस विधेयक को दोबारा लाया जा सकता है।
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