Ashtami Kab Hai: इस शारदीय नवरात्रि किस दिन होगा महाष्टमी का हवन? चेक करें सामग्री की लिस्ट
Maha Ashtami Kab Hai: शारदीय नवरात्रि चल रही है। महाष्टमी नवरात्रि में बेहद खास महत्त्व रखता है। इस साल नवरात्रि 10 दिनों की है। तृतीया तिथि का दोहराव (दो दिन तक होने के कारण) महाष्टमी 30 सितंबर हो पड़ेगी। इस दिन मां के महागौरी स्वरुप की आराधना की जाती है।
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल दुर्गा अष्टमी का पर्व 30 सितंबर 2025 को मनाया जाएगा। इस दिन श्रद्धालु मां दुर्गा की विशेष पूजा करेंगे, कन्या पूजन और हवन का आयोजन किया जाएगा। वहीं, महानवमी का पर्व 01 अक्टूबर को है। जो लोग नवमी तिथि पर कन्या पूजन और हवन करते हैं, वे उस दिन भी यह अनुष्ठान कर सकते हैं।

कैसे करें महाष्टमी को हवन? (Maha Ashtami Hawan)
हवन शुरू करने से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनना जरूरी है। हवन कुंड या वेदी को साफ करके पूजा सामग्री को सजा लें। पूजा की शुरुआत देवी मां के सामने संकल्प लेने से करें। संकल्प के लिए हाथ में जल, फूल और चावल लेकर माता दुर्गा से आशीर्वाद मांगें।
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हवन सामग्री (Hawan Samagri)
- हवन कुंड / वेदी
- आम की लकड़ी या सूखी लकड़ी
- आम्रपल्लव (आम के पत्ते)
- कपूर
- घी
- रुई की बत्तियाँ
- रोली, हल्दी, चंदन
- चावल (अक्षत)
- जौ
- तिल
- गुड़
- चीनी / मिश्री
- गोंद
- गुग्गुल
- सुपारी
- लौंग
- इलायची
- नारियल
- कमलगट्टा
- पंचमेवा (काजू, बादाम, किशमिश, छुहारा, अखरोट)
- सूखा नारियल टुकड़े
- पुष्प (लाल व पीले फूल)
- आटे से बनी छोटी-छोटी गोलियां (लड्डू जैसे)
- दुर्वा (अगर संभव हो)
- जल से भरा कलश
- कलावा (लाल-पीला धागा)
- रुमाल / वस्त्र (देवी को अर्पित करने के लिए)
मंत्रों से दें आहुति
हवन में आहुति देने के लिए दुर्गा सप्तशती के मंत्र या नवार्ण मंत्र 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे' का उच्चारण किया जाता है। आहुति के लिए जौ, तिल, चावल, घी, गुड़, चीनी और गुग्गुल का प्रयोग करना शुभ माना गया है। परंपरा के अनुसार कम से कम 108 आहुति देना सबसे उत्तम माना जाता है।
पूर्णाहुति का महत्व
हवन के अंत में पूर्णाहुति दी जाती है। इसके लिए एक नारियल पर कलावा बांधकर उसमें सुपारी, सिक्का और अन्य सामग्री रखी जाती है। फिर इसे घी में डुबोकर मंत्रों के साथ अग्नि को समर्पित किया जाता है। इसके बाद मां दुर्गा की आरती उतारकर पूजा में हुई भूलों के लिए क्षमा मांगी जाती है।
कन्या पूजन और व्रत पारण
हवन और आरती के बाद कन्या पूजन किया जाता है। मान्यता है कि कन्याओं में मां दुर्गा का स्वरूप माना जाता है। पूजन के बाद उन्हें भोजन और उपहार देकर आशीर्वाद लिया जाता है। इसी के साथ व्रत का पारण भी किया जाता है।
हवन पूजा मंत्र
हवन के दौरान विभिन्न देवी-देवताओं का आह्वान कर आहुति दी जाती है। मंत्र इस प्रकार हैं:
ओम गणेशाय नम: स्वाहा
ॐ केशवाय नमः
ॐ नारायणाय नमः
ॐ माधवाय नमः
ओम गौरियाय नम: स्वाहा
ओम नवग्रहाय नम: स्वाहा
ओम दुर्गाय नम: स्वाहा
ओम महाकालिकाय नम: स्वाहा
ओम हनुमते नम: स्वाहा
ओम भैरवाय नम: स्वाहा
ओम कुल देवताय नम: स्वाहा
ओम स्थान देवताय नम: स्वाहा
ओम ब्रह्माय नम: स्वाहा
ओम विष्णुवे नम: स्वाहा
ओम शिवाय नम: स्वाहा
ओम जयंती मंगलाकाली, भद्रकाली कपालिनी दुर्गा क्षमा शिवाधात्री स्वाहा
स्वधा नमस्तुति स्वाहा।
ओम ब्रह्मा मुरारी त्रिपुरांतकारी भानु: शशि भूमि सुतो बुधश्च: गुरुश्च शुक्र शनि राहु केतव सर्वे ग्रहा शांति करा भवंतु स्वाहा।।
ओम गुरुर्ब्रह्मा, गुरुर्विष्णु, गुरुर्देवा महेश्वर: गुरु साक्षात् परब्रह्मा तस्मै श्री गुरुवे नम: स्वाहा।
ओम शरणागत दीनार्त परित्राण परायणे, सर्व स्थार्ति हरे देवि नारायणी नमस्तुते।।
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