Kali Chaudas 2021: 'काली चौदस ' आज, जानिए पूजा का समय, विधि, महत्व और मंत्र
नई दिल्ली, 03 नवंबर। आज 'काली चौदस ' का पर्व है, जिसे कि 'भूत चतुर्दशी' के नाम से भी जाना जाता है। देवी काली को समर्पित ये त्योहार पश्चिमी राज्यों में मनाया जाता है, खासकर के गुजरात में। काली चौदस हिंदू चंद्र कैलेंडर के कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। मां काली का रूप भले ही विकराल है लेकिन वो अपने भक्तों से बहुत प्रेम करती हैं। वो शक्ति और करूणा की पर्याय हैं, उनकी कृपा जिस पर भी होती है, उसका कभी कोई भी नुकसान नहीं होता है। मां काली की पूजा करने से इंसान को शक्ति, सुख और शांति की प्राप्ति होती है और उसके सारे कष्टों का अंत हो जाता है।

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काली चौदस 2021: तिथि और समय
- चतुर्दशी तिथि शुरू - 03 नवंबर को 09:02
- चतुर्दशी तिथि समाप्त - 04 नवंबर को 06:03
काली चौदस का महत्व
कहते हैं कि काली चौदस के दिन पूजा करने से सभी बुरी आत्माओं से छुटकारा मिल जाता है। काली चौदस को तांत्रिक और अघोरियों के लिए तपस्या और उनके विशिष्ट अनुष्ठानों के लिए आदर्श दिन माना जाता है। मां काली हर तरह से अपने भक्तों की रक्षा करती हैं और उन्हें सुख-समृद्दि का आशीष देती हैं।
पूजा विधि
काली चौदस के अनुष्ठान श्मशान में जाकर किए जाते हैं और पूजा अंधेरे में और एकांत में की जाती है। ऐसा माना जाता है कि काली चौदस की रात के दौरान बुरी आत्माएं बेहद शक्तिशाली होती हैं, इसलिए बुरी आत्माओं से बचने और सामना करने की ताकत पाने के लिए मां काली की पूजा की जाती है।
मां काली को इन मंत्रों से करें प्रसन्न
- ॐ ह्रीं क्लीं अमुकी क्लेदय क्लेदय आकर्षय आकर्षय, मथ मथ पच पच द्रावय द्रावय मम सन्निधि आनय आनय, हुं हुं ऐं ऐं श्रीं श्रीं स्वाहा"।
- क्लीं क्रीं हुं क्रों स्फ्रों कामकलाकाली स्फ्रों क्रों क्लीं स्वाहा!!
- "शरणागत दीनार्त परित्राण परायणे। सर्वास्यार्ति हरे देवि नारायणि नमोस्तुते।।"
- ओम एं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै।
- ऊँ क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं स्वाहा!












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