Malviya Nagar Fire: बुझती सांसों के बीच 8 लोगों को दी नई जिंदगी! मालवीय नगर अग्निकांड में फरिश्ता बना अरमान!

Malviya Nagar Fire: दिल्ली का मालवीय नगर इलाका उस वक्त दहल उठा जब एक बेड-एंड-ब्रेकफास्ट होटल की इमारत में भीषण आग लग गई। इस दर्दनाक हादसे ने हर तरफ चीख-पुकार और काला धुआं फैला दिया, जिसमें 21 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। लेकिन इस खौफनाक मंजर और बुझती जिंदगियों के बीच इंसानियत की एक ऐसी मिसाल सामने आई, जिसने कई परिवारों को उजड़ने से बचा लिया।

स्थानीय दुकानदार अरमान मंसूरी और उनके पिता रियाजुद्दीन मंसूरी इस आपदा में फरिश्ते बनकर उभरे। उन्होंने अपने व्यापारिक नुकसान की परवाह न करते हुए अपनी दुकान के गद्दे और चादरें सड़क पर बिछा दीं, जिससे ऊंचाई से कूद रहे लोगों को एक 'सुरक्षा कवच' मिल गया और लगभग 8 जिंदगियां सकुशल बच गईं।

Malviya Nagar Fire

जब आग की लपटों से घिर गई इमारत

घटना की सुबह करीब 8:30 बजे (कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार सुबह तड़के) इलाके में अचानक जलने की तेज गंध आने लगी। देखते ही देखते होटल के ग्राउंड फ्लोर से आग की ऊंची लपटें उठने लगीं। स्थानीय निवासियों के मुताबिक, पहली चिंगारी सुबह लगभग 8:00 बजे देखी गई थी, लेकिन दमकल की गाड़ियां सुबह 9:40 बजे घटना स्थल पर पहुंचीं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि फायर ब्रिगेड समय पर पहुंच जाती, तो इस भारी नुकसान को काफी हद तक टाला जा सकता था।

अरमान ने बिछाया 'जिंदगी का कवच'

दुकान मालिक अरमान मंसूरी ने बताया कि उन्हें फोन पर सूचना मिली थी कि पड़ोस के होटल में भीषण आग लग चुकी है और उन्हें अपनी दुकान का सामान सुरक्षित हटाने की सलाह दी गई थी। लेकिन जब अरमान मौके पर पहुंचे, तो वहां का मंजर देखकर उनके होश उड़ गए। लोग जान बचाने के लिए दूसरी और तीसरी मंजिल से नीचे कूदने की कोशिश कर रहे थे।

अरमान ने बिना वक्त गंवाए अपनी दुकान से लगभग 20 से 22 (करीब 25-30) गद्दे बाहर निकाले और सड़क पर बिछा दिए। जो लोग ऊपर से नीचे कूदे, वे सीधे इन गद्दों पर गिरे, जिससे उनकी जान बच गई। इसके साथ ही, अरमान ने अपनी दुकान की सारी चादरें भी राहत कार्य के लिए सौंप दीं। इन्हीं चादरों के सहारे घायलों और मृतकों को एंबुलेंस तक पहुंचाया गया।

अरमान ने भावुक होकर कहा, 'लोग मेरे व्यापारिक नुकसान की बात कर रहे हैं, लेकिन मेरा मानना है कि अल्लाह ने उस वक्त मुझे कुछ जिंदगियां बचाने की जिम्मेदारी सौंपी थी, जिसे मैंने पूरा किया।'

एक हंसता-खेलता परिवार हुआ खाक

इस भीषण त्रासदी ने कई हंसते-खेलते परिवारों को हमेशा के लिए खामोश कर दिया। मालवीय नगर के निवासी विवेक अग्रवाल भी अपने पूरे परिवार के साथ इस आग की चपेट में आ गए। उनके पड़ोसी योगेंद्र यादव ने रोते हुए बताया कि विवेक बेहद नेक दिल इंसान थे। उनकी पत्नी एक एनजीओ चलाती थीं और उनके तीन बच्चे (दो बेटियां और एक बेटा) थे। तीन दिन पहले ही उनसे सामान्य बातचीत हुई थी, और आज यह विश्वास करना मुश्किल हो रहा है कि एक हादसे ने पूरा परिवार छीन लिया।

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अवैध इमारतें होंगी सील

दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद ने इस त्रासदी पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए प्रशासनिक कार्रवाई की जानकारी दी। उन्होंने बताया, 'इस बेड-एंड-ब्रेकफास्ट प्रतिष्ठान को साल 2024 में केवल छह कमरों के संचालन की अनुमति दी गई थी। इस पूरे मामले की अब गहन जांच (In-depth Investigation) की जाएगी। ऐसी सभी इमारतें और प्रतिष्ठान जिनके पास वैध एनओसी (NOC) और आवश्यक अनुमतियां नहीं हैं, उन्हें तुरंत प्रभाव से सील किया जाएगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों के लाइसेंस रद्द होंगे।'

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