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Anant Chaturdashi 2023 Muhurat: अनंत चतुर्दशी आज, जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र और महत्व

Anant Chaturdashi 2023 Subh Muhurati: आज भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि यानी कि अनंत चतुर्दशी का त्योहार है। इसे अनंत चौदस के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। आज जो भी भगवान विष्णु की पूजा सच्चे मन से करता है उसे अनंत फल की प्राप्ति होती है।

Anant Chaturdashi 2023

ये दिन गणेश भक्तों के लिए भी काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस दिन बप्पा के भक्त उनका विसर्जन करते हैं और इसी के साथ ही गणेश चतुर्थी के दिन से शुरू हुआ दस दिनों का गणेशोत्सव भी समाप्त हो जाता है। इस व्रत का उल्लेख महाभारत में भी हैं।

पांडवों ने किया था अनंत चौदस का व्रत

महर्षि व्यास के मुताबिक भगवान कृष्ण के ही कहने पर पांडवों ने अनंत चतुर्दशी का व्रत रखा था और ये उसी व्रत का प्रभाव था कि पांडवों ने कौरवों की सेना को परास्त किया था।

अनंत चतुर्दशी 2023 मुहूर्त

  • चतुर्दशी तिथि प्रारंभ- 27 सितंबर 2023 को 10: 18 PM
  • चतुर्दशी तिथि का समापन- 28 सितंबर को शाम 06: 49 PM
  • पूजा का शुभ मुहूर्त -06: 12 AM से शाम 06: 49 PM

पूजा विधि

  • सबसे पहले सुबह नहाधोकर साफ-सुथरे कपड़े पहनें।
  • व्रत का संकल्प लें।
  • फिर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करें।
  • उन्हें पीले मिष्ठान का भोग लगाएं।
  • कथा सुनें, आरती करें, प्रसाद बांटे।
  • ब्राह्मणों को भोजन कराएं।
  • गरीबों को दान दें।

महत्व

बहुत सारे लोग संतान की प्राप्ति और उसकी उन्नति के लिए अनंत चतुर्दशी की व्रत रखते हैं। तो वहीं भगवान विष्णु के साथ अगर इस दिन मां लक्ष्मी की भी पूजा की जाए तो इंसान को यश-बल के साथ धन की भी प्राप्ति होती है। तो वहीं इस दिन जो दान-पुण्य करता है उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

मंत्र

अनंत संसार महासमुद्रेमग्नं समभ्युद्धर वासुदेव। अनंतरूपे विनियोजयस्वह्यनंतसूत्राय नमो नमस्ते॥

अंनत चतुर्दशी आरती (Anant Chaturadashi Aarti)

  • ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी ! जय जगदीश हरे।
  • भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
  • ॐ जय जगदीश हरे।
  • जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का।
  • स्वामी दुःख विनसे मन का।
  • सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥
  • ॐ जय जगदीश हरे।
  • मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी।
  • स्वामी शरण गहूँ मैं किसकी।
  • तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥
  • ॐ जय जगदीश हरे।
  • तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।
  • स्वामी तुम अन्तर्यामी।
  • पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥
  • ॐ जय जगदीश हरे।
  • तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता।
  • स्वामी तुम पालन-कर्ता।
  • मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥
  • ॐ जय जगदीश हरे।
  • तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
  • स्वामी सबके प्राणपति।
  • किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमति॥
  • ॐ जय जगदीश हरे।
  • दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
  • स्वामी तुम ठाकुर मेरे।
  • अपने हाथ उठा‌ओ, द्वार पड़ा तेरे॥
  • ॐ जय जगदीश हरे।
  • विषय-विकार मिटा‌ओ, पाप हरो देवा।
  • स्वमी पाप हरो देवा।
  • श्रद्धा-भक्ति बढ़ा‌ओ, सन्तन की सेवा॥
  • ॐ जय जगदीश हरे।
  • श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे।
  • स्वामी जो कोई नर गावे।
  • कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥
  • ॐ जय जगदीश हरे।

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