सुधरेंगे उत्तराखंड रोडवेज के हालात, निजी कंपनी के हाथों जाएगी बागडोर
देहरादून, 30 जून: डूबते जहाज यानी रोडवेज की हालत सुधारने के लिए अब निजी कंपनी को प्लान बनाने की जिम्मेदारी सौंपने की तैयारी चल रही। इस बारे में सरकार की अनुमति के बाद कंपनी का चयन किया जाएगा, जो प्लान रोडवेज के अधिकारियों ने बनाया था, उसे हाईकोर्ट ने सिरे से नकार दिया है।

रोडवेज इस समय 520 करोड़ के घाटे में है। कोरोना काल के कारण बस संचालन न होने से उसका घाटा बढ़ता जा रहा। हालात यह हैं कि वह वेतन देने और अन्य लंबित भुगतान करने में भी समर्थ नहीं। गुजरे एक साल से वह सरकार से मिल रही मदद पर ही कर्मचारियों को वेतन दे रहा। अभी तक फरवरी से मई का वेतन लंबित था, लेकिन मंगलवार को फरवरी का वेतन कर्मचारियों को दे दिया गया। ऐसे में अब तीन माह का वेतन लंबित है लेकिन बुधवार के बाद जून का भी वेतन लंबित हो जाएगा। यानी कुल मिलाकर चार माह का वेतन व सेवानिवृत्त कर्मचारियों के देयकों का भुगतान करने के लिए रोडवेज प्रबंधन को कम से कम 150 करोड़ रूपये की जरूरत है। इस मामले में रोडवेज व परिवहन विभाग के अधिकारियों ने 138 करोड़ रूपये का उद्धार प्लान तैयार किया था, जिसे हाईकोर्ट ने नकार दिया।
दरअसल, हाईकोर्ट चाहता है कि रोडवेज के अधिकारी दिसंबर तक वेतन दे पाने का खाका तैयार करें। हाईकोर्ट की फटकार के बाद अब अधिकारी यह जिम्मा कंपनी को सौंपने की तैयारी कर रहे। कंपनी न केवल वेतन व लंबित भुगतान कैसे करना है, यह प्लान बनाएगी, बल्कि रोडवेज की आर्थिक स्थिति कैसे सुधारी जा सकती है, इस बारे में भी जानकारी देगी।
फरवरी का वेतन हुआ जारी
हाईकोर्ट के सख्त रवैये के बाद रोडवेज कर्मचारियों को दस दिन के भीतर एक और माह का वेतन मंगलवार को जारी कर दिया गया। दरअसल, सरकार से मिले 20 करोड़ रूपये पर दस दिन पहले ही कर्मचारियों को जनवरी का वेतन दिया गया था। इसके बाद सरकार ने 24 करोड़ रूपये पिछले हफ्ते ही फिर मंजूर किए थे। चूंकि, हाईकोर्ट में वेतन को लेकर लगातार सुनवाई चल रही थी तो सरकार ने यह धनराशि रोडवेज के खाते में डालने में देर नहीं लगाई। सोमवार की शाम ही धनराशि खाते में आ गई और मंगलवार को सभी मंडल व डिपो में वेतन भेज दिया गया।












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