Chhath Puja 2025: डूबते सूर्य को दिया गया संध्या अर्घ्य, भक्तों ने मांगी खुशहाली की दुआ, अब उषाकाल का इंतजार
Chhath Puja 2025, sandhya Argya: लोकआस्था के पर्व छठ के तीसरे दिन आज भक्तों ने डूबते सूर्य को पहला अर्ध्य दिया और सूरज भगवान से अपनों की सलामती की दुआ मांगी। घाटों पर एकत्रित भक्तों की भीड़ से छठ की छटा देखते ही बनती है, ये केवल एक त्योहार नहीं बल्कि आस्था का सैलाब है जो कि इंसान को परिवार से, संस्कृति से, परंपराओं से, संस्कारों से और समाज से जोड़ता है।
आपको बता दें कि संध्या अर्ध्य के बाद अब भक्तगण मंगलवार को ऊषा काल का अर्ध्य देंगे और उसके बाद अपना निर्जला व्रत तोड़ेंगे और पारण करेंगे।संध्या काल का अर्घ्य जीवन के उतार-चढ़ाव, बुढ़ापे, और कर्मफल के प्रतीक के रूप में माना जाता है।

डूबते सूर्य को अर्घ्य देने से मनुष्य अपने पिछले कर्मों का प्रायश्चित करता है। यह प्रकृति के चक्र में दिन के अंत का सम्मान है, जो जीवन के संतुलन को दर्शाता है। व्रती इस समय सूर्य स्तुति करते हुए अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करते हैं।
ऊर्जा, स्वास्थ्य और पुनर्जागरण का प्रतीक (Chhath Puja 2025)
जबकि उगते सूर्य को अर्घ्य देना नई शुरुआत, ऊर्जा, स्वास्थ्य और जीवन के पुनर्जागरण का प्रतीक है। उषाकाल में सूर्य की किरणें शरीर को विटामिन D और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती हैं। यह काल सूर्यदेव से संतान सुख, स्वास्थ्य, और समृद्धि की प्रार्थना का समय होता है। व्रती अपने परिवार और समाज की भलाई की कामना करते हुए नदी या तालाब में खड़े होकर सूर्यदेव को दूध, जल, और फल अर्पित करते हैं।

आत्मशुद्धि, कृतज्ञता और प्रकृति के प्रति सम्मान (Chhath Puja 2025)
छठ पूजा का संध्या और उषा अर्घ्य हमें सिखाता है कि जीवन में सूर्य की तरह हमें भी हर परिस्थिति में दूसरों को ऊर्जा, प्रकाश और प्रेरणा देनी चाहिए। यह पर्व आत्मशुद्धि, कृतज्ञता और प्रकृति के प्रति सम्मान की भावना का प्रतीक है।
DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।












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