Chaitra Navratri 2026: चंद्र ग्रहण के 15 दिन बाद चैत्र नवरात्रि, क्या आने वाली है बड़ी मुसीबत?
Chaitra Navratri 2026 and Chandra Grahan: हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र माह की प्रतिपदा तिथि से चैत्र नवरात्र का शुभारंभ होता है, आज से इसकी शुरुआत हुई है। ये नवरात्रि 27 मार्च को खत्म होने वाली है। आपको बता दें कि इसी महीने की 3 तारीख को चंद्र ग्रहण लगा था जिसके कारण होली का त्योहार 4 मार्च को मनाया गया था और इसी के 15 दिन बाद नवरात्रि का प्रारंभ हो रहा है और यही नहीं मां का आगमन 'डोली' यानी की कंधों पर हो रहा है, जो कि अच्छा संकेत नहीं माना जाता है।
विश्व के हालात भी इस वक्त परेशान करने वाले हैं ऐसे में सभी के मन में थोड़ा सा नवरात्रि को लेकर भय हो गया है लेकिन लोगों को चिंता करने की जरूरत नहीं हैं। काशी के पंडित दयानंद शास्त्री के मुताबिक अगर ग्रहण के बाद नवरात्रि आती है तो ये अशुभ नहीं बल्कि शुभ होता है क्योंकि नवरात्रि नकारात्मक ऊर्जा को दूर करती है इसलिए ग्रहण के कारण जितनी भी परेशानियां या नकारात्मक चीजें थीं वो अब नवरात्रि की वजह से दूर हो जाएंगी।

आपको बता दें कि 89 साल बाद चंद्र ग्रहण के बाद चैत्र नवरात्रि आया है ग्रहण के बाद की यह नवरात्रि नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने और मां दुर्गा की पूजा से दोषों का निवारण करने के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है इसलिए इस पूजा को लेकर मन से हर शंका निकाल दीजिए।
Chaitra Navratri 2026: शक्ति की पूजा से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है
गौरतलब है कि चंद्र ग्रहण एक खगोलीय घटना है, जिसे ज्योतिष में संवेदनशील समय माना जाता है। इस दौरान पूजा-पाठ और शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं लेकिन इसका प्रभाव ग्रहण काल तक ही सीमित रहता है। जबकि चैत्र नवरात्रि मां दुर्गा की आराधना का सबसे पवित्र पर्व है, इस दौरान शक्ति की पूजा से नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, यह नया साल (हिंदू नववर्ष) भी माना जाता है और हर प्रकार के दोषों को दूर करने वाला समय होता है।
Chaitra Navratri 2026 Effect: शुद्धिकरण और सकारात्मक ऊर्जा का पर्व
दूसरे शब्दों में कहा जाए तो नवरात्रि तो खुद एक शुद्धिकरण और सकारात्मक ऊर्जा का पर्व है। चैत्र नवरात्रि में मां दुर्गा की उपासना से जीवन में सुख, समृद्धि और शक्ति आती है। अगर आप सही तरीके से पूजा करें, तो इसका फल कई गुना बढ़ जाता है।
Chaitra Navratri 2026 पर क्या करें?
नवरात्रि के पहले दिन शुभ मुहूर्त में कलश स्थापित करें फिर मिट्टी के पात्र में जौ बोएं, इसके बाद कलश में जल, सुपारी, सिक्का डालकर नारियल रखें, सुबह-शाम दीपक जलाएं,मां को फूल, फल, मिठाई अर्पित करें और दुर्गा चालीसा या सप्तशती का पाठ करें। नवरात्रि में "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे" मंत्र का जाप करने से सुख-शांति के साथ यश लाभ मिलता है।
DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है।












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