Ghee Sankranti 2023: 'घी संक्रांति' आज, जानिए शुभ मुहूर्त और महत्व
Ghee Sankranti 2023: जब सूर्य अपनी ही राशि यानी कि सिंह में प्रवेश करते हैं तो वो दिन 'घी संक्रांति' या 'सिंह संक्रांति 'के नाम से जाना जाता है, ये प्रमुख रूप से उत्तराखंड में मनाया जाता है। हर संक्रांति की ही तरह ये संक्रांति भी काफी महत्वपूर्ण है। लोग आज के दिन पवित्र नदियों में पूजा करते हैं, सूर्यदेव की पूजा करते हैं और दान-पु्ण्य करते हैं, माना जाता है कि ऐसा करने से इंसान को मोक्ष की प्राप्ति होती है और लोगों के घर में सुख, शांति, प्रेम और समृद्धि का वास होता है।

इस दिन घी का विशेष सेवन किया जाता है, कहते हैं कि घी इंसान के दिमाग को तेज करता है इसलिए आज लोग सूर्यदेव को घी से बने पकवानों का भोग लगाते हैं। घी की वजह से ही इस संक्रांति को 'घी संक्रांति' कहते हैं।
सूर्य आज दोपहर में सिंह राशि में प्रवेश करेंगे
पंडित गजेंद्र शर्मा के मुताबिक सूर्य आज दोपहर 1 बजकर 32 मिनट पर सिंह राशि में प्रवेश करेंगे और उनका ये गोचर हर राशि को शुभता प्रदान करने वाला है लेकिन 'घी संक्रांति' का महापुण्य काल सुबह 11:33 बजे से दोपहर 01:44 बजे तक है, इस दौरान दान-पुण्य और पूजा करने से इंसान को दोगुने फल की प्राप्ति होती है।
सूर्यदेव को अर्ध्य देते वक्त निम्नलिखित मंत्रों का प्रयोग करें
- ॐ भास्कराय नमः
- ॐ मित्राय नम:
- ॐ रवये नम:
- ॐ सूर्याय नम:
- ॐ भानवे नम:
- ॐ खगाय नम:
- ॐ पूषणे नम
- ॐ हिरण्यगर्भाय नमः
- ॐ मरीचये नमः
- ॐ आदित्याय नमः
- ऊँ घृणि: सूर्यादित्योम
- ऊँ ह्रां ह्रीं ह्रौं स: सूर्याय: नम:
सूर्य आरती
- ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।
- जगत् के नेत्रस्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।
- धरत सब ही तव ध्यान, ॐ जय सूर्य भगवान।।
- ।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।
- सारथी अरुण हैं प्रभु तुम, श्वेत कमलधारी। तुम चार भुजाधारी।।
- अश्व हैं सात तुम्हारे, कोटि किरण पसारे। तुम हो देव महान।।
- ।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।
- ऊषाकाल में जब तुम, उदयाचल आते। सब तब दर्शन पाते।।
- फैलाते उजियारा, जागता तब जग सारा। करे सब तब गुणगान।।
- ।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।
- संध्या में भुवनेश्वर अस्ताचल जाते। गोधन तब घर आते।।
- गोधूलि बेला में, हर घर हर आंगन में। हो तव महिमा गान।।
- ।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।
- देव-दनुज नर-नारी, ऋषि-मुनिवर भजते। आदित्य हृदय जपते।।
- स्तोत्र ये मंगलकारी, इसकी है रचना न्यारी। दे नव जीवनदान।।
- ।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।
- तुम हो त्रिकाल रचयिता, तुम जग के आधार। महिमा तब अपरम्पार।।
- प्राणों का सिंचन करके भक्तों को अपने देते। बल, बुद्धि और ज्ञान।।
- ।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।
- भूचर जलचर खेचर, सबके हों प्राण तुम्हीं। सब जीवों के प्राण तुम्हीं।।
- वेद-पुराण बखाने, धर्म सभी तुम्हें माने। तुम ही सर्वशक्तिमान।।
- ।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।
- पूजन करतीं दिशाएं, पूजे दश दिक्पाल। तुम भुवनों के प्रतिपाल।।
- ऋतुएं तुम्हारी दासी, तुम शाश्वत अविनाशी। शुभकारी अंशुमान।।
- ।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।
- ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।
- जगत् के नेत्रस्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।स्वरूपा।।
- धरत सब ही तव ध्यान, ॐ जय सूर्य भगवान।।












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