Kanya Pujan Muhurat: आज है कन्यापूजन, जानिए क्या है मुहूर्त और महत्व?

Kanya Pujan Muhurat Hindi: महाअष्टमी और महानवमी के दिन कन्या पूजन किया जाता है, इस दिन 2 से 10 साल तक की कन्याओं का पूजन किया जाता है। माना जाता है कि कन्याओं में मां दुर्गा के विभिन्न रूपों का वास होता है, और उनकी सेवा करने से देवी प्रसन्न होती हैं और घर में सुख-शांति और समृद्धि का भी वास होता है।

कन्या पूजन का महत्व (Kanya Pujan)

  • कन्याओं को भोजन कराने और उनकी सेवा करने से घर-परिवार में सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि आती है।
  • नवरात्रि में कन्या पूजन करने से दांपत्य जीवन सुखी रहता है और संतान संबंधी कष्ट दूर होते हैं।
  • कन्या पूजन करने से जीवन के दोष दूर होते हैं और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
  • पितृ दोष, ग्रह दोष और अन्य नकारात्मक प्रभाव समाप्त होते हैं।
Kanya Pujan Muhurat

कैसे करें कन्यापूजन (Kanya Pujan Kaise kare)

  • सबसे पहले घर और पूजा स्थल की सफाई करें।
  • स्वयं स्नान करके शुद्ध वस्त्र धारण करें।
  • मां दुर्गा की मूर्ति या चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित करें ।
  • 2 से 10 वर्ष की 9 कन्याओं और 1 लंगूर (छोटे बालक) को आमंत्रित करें।
  • कन्याओं के पैर धोकर उन्हें साफ आसन पर बैठाएं।
  • माथे पर तिलक लगाकर, अक्षत और पुष्प अर्पित करें।
  • फिर दुर्गा सप्तशती या देवी मंत्रों का उच्चारण करें।
  • कन्याओं को हलवा, पूड़ी, चने और खीर का प्रसाद अर्पित करें।

आरती और मंत्र जाप (Kanya Pujan Aarti and Mantra)

  • मां दुर्गा की "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे" मंत्र से पूजा करें।
  • "या देवी सर्वभूतेषु मातृरुपेण संस्थिता।या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरुपेण संस्थिता।।
  • या देवी सर्वभूतेषु शान्तिरुपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।"

कन्या पूजन मुहूर्त (Kanya Pujan Muhurat)

  • अष्टमी कन्या पूजन मुहूर्त - 5 अप्रैल को 11: 59 PM से 12:49 PM
  • नवमी कन्या पूजन मुहूर्त -6 अप्रैल को 11: 59 PM से 12:50 PM

आरती ( (Kanya Pujan Aarti)

  • कंठन पर साजै ॥
  • ॐ जय अम्बे गौरी..॥
  • केहरि वाहन राजत,
  • खड्ग खप्पर धारी ।
  • सुर-नर-मुनिजन सेवत,
  • तिनके दुखहारी ॥
  • ॐ जय अम्बे गौरी..॥
  • कानन कुण्डल शोभित,
  • नासाग्रे मोती ।
  • कोटिक चंद्र दिवाकर,
  • सम राजत ज्योती ॥
  • ॐ जय अम्बे गौरी..॥
  • शुंभ-निशुंभ बिदारे,
  • महिषासुर घाती ।
  • धूम्र विलोचन नैना,
  • निशदिन मदमाती ॥
  • ॐ जय अम्बे गौरी..॥
  • चण्ड-मुण्ड संहारे,
  • शोणित बीज हरे ।
  • मधु-कैटभ दोउ मारे,
  • सुर भयहीन करे ॥
  • ॐ जय अम्बे गौरी..॥
  • ब्रह्माणी, रूद्राणी,
  • तुम कमला रानी ।
  • आगम निगम बखानी,
  • तुम शिव पटरानी ॥
  • ॐ जय अम्बे गौरी..॥
  • चौंसठ योगिनी मंगल गावत,
  • नृत्य करत भैरों ।
  • बाजत ताल मृदंगा,
  • अरू बाजत डमरू ॥
  • ॐ जय अम्बे गौरी..॥
  • तुम ही जग की माता,
  • तुम ही हो भरता,
  • भक्तन की दुख हरता ।
  • सुख संपति करता ॥
  • ॐ जय अम्बे गौरी..॥
  • भुजा चार अति शोभित,
  • वर मुद्रा धारी । [खड्ग खप्पर धारी]
  • मनवांछित फल पावत,
  • सेवत नर नारी ॥
  • ॐ जय अम्बे गौरी..॥
  • कंचन थाल विराजत,
  • अगर कपूर बाती ।
  • श्रीमालकेतु में राजत,
  • कोटि रतन ज्योती ॥
  • ॐ जय अम्बे गौरी..॥
  • श्री अंबेजी की आरति,
  • जो कोइ नर गावे ।
  • कहत शिवानंद स्वामी,
  • सुख-संपति पावे ॥
  • ॐ जय अम्बे गौरी..॥
  • जय अम्बे गौरी,
  • मैया जय श्यामा गौरी ।

DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी बात को अमल में लाने से पहले किसी पंडित या ज्योतिषी से जरूर बात करें।

अष्टमी-नवमी को किसकी पूजा होती है?

अष्टमी के दिन महागौरी और नवमी के दिन सिद्धादात्री की पूजा होती है।

5 या 6 अप्रैल, कब है महाअष्टमी?

अष्टमी 5 अप्रैल को है और महानवमी 6 अप्रैल को है।

कन्या पूजन क्यों किया जाता है?

माना जाता है कि कन्याओं में मां दुर्गा के विभिन्न रूपों का वास होता है, और उनकी सेवा करने से देवी प्रसन्न होती हैं।

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