Kumar Shashthi Vrat 2025: स्कंद षष्ठी व्रत आज, जानिए पूजा विधि और महत्व
Kumar Shashthi Vrat 2025: आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी के दिन कुमार षष्ठी, स्कंद षष्ठी या षष्ठी व्रत किया जाता है। यह व्रत भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय को समर्पित है। यह व्रत संतान की दीर्घायु और उनके स्वस्थ जीवन के लिए किया जाता है। कुमार षष्ठी व्रत आज रखा गया है।
इस दिन माताएं कार्तिकेय का पूजन करके व्रत रखती हैं। यह व्रत दक्षिण भारत में बड़े पैमाने पर किया जाता है किंतु अब पूरे देश में अनेक राज्यों में किया जाने लगा है।

कैसे किया जाता है व्रत
स्कंद षष्ठी या कुमार षष्ठी के दिन प्रात: स्नानादि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लिया जाता है। भगवान कार्तिकेय के चित्र या मूर्ति का पूजन किया जाता है। ऊं स्कंदाय नम: या ऊं कुमाराय नम: मंत्र का जाप किया जाता है। नैवेद्य में पांच प्रकार के फल अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद व्रत की कथा सुनी या पढ़ी जाती है। दिनभर निराहार रहा जाता है। श्रद्धानुसार फल ग्रहण किए जा सकते हैं। यह व्रत स्त्री-पुरुष दोनों करें तो अति उत्तम रहता है।
व्रत के लाभ (Kumar Shashthi Vrat 2025)
- स्कंद षष्ठी व्रत संतान की दीर्घायु के लिए माता-पिता करते हैं।
- व्रत के प्रभाव से सर्वत्र संतान की रक्षा होती है।
- यह व्रत संतान को निरोगी बनाता है। यदि संतान को कोई जीर्ण रोग है तो व्रत के प्रभाव से वह ठीक हो जाता है।
- जिन दंपतियों को संतान सुख नहीं है, उन्हें यह व्रत अवश्य करना चाहिए।
- यह व्रत सुंदर और स्वस्थ संतान सुख प्रदान करता है।
क्या विशेष करें (Kumar Shashthi Vrat 2025)
- कुमार षष्ठी के दिन पक्षियों विशेषकर मोर को दाना डालने का बड़ा महत्व बताया गया है।
- कबूतर, चिड़िया आदि पक्षियों के लिए दाना-पानी और छत का प्रबंध करें।
- इस व्रत के दिन गायों को हरा चारा खिलाना चाहिए।
- मछलियों के लिए आटे की गोली बनाकर जल में डालें।
- इस व्रत के दिन छोटे बच्चों को मिठाई, फल आदि का वितरण करना चाहिए।












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