Haj Yatra and Eid al Adha: क्या है 'हज' और 'ईद-उल-अजहा' का कनेक्शन? जानिए महत्व
Haj Yatra and Eid al-Adha: इस्लाम धर्म के पांच स्तंभों में से एक "हज" है और "ईद-उल-अजहा" जिसे 'बकरीद' भी कहा जाता है, एक प्रमुख इस्लामी त्योहार है। ये दोनों धार्मिक अवसर न केवल आध्यात्मिक महत्व रखते हैं, भाईचारे का संदेश भी देते हैं। इस बार 'बकरीद' 7 या 8 जून को मनाई जाएगी। 'बकरीद' का दिन हज यात्रा के समापन का प्रतीक है, जो इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक है।
तो वहीं दूसरी ओर हज इस्लाम धर्म की सबसे पवित्र यात्रा है, जो सऊदी अरब के मक्का शहर में स्थित काबा शरीफ की ओर की जाती है। यह हर साल इस्लामी कैलेंडर के 12वें महीने 'जिल-हिज्जा' में होती है।

ये इस्लाम के विश्वास, प्रार्थना, दान और उपवास के संदेश का ही एक हिस्सा है। हर मुस्लिम की ख्वाहिश होती है कि वो जिंदगी में एक बार हज यात्रा जरूर करे।
हजयात्रा (Haj Yatra Significance)
- हजयात्रा पर लोग एहराम पहनते हैं जो कि सफेद वस्त्र होता है, जो समानता और एकता का प्रतीक है।
- श्रद्धालु काबा शरीफ की सात बार परिक्रमा करते हैं।
- शैतान को कंकरी मारना (रमी) - यह बुराई पर विजय का प्रतीकात्मक कार्य है।
ईद-उल-अजहा (Eid al-Adha)
हज यात्रा की समाप्ति पर मनाया जाने वाला त्योहार हजरत इब्राहीम (अब्राहम) द्वारा अल्लाह के आदेश पर अपने बेटे हजरत इस्माईल की कुर्बानी देने की तत्परता की याद में मनाया जाता है। हालांकि, अल्लाह ने उनके बेटे को बचा लिया और उसकी जगह एक जानवर की कुर्बानी देने का आदेश दिया था।
ईद-उल-अजहा के दिन क्या-क्या होता है? (Eid al-Adha)
- सुबह विशेष नमाज अदा की जाती है।
- कुर्बानी का मांस तीन हिस्सों में बांटा जाता है - एक हिस्सा गरीबों को, एक रिश्तेदारों को, और एक अपने लिए रखा जाता है।
- इस दिन मुस्लिम समुदाय एक-दूसरे से मिलते हैं, दान करते हैं और जरुरतमंदों की मदद करते हैं।












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