देश में पहली बार मध्यप्रदेश में खोले जा रहे हैं कस्टम प्रोसेसिंग सेंटर
भोपाल, 16 जुलाई। देश में पहली बार मध्यप्रदेश (MP) में कस्टम प्रोसेसिंग सेंटर खोले जा रहे हैं. इसकी शुरुआत आज भोपाल में हुई. ये सेंटर खुलने से लाखों किसानों को फायदा मिलेगा. किसान अब अपनी फसल का प्रोडक्ट बनाकर खेत से मार्केट में बेच सकेगा.

कृषि मंत्री कमल पटेल ने कहा देश में पहली बार इस योजना का शुभारंभ किया गया. इससे शिक्षित बेरोजगार युवा किसानों को मौका मिलेगा. खेतों में यूनिट लगेगी तो ग्रामीण क्षेत्र में बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा. किसानों की आय तेजी से बढ़ेगी. मार्केट में बिकने वाले प्रोडक्ट भी सस्ते दामों पर मिल सकेंगे. इस योजना से किसान सीधे अपने खेत की फसल को प्रोडक्ट में कन्वर्ट कर बेच सकेगा.
260 केंद्र खोलने का लक्ष्य
कमल पटेल ने कहा प्रत्येक जिले में पांच कस्टम प्रोसेसिंग केंद्र खोलने का लक्ष्य है. इस साल 2021-22 में कुल 260 केंद्र खोलने का लक्ष्य है. बैंक ऋण आधार पर कस्टम प्रोसेसिंग केंद्र खोलने के लिए किसान कृषि अभियांत्रिकी संचालनालय में ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. यह कस्टम प्रोसेसिंग केंद्र प्रदेश के सभी जिलों में खोले जाएंगे. इसके लिए कम से कम दस लाख रुपये और अधिक से अधिक 25 लाख रुपए खर्च आएगा. जो किसान ये खोलना चाहते हैं उन्हें 10 लाख रुपए तक का अनुदान दिया जाएगा. हितग्राही भारत सरकार के एग्रीकल्चर इन्फ्राट्रक्चर फंड के अंतर्गत लाभ प्राप्त करने के भी पात्र होंगे. एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड योजना से प्रोजेक्ट को 3% की दर से ब्याज अनुदान और भारत सरकार की गारंटी होगी.
कस्टम हायरिंग केंद्र से मिलेगी मदद
निजी क्षेत्र में कस्टम हायरिंग केंद्र खोलने के लिए किसानों को किराये पर मशीनें, यंत्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं. हर कस्टम हायरिंग केंद्र के लिए आवश्यक ट्रैक्टर और खेती बाड़ी की मशीनों के लिए 40 फीसदी से लेकर 10 लाख रुपये तक का लोन दिया जाएगा. फिलहाल 416 कस्टम हायरिंग केंद्र खोलने के लिए आवेदन मंगाए जा रहे हैं. बैंक लोन के आधार पर केंद्र खोलने पर ही अनुदान मिलेगा. अभी योजना का लक्ष्य प्रदेश में साढ़े चार हजार कस्टम हायरिंग सेंटर खोलने का है. इससे किसान अब खेत में ही ग्रेडिंग कर सकेंगे.












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