Hayagriva Jayanti 2025: हयग्रीव जयंती क्यों मनाई जाती है? क्या है महत्व और कथा?
Hayagriva Jayanti 2025: यूं तो भगवान विष्णु के दस अवतार प्रमुख माने गए हैं, लेकिन वास्तव में उन्होंने धर्म की स्थापना के लिए अनेक बार अवतार लिए। उन्हीं में से एक है हयग्रीव अवतार। हयग्रीव अवतार उनका अश्व अवतार है। श्रावण पूर्णिमा के दिन हयग्रीव जयंती मनाई जाती है। क्योंकि इसी दिन श्रीहरि विष्णु हयग्रीव के रूप में प्रकट हुए थे। हयग्रीव जयंती इस बार 9 अगस्त को मनाई जाएगी।
हयग्रीव अवतार कौन थे? (Hayagriva Jayanti 2025)
हयग्रीव भगवान विष्णु का एक विशेष और दिव्य अवतार कहा गया है, जिनका मुख घोड़े (अश्व) के समान था। "हय" का अर्थ होता है "घोड़ा" और "ग्रीव" का अर्थ "गला" या "मुख"। भगवान विष्णु ने यह अवतार विशेष रूप से ज्ञान, बुद्धि और वेदों की रक्षा के लिए धारण किया था।

मधु और कैटभ ने ब्रह्मा जी से चारों वेद चुरा लिए
पुराणों में वर्णन है कि एक बार दो असुर मधु और कैटभ ने ब्रह्मा जी से चारों वेद चुरा लिए और उन्हें पाताल लोक में ले जाकर छिपा दिया। वेदों के बिना सृष्टि का संतुलन बिगड़ गया और अज्ञान का अंधकार फैल गया। तब भगवान विष्णु ने हयग्रीव रूप में अवतार लिया, पाताल लोक में जाकर असुरों को पराजित किया और वेदों को पुनः ब्रह्मा जी को लौटाया। कुछ ग्रंथों में यह भी उल्लेख है कि एक समय स्वयं भगवान विष्णु को ही योगनिद्रा के दौरान एक दैत्य ने घायल कर दिया था, तब हयग्रीव अवतार लेकर उन्होंने दानवों का संहार किया।
Hayagriva Jayanti 2025 का महत्व
हयग्रीव को ज्ञान और बुद्धि का अधिष्ठाता अवतार माना जाता है। क्योंकि उन्होंने वेदों की रक्षा की थी। विद्यार्थी, शिक्षक, विद्वान और शोधकर्ता इस दिन विशेष पूजा करके आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। हयग्रीव अवतार यह संदेश देता है कि सत्य, ज्ञान और धर्म की अंततः विजय होती है, चाहे अज्ञान और अधर्म कितना ही शक्तिशाली क्यों न हो लेकिन अंतत: जीत सत्य की ही होती है। जो लोग मानसिक विक्षोभ, भ्रम या एकाग्रता की कमी से परेशान होते हैं, उन्हें हयग्रीव भगवान की पूजा करने से लाभ मिलता है। इस दिन हयग्रीव के मंत्र \"ॐ श्री हयग्रीवाय नमः।\" का जाप करना चाहिए।












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