दीपावली के पांच शुभ दिन

पहला दिन धनतेरस
दीपावली का पहला दिन धनतेरस के रूप में पूरे भारतवर्ष में मनाया जाता है। कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन ही धन्वन्तरि का जन्म हुआ था इसलिए इस तिथि को धनतेरस के नाम से जाना जाता है । इस दिन चांदी खरीदने की प्रथा है इसके पीछे एक बड़ा कारण माना जाता है। कहा जाता है चांदी चन्द्रमा का प्रतीक है जो शीतलता प्रदान करता है और मन को संतोष रूपी धन देता है और जिसके पास संतोष है वहीं सबसे सुखी व्यक्ति है। लोग इस दिन ही दीपावली की रात लक्ष्मी गणेश की पूजा के लिए मूर्ति भी खरीदते हें।
क्या करें- धनतेरस के दिन दीप जलाकर भगवान धन्वन्तरि की पूजा करें। भगवान धन्वन्तरी से स्वास्थ और सेहतमंद बनाये रखने हेतु प्रार्थना करें। चांदी का कोई बर्तन या लक्ष्मी गणेश अंकित चांदी का सिक्का खरीदें। नया बर्तन खरीदे जिसमें दीपावली की रात भगवान श्री गणेश व देवी लक्ष्मी के लिए भोग चढ़ाएं।
दूसरा दिन छोटी दीवाली
दीपावली के दूसरे दिन नरक चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है। पौराणिक कथा है कि इसी दिन कृष्ण ने एक दैत्य नरकासुर का संहार किया था और सोलह हजार एक सौ कन्याओं को नरकासुर के बंदी गृह से मुक्त किया था। इस दिन को छोटी दीपावली के रूप में भी मनाते हैं।
क्या करें- इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर तेल लगाएं और पानी में चिरचिरी के पत्ते डालकर उससे स्नान करें और विष्णु मंदिर या कृष्ण मंदिर में जाकर भगवान का दर्शन करने से सभी पाप खत्म होंते हैं।
तीसरा दिन लक्ष्मी पूजा
दीवाली के तीसरे दिन भगवान गणेश और देवी लक्ष्मी के तीन रूपों की पूजा की जाती है वैसे भी किसी शुभ कार्य का शुभारंभ करने से पहले भगवान गणेश पहले पूजे जाते हैं। कहा जाता है जब तक भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की पूजा न की जाएं दीवाली की पूजा अधूरी रहती है। इस दिन सभी अंधकार पर विजय मिलने की खुशी में भगवान से अपनी सुख समृद्धि का आशीर्वाद माँगते हैं, इस दिन लोग अपने व्यापार को फलने और फूलने के लिए भगवान को प्रसाद चढ़ाते है।
क्या करें- दीवाली के दिन की विशेषता मां लक्ष्मी के पूजन से संबन्धित है इस दिन हर घर, परिवार, कार्यालय में लक्ष्मी जी की पूजा करके उनका स्वागत किया जाता है। दीवाली के दिन जहां गृहस्थ और कारोबारी धन की देवी लक्ष्मी से समृद्धि और धन की कामना करते हैं, वहीं साधु और संत कुछ विशेष सिद्धियां प्राप्त करने के लिए रात में अपने तांत्रिक पूजा पाठ करते हैं।
चौथा दिन पड़वा व गोवर्धन पूजा
दीपावली के दौरान चौथा दिन गोवर्धन पूजा के रूप के रूप में मनाया है। कुछ लोग इसे अन्नकूट के नाम से भी जानते हैं। हिंदू धर्म में गाय को पूज्यनीय माना गया है। शास्त्रों के अनुसार गाय गंगा नदी के समान पवित्र होती है यहां तक गाय को मां लक्ष्मी का रूप भी माना जाता है। कहा जाता है भगवान श्री कृष्ण ने ब्रजवासियों को मूसलधार वर्षा से बचने के लिए सात दिन तक गोवर्धन पर्वत को अपनी सबसे छोटी उँगली पर उठाकर रखा था जिसके नीचे सभी गोपी और गोपीकाओ ने आश्रय लिया था। इस पौराणिक घटना के बाद से ही गोवर्घन पूजा की जाने लगी।
क्या करें- इस दिन बृजवासी गोवर्घन पर्वत की पूजा करते हैं। भारत में लोग अपनी गायों और बैलों को स्नान कराकर उन्हें रंग लगते हैं और उनके गले में नई रस्सी डाली जाती है। गाय और बैलों को गुड़ और चावल भी खिलाया जाता है। इस दिन एक मुखी रूद्राक्ष को धारण करने से जीवन में सफलता, सम्मान और सुख की प्राप्ति होती है।
पांचवा दिन भाई दूज
दीवाली का आखिरी दिन भाई दूज के रूप में मनाया जाता है। यह दिन भाई और बहनो के लिए समर्पित होता है। भाई दूज कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाने वाला हिन्दू पर्व है। इस दिन बहन रोली एवं अक्षत से अपने भाई का तिलक कर उसके अच्छे भविष्य की कामना करती है। कहा जाता है इस दिन जब यमराज यमी के पास पहुंचे तो यमी ने अपने भाई यमराज की खूब सेवा की इससे खुश होकर यमराज ने अपनी बहन को ढेर सारा आशीष दिया। इसके अलावा कायस्थ समाज में भाईदूज के दिन भगवान चित्रगुप्त की पूजा भी की जाती है। कायस्थ समाज में लोग अपने बहीखातों की पूजा भी करते हैं। मान्यता है कि इस दिन अगर कोई भयंकर पशु काट भी ले तो यमराज के दूत भाई के प्राण नहीं ले जाएंगे।
क्या करें- इस दिन हर बहन अपने भाई को तिलक लगाकर भाई की सुख समृद्धि की मंगल कामना करती हैं और उसके उज्ज्वल भविष्य के लिए आशीष देती हैं और भाई अपनी बहन को भेंट स्वरूप कुछ उपहार या दक्षिणा देता है
भारत में कोई भी त्यौहार क्यों न हो उससे कई लोकमान्यताएं और कथाएं जुड़ी रहती हैं। शायद इसीलिए भारत को सर्वधर्मों का देश कहा जाता है। हम कामना करते है कि यह दीपावली आपके लिए ढेर सारी खुशियों के साथ आपके घर में सुख और समृद्धि लाए।












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