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Ekadashi Vrat 2021: क्या है एकादशी के पारण का नियम?

नई दिल्ली। भगवान विष्णु का प्रिय व्रत एकादशी प्रत्येक माह में दो बार आता है। कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष में। एक वर्ष में 24 एकादशियां आती हैं और जिस वर्ष अधिकमास हो उस वर्ष इनकी संख्या 26 हो जाती हैं। एकादशी का व्रत अनेक लोग कर लेते हैं लेकिन व्रत को पूर्ण कैसे करें अर्थात् एकादशी का व्रत रखने के बाद इस व्रत को कैसे खोलें, क्या नियम अपनाएं इसकी सही जानकारी बहुत कम लोग जानते हैं।

Ekadashi Vrat 2021: क्या है एकादशी के पारण का नियम?

एकादशी के व्रत को पूर्ण करने या खोलने को व्रत का पारण करना कहते हैं। यदि देखा जाए तो एकादशी का व्रत दशमी से ही प्रारंभ हो जाता है और द्वादशी पर पूर्ण होता है। दशमी के दिन रात्रि भोजन का त्याग किया जाता है, एकादशी के पूरे दिन-रात निराहार रहकर व्रत रखा जाता है और द्वादशी पर प्रात:काल व्रत खोला जाता है। व्रत खोलने को पारण कहा जाता है। एकादशी व्रत के अगले दिन द्वादशी पर सूर्योदय के बाद पारण किया जाता है। शास्त्रों का कथन है किएकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले कर लेना अति आवश्यक होता है। यदि तिथियों की घट-बढ़ के कारण द्वादशी तिथि सूर्योदय से पूर्व ही समाप्त हो गई हो तो ऐसी स्थिति में भी पारण सूर्योदय के बाद ही करना होता है। द्वादशी तिथि के भीतर पारण न करना पाप के समान होता है। एकादशी व्रत का पारण हरि वासर के दौरान भी नहीं किया जाता है।

क्या होता है हरि वासर?

द्वादशी तिथि की पहली एक चौथाई अवधि को हरि वासर कहा जाता है। एकादशी व्रत का पारण हरि वासर के दौरान नहीं किया जाता है। व्रती को पारण करने के लिए हरि वासर समाप्त होने की प्रतीक्षा करनी चाहिए। अर्थात् द्वादशी तिथि की प्रथम एक चौथाई अवधि बीत जाए उसके बाद पारण किया जा सकता है। पंचांग में प्रत्येक तिथि की पूर्ण अवधि लिखी रहती है, उसके चार भाग करके प्रथम भाग जितना समय बीत जाए उसके बाद पारण करना चाहिए। सामान्यजनों की सुविधा के लिए अनेक पंचांगों में पारण का समय लिखा होता है। उसमें भी देखा जा सकता है।

प्रात:काल में व्रत खोलना सबसे उत्तम

एकादशी व्रत खोलने का सबसे उत्तम समय प्रात:काल होता है। व्रती को मध्यान्ह काल के दौरान व्रत तोड़ने से बचना चाहिए। इसका अर्थ यह हुआ किप्रात: सूर्योदय के बाद तीन-चार घंटों के भीतर व्रत खोल लेना चाहिए। मध्यान्हकाल अर्थात् प्रात: 11 से दोपहर 1 बजे तक व्रत नहीं खोलना चाहिए। जो व्रती किसी कारणवश प्रात:काल में व्रत ना खोल पाएं उन्हें मध्यान्हकाल बीत जाने के बाद ही व्रत खोलना चाहिए।

दो दिन एकादशी हो तो क्या करें?

तिथियों की घट-बढ़ के कारण कभी-कभी एकादशी का व्रत लगातार दो दिनों तक आ जाता है। ऐसे में स्मार्त मत को मानने वालों को पहले दिन वाली एकादशी और वैष्णव मत को मानने वालों को दूसरे दिन वाली एकादशी का व्रत करना चाहिए। संन्यासियों, विधवाओं और मोक्ष प्राप्ति के इच्छुक लोगों को दूसरे दिन वाली एकादशी करना चाहिए। भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए दोनों दिन एकादशी का व्रत किया जा सकता है।

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