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Durga Chalisa in Hindi: नवरात्रि में रोज करें दुर्गा चालीसा का पाठ, बदल जाएगी किस्मत

Durga Chalisa in Hindi: चैत्र नवरात्रि 2026 की शुरुआत 19 मार्च से हो रही है और इसका समापन 27 मार्च को होगा। इस दौरान हर रोज दुर्गा चालीसा का पाठ करना चाहिए, यह न केवल आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करता है, बल्कि जीवन की कठिनाइयों से उबरने का मार्ग भी दिखाता है।

Durga Chalisa in Hindi

दुर्गा चालीसा (Durga Chalisa in Hindi)

  • नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो अंबे दुःख हरनी॥
  • निरंकार है ज्योति तुम्हारी। तिहूं लोक फैली उजियारी॥
  • शशि ललाट मुख महाविशाला। नेत्र लाल भृकुटि विकराला॥
  • रूप मातु को अधिक सुहावे। दरश करत जन अति सुख पावे॥
  • तुम संसार शक्ति लै कीना। पालन हेतु अन्न धन दीना॥
  • अन्नपूर्णा हुई जग पाला। तुम ही आदि सुन्दरी बाला॥
  • प्रलयकाल सब नाशन हारी। तुम गौरी शिवशंकर प्यारी॥
  • शिव योगी तुम्हरे गुण गावें। ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें॥रूप सरस्वती को तुम धारा।
  • दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा॥
  • धरयो रूप नरसिंह को अम्बा। परगट भई फाड़कर खम्बा॥
  • रक्षा करि प्रह्लाद बचायो। हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो॥

मानसिक शक्ति बढ़ती है (Durga Chalisa in Hindi)

  • लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं। श्री नारायण अंग समाहीं॥
  • क्षीरसिन्धु में करत विलासा। दयासिन्धु दीजै मन आसा॥
  • हिंगलाज में तुम्हीं भवानी। महिमा अमित न जात बखानी॥
  • मातंगी अरु धूमावति माता। भुवनेश्वरी बगला सुख दाता॥
  • श्री भैरव तारा जग तारिणी। छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी॥
  • केहरि वाहन सोह भवानी। लांगुर वीर चलत अगवानी॥
  • कर में खप्पर खड्ग विराजै। जाको देख काल डर भाजै॥
  • सोहै अस्त्र और त्रिशूला। जाते उठत शत्रु हिय शूला॥
  • नगरकोट में तुम्हीं विराजत। तिहुँलोक में डंका बाजत॥
  • शुम्भ निशुम्भ दानव तुम मारे। रक्तन बीज शंखन संहारे॥
  • महिषासुर नृप अति अभिमानी। जेहि अघ भार मही अकुलानी॥
  • रूप कराल कालिका धारा। सेन सहित तुम तिहि संहारा॥
  • परी गाढ़ सन्तन पर जब जब। भई सहाय मातु तुम तब तब॥
  • आभा पुरी अरु बासव लोका। तब महिमा सब रहें अशोका॥
  • ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी। तुम्हें सदा पूजें नर-नारी॥
  • प्रेम भक्ति से जो यश गावें। दुःख दारिद्र निकट नहिं आवें॥
  • ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई। जन्म-मरण ताकौ छुटि जाई॥
  • जोगी सुर मुनि कहत पुकारी। योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी॥
  • शंकर आचारज तप कीनो। काम क्रोध जीति सब लीनो॥
  • निशिदिन ध्यान धरो शंकर को। काहु काल नहिं सुमिरो तुमको॥
  • शक्ति रूप का मरम न पायो। शक्ति गई तब मन पछितायो॥
  • शरणागत हुई कीर्ति बखानी। जय जय जय जगदम्ब भवानी॥
  • भई प्रसन्न आदि जगदम्बा। दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा॥
  • मोको मातु कष्ट अति घेरो। तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो॥
  • आशा तृष्णा निपट सतावें। रिपु मुरख मोही डरपावे॥
  • शत्रु नाश कीजै महारानी। सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी॥
  • करो कृपा हे मातु दयाला। ऋद्धि-सिद्धि दै करहु निहाला।
  • जब लगि जियऊं दया फल पाऊं। तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊं॥
  • श्री दुर्गा चालीसा जो कोई गावै। सब सुख भोग परमपद पावै॥
  • देवीदास शरण निज जानी। करहु कृपा जगदम्ब भवानी॥
  • ॥इति श्रीदुर्गा चालीसा सम्पूर्ण॥

दुर्गा चालीसा का पाठ से क्या है लाभ (Durga Chalisa)

  • रोजाना दुर्गा चालीसा का पाठ अपने मन को शांत करने के लिए भी किया जाता है
  • दुर्गा चालीसा का पाठ करने से आध्यात्मिक, भौतिक और भावनात्मक खुशी मिलती है।
  • रोजाना दुर्गा चालीसा का पाठ अपने मन को शांत करने के लिए भी किया जाता है।
  • आप अपने शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार बनाए रखने के लिए दुर्गा चालीसा का पाठ रोजाना पढ़ सकते हैं।
  • दुश्मनों से निपटने और उन्हें हराने की क्षमता भी विकसित करने के लिए पाठ किया जाता है।
  • अपने परिवार को वित्तीय नुकसान, संकट और अलग-अलग प्रकार के दुखों से बचाने के लिए दुर्गा चालीसा का पाठ किया जाता है।
  • मानसिक शक्ति को विकसित करने के लिए भी दुर्गा चालीसा का पाठ कर सकते हैं।
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