UP में कब होंगे पंचायत चुनाव? हाईकोर्ट ने सरकार के फैसले पर उठाए सवाल, चुनाव आयोग से मांगी तारीख!

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों में हो रही देरी को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) की कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी जताते हुए साफ तौर पर पूछा है कि वे चुनाव कराने की संभावित तारीख स्पष्ट करें। इसके साथ ही, कोर्ट ने ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने के बाद उन्हें ही अगले छह महीने के लिए प्रशासक नियुक्त करने के सरकारी फैसले पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं और सरकार की दलीलों पर पूरी तरह असंतुष्टि जताई है। आइए जानतें हैं हाईकोर्ट की इस सख्ती के बाद अब यूपी के सियासी और प्रशासनिक गलियारों में क्या हलचल है...

TOI की रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की अवकाशकालीन खंडपीठ (Vacation Bench) ने बुधवार को याचिकाकर्ता ओमप्रकाश प्रजापति की जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई की। इस दौरान कोर्ट ने पंचायत चुनाव की प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश देते हुए राज्य सरकार को आदेश दिया कि आगामी 10 जुलाई को पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोग की रिपोर्ट कोर्ट के सामने पेश की जाए। इस मामले की अगली सुनवाई अब 10 जुलाई को ही तय की गई है।

Allahabad High court

ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने के फैसले पर क्यों उठे सवाल?

राज्य सरकार ने बीते 25 मई को एक आदेश जारी कर पंचायत चुनाव संपन्न होने तक या अगले छह महीने के लिए मौजूदा ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक (Administrator) नियुक्त कर दिया था, क्योंकि उनका मूल कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो रहा था। सरकार के इसी फैसले को याचिकाकर्ता ने अदालत में चुनौती दी है।

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कार्यकाल बढ़ाना पूरी तरह से गैर-कानूनी

याचिकाकर्ता का कहना है, 'उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम की धारा 12, 3(क) के तहत ग्राम प्रधान का कार्यकाल शपथ ग्रहण की तारीख से अधिकतम पांच साल का ही हो सकता है। समय पर चुनाव न कराकर पुराने प्रधानों को ही प्रशासक बना देना, अप्रत्यक्ष रूप से उनका कार्यकाल बढ़ाने जैसा है, जो पूरी तरह से गैर-कानूनी है।'

याचिकाकर्ता ने यह भी तर्क दिया कि पहले जब भी चुनाव में देरी होती थी, तब ग्राम पंचायतों के संचालन के लिए एडीओ (ADO) पंचायत या अन्य सक्षम सरकारी अधिकारियों को प्रशासक नियुक्त किया जाता था। इसलिए इस बार भी किसी सरकारी अधिकारी को ही यह कमान सौंपी जानी चाहिए थी।

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क्यों अटकी है UP में पंचायत चुनाव की तारीखें?

यूपी में पंचायत चुनाव समय पर न हो पाने के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण सामने आए हैं:

  • वोटर लिस्ट का काम अधूरा: ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को ही समाप्त हो चुका है, जबकि चुनाव के लिए वोटर लिस्ट का अंतिम प्रकाशन 10 जून को होना तय हुआ है।
  • ओबीसी (OBC) आरक्षण का पेंच: पंचायत चुनाव में सीटों के आरक्षण का निर्धारण करने के लिए सरकार ने एक 'पिछड़ा वर्ग आयोग' का गठन किया है, जिसे कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है। नियम के मुताबिक आयोग को गठन के 3 से 6 महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट देनी थी, जिसके बाद ही चुनाव संभव थे। हालांकि, अब हाईकोर्ट की सख्ती के बाद सरकार को यह रिपोर्ट 10 जुलाई को ही कोर्ट में दाखिल करनी होगी।
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