Chhath 2025: छठ पूजा में क्यों होता है सूप का प्रयोग? पढ़ें यहां छठी मैय्या की आरती
Chhath 2025: लोकआस्था के पर्व छठ का आज दूसरा दिन है,जिसे कि खरना कहा जाता है।चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व में हर एक चीज की खासा महत्व है,फिर चाहे वो 'ठेकुआ' हो या फिर 'सूप', आपको बता दें कि इस पूजा में सूप खास रोल निभाता है, ये केवल पूजा सामग्री का वाहक नहीं है, बल्कि श्रद्धा और पवित्रता का प्रतीक भी माना जाता है।
आपको बता दें कि सूप बांस या बेंत से बना होता है, जिसका प्रयोग छठी मइया को अर्घ्य देने, प्रसाद सजाने और सूर्यदेव को समर्पित सामग्रियों को रखने के लिए किया जाता है।

व्रती जब डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं, तब सूप में फल, ठेकुआ, नारियल, और दीप रखकर सूर्यदेव को अर्पित करते हैं। तो वहीं बांस से बना सूप प्रकृति से जुड़ा होता है, इसलिए इसे सात्विकता और शुद्धता का प्रतीक माना गया है।
स्वास्थ्य, संतान-सुख और समृद्धि करती है छठी मां (Chhath 2025)
मान्यता है कि सूप में अर्घ्य अर्पित करने से सूर्यदेव और छठी मइया व्रती के जीवन में स्वास्थ्य, संतान-सुख और समृद्धि प्रदान करते हैं।सूर्य को अर्घ्य देने के बाद यही सूप पूजा के अंत में प्रसाद बांटने के लिए भी उपयोग होता है। सूपी में प्रसाद रखकर व्रती छठी मईया से सुख-शांति की प्रार्थना करते हैं और छठी मां की आरती करते हैं, तभी पूजा पूरी मानी जाती है।
छठी मैय्या की आरती (Chhath 2025)
- जय छठी मैया ऊ जे केरवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए।
- मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।। जय ।।
- ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदिति होई ना सहाय।
- ऊ जे नारियर जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए ।। जय ।।
- मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।
- ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय ।। जय ।।
- अमरुदवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडरराए।
- मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।। जय ।।
- ऊ जे सुहनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।
- शरीफवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए ।। जय ।।
- मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।
- ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।। जय ।।
- ऊ जे सेववा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए।
- मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।। जय ।।
- ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।
- सभे फलवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए।। जय ।।
- मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।
- ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।। जय ।।
DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।












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