Dussehra 2023: क्यों जलता है 'दशानन'? क्या है आपके शहर में रावण दहन का Time?
Dussehra 2023: दशहरे का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, जो कि पूरे देश में 24 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस दिन लोग 'रावण दहन' करते हैं, इस प्रथा के पीछे कारण ये है कि इंसान चाहे जितना भी बलवान हो, पैसे वाला हो, शक्तिशाली हो लेकिन अगर उसका मन साफ नहीं और वो अधर्म करता हो तो उसका अंत निश्चित है।

रावण काफी ज्ञानी था लेकिन अपने घमंड की वजह से सोने की लंका का मालिक 'दशानन' केवल नफरत का पात्र बना इसलिए इंसान को भूलकर भी कोई गलत काम नहीं करना चाहिए। आपको बता दें कि देश के कई शहरों में रावण दहन काफी धूमधाम से मनाया जाता है और हर शहर में रावण दहन का प्रोग्राम काफी अलग-अलग वक्त पर होता है।
रावण दहन शुभ मुहूर्त
- विजयादशमी तिथि आरंभ: 23 अक्टूबर, 05:44 PM
- विजयादशमी तिथि समाप्त: 24 अक्टूबर, 03:14 PM
- दशहरा शुभ मुहूर्त: 24 अक्टूबर, 01:58 PM से 02:43 PM
- विजय मुहूर्त : 01:58 PM से 02:43 PM
- रावण दहन का मुहूर्त: 24 अक्टूबर, 5:22 PM से 6:59 PM
रावण दहन यहां देखें
- दिल्ली: रामलीला मैदान, लाल किला मैदान, नेताजी सुभाष पार्क, जनकपुरी रामलीला मैदान, जेएलएन स्टेडियम
- लखनऊ: ऐशबाग रामलीला मैदान, सदर बाजार, पीएनटी पार्क
- कानपुर: रामलीला मैदान
- पटना: कालिदास रंगालय
रावण दहन का वक्त
- दिल्ली में रावण दहन का वक्त- 01:58 PM से 02:43 PM.
- लखनऊ में रावण दहन का वक्त- 01:59 PM से 02:42 PM.
- कानपुर में रावण दहन का वक्त- 01:58 PM से 02:41 PM.
- पटना में रावण दहन का वक्त- 01:58 PM से 02:44 PM.
रावण दहन के वक्त करें मंत्र
- वैदीहीहरणं जटायुमरणं, सुग्रीवसंभाषणम्।। बालीनिर्दलनं समुद्रतरणं, लंकापुरीदाहनम्।
- पश्चाद् रावण कुम्भकर्ण हननम्, एतद्धि रामायणम्।।
रावण दहन के बाद जरूर करें प्रभु श्रीराम की आरती
- श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन,
- हरण भवभय दारुणम्।
- नव कंज लोचन, कंज मुख
- कर कंज पद कंजारुणम्॥
- कन्दर्प अगणित अमित छवि,
- नव नील नीरद सुन्दरम्।
- पट पीत मानहुं तड़ित रूचि-शुचि
- नौमि जनक सुतावरम्॥
- ॥श्री रामचन्द्र कृपालु..॥
- भजु दीनबंधु दिनेश दानव
- दैत्य वंश निकन्दनम्।
- रघुनन्द आनन्द कन्द कौशल
- चन्द्र दशरथ नन्द्नम्॥
- ॥श्री रामचन्द्र कृपालु..॥
- सिर मुकुट कुंडल तिलक चारू
- उदारु अंग विभूषणम्।
- आजानुभुज शर चाप-धर,
- संग्राम जित खरदूषणम्॥
- ॥श्री रामचन्द्र कृपालु..॥
- इति वदति तुलसीदास,
- शंकर शेष मुनि मन रंजनम्।
- मम ह्रदय कंज निवास कुरु,
- कामादि खल दल गंजनम्॥
- ॥श्री रामचन्द्र कृपालु..॥
- ॥श्री रामचन्द्र कृपालु..॥
- मन जाहि राचेऊ मिलहि सो वर
- सहज सुन्दर सांवरो।
- करुणा निधान सुजान शील
- सनेह जानत रावरो॥
- ॥श्री रामचन्द्र कृपालु..॥
- ॥ इति श्री राम आरती॥












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