Madhya Pradesh BJP: मध्य प्रदेश में भाजपा के लिए 'संकेत' अच्छे नहीं हैं
मध्य प्रदेश में भाजपा के लिए संकेत अच्छे नहीं है। भाजपा ने फरवरी में राज्य के भीतर जो विकास यात्रा निकाली थी, उसका जगह जगह विरोध हुआ। इस विकास यात्रा में भाजपा को उम्मीद के मुताबिक जनसमर्थन नहीं मिला।

Madhya Pradesh BJP: इस वर्ष के अंत में मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव होना है। 2003 में दिग्विजय सिंह को मुख्यमंत्री पद से अपदस्थ कर उमा भारती ने प्रदेश में कमल खिलाया तो वह ऐसा खिला कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को सबसे लम्बे समय तक बतौर भाजपाई मुख्यमंत्री रहने का श्रेय दे दिया।
शिवराज सिंह मध्य प्रदेश की जनता में लोकप्रिय हैं इसमें कोई संदेह नहीं है। बच्चों/बच्चियों के 'मामा' के नाम ने उन्हें घर के सदस्य के रूप में स्थापित किया किन्तु इस बार उनके समक्ष अपने गृह प्रदेश में सत्ता में वापसी सुनिश्चित करना कठिन लग रहा है। एक तो लम्बे समय की एंटी इनकम्बेंसी, ऊपर से विधायकों का कमजोर रिपोर्ट कार्ड, कुल मिलाकर भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश इकाई पशोपेश में हैं।
दरअसल, पूरे प्रदेश में भाजपा ने 05 फरवरी 2023 से 25 फरवरी 2023 तक 'विकास यात्रा' निकाली थी जिसका उद्देश्य जनता की नब्ज को टटोलने से लेकर विधायकों की कर्मठता को जांचना था। किन्तु जिस प्रकार से इस विकास यात्रा का विरोध और जनता की उदासीनता दिखी उसने भाजपा नेतृत्व को चिंता में डाल दिया है।
लगभग 25 से 30 विधायकों और आधा दर्जन मंत्रियों का विकास यात्रा में जमकर विरोध हुआ और कहीं-कहीं तो जनता की उदासीनता के कारण भीड़ न होने से नाच-गाने का आयोजन करवाना पड़ा। कुछ स्थानों पर सरकारी अधिकारी ही पार्टी प्रवक्ता बनकर सरकार की लाज बचाते नजर आए।
विधायकों-मंत्रियों के प्रति विरोध की सीमा हुई पार
विकास यात्रा में ऐसे कई वाकये हुए जिन्होंने जनता के गुस्से को विधायकों-मंत्रियों पर बरसते देखा। देवास जिले के हाटपिपलिया से विधायक मनोज चौधरी के सामने इंडस्ट्री के लिए जमीन अधिग्रहण को लेकर 32 गांव के किसानों ने अर्धनग्न होकर विरोध प्रदर्शन किया। रीवा लोकसभा क्षेत्र की आठों विधानसभाओं में भाजपा के विधायक हैं।
मऊगंज से विधायक प्रदीप पटेल के काफिले पर ग्रामीणों ने हमला तो किया ही, उनके सभा स्थल के पंडाल में रखी कुर्सी-टेबल तक उठाकर फेंक दी गईं। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री बृजेन्द्र सिंह यादव के मुंगावली विधानसभा क्षेत्र के ग्राम देवर्छि पहुंचने पर ग्रामीणों की भीड़ में से किसी ने उनके शरीर पर खुजली वाली फली लगा दी जिसके बाद उन्हें सार्वजनिक हैंडपंप पर कुर्ता उतारकर हाथ-पैर धोने पड़े।
त्योंथर विधायक श्यामलाल द्विवेदी को विकास यात्रा में भीड़ जुटाने के लिए गले में सांप डाल कर बीन बजाना पड़ी। बुंदेलखंड के निवाड़ी जिले में विकास यात्रा में भीड़ नहीं जुटी तो जनता को बुलाने के लिए फूहड़ नाच करवाए गए। जैतपुर विधानसभा क्षेत्र में विधायक को जनता ने गुस्से में घेरा तो उन्हें भागना पड़ा। हैवीवेट वन मंत्री विजय शाह ने हरसूद विधानसभा के गांव गोलखेड़ा में जनता द्वारा सभा के दौरान प्रश्न पूछने पर जमकर फटकार लगा दी।
विधायक धर्मेन्द्र सिंह लोधी ने दमोह जिले में विकास यात्रा के दौरान विरोध का वीडियो बनाए जाने पर युवक से मोबाइल छीन लिया जिसकी पुलिस में लिखित शिकायत की गई। इसके अलावा पंधाना विधायक राम डांगोरे, देवास विधायक गायत्री राजे, खंडवा विधायक देवेन्द्र वर्मा, पूर्व विधायक वेलसिंह भूरिया, जनजातीय विकास मंत्री मीना सिंह आदि दर्जन भर नेताओं को जमकर विरोध-प्रदर्शनों का सामना करना पड़ा।
मालवा-निमाड़, रीवा और चम्बल से उठ रहे विरोध के स्वर
2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को अपने सबसे मजबूत गढ़ मालवा-निमाड़ में सर्वाधिक नुकसान उठाना पड़ा और यहां की 66 सीटों में से 27 सीटें पार्टी हार गई। कांग्रेस ने क्षेत्र की 34 सीटें जीत कर राजनीतिक पंडितों को चकित कर दिया था। यही हाल ग्वालियर-चम्बल संभाग का था। चूंकि कांग्रेस ने चुनाव ज्योतिरादित्य सिंधिया के चेहरे पर लड़ा था और यह संभाग उनका गृह क्षेत्र था अतः कांग्रेस को यहां से भी बढ़त मिली थी और उसने 26 सीटों पर जीत हासिल की थी।
हालांकि बाद में सिंधिया की कांग्रेस से बगावत ने सरकार का तख्तापलट कर दिया किन्तु अपने साथ वे जिन विधायकों-मंत्रियों को भाजपा में लेकर आए, उनसे स्थानीय पार्टी कैडर खुश नहीं है। जनता के बीच भी उनकी छवि को लेकर विश्वसनीयता का संकट है।
2018 में भाजपा की लाज बचाने वाले रीवा संभाग में इस बार भाजपा को भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। मैहर से भाजपा के बागी विधायक नारायण त्रिपाठी ने अलग विंध्य प्रदेश की मांग का जो झंडा उठा रखा था, उसके नीचे अब भीड़ जुटने लगी है। फिर विंध्य क्षेत्र में आपसी गुटबाजी और नेताओं के बड़बोले बयानों ने भी जनता के बीच नकारात्मक छवि बना ली है जिससे वहां भाजपा का ख़ासा विरोध है। महाकोशल और मध्य क्षेत्र में अभी भाजपा का उतना विरोध नहीं है किन्तु कमलनाथ का ध्यान अब अपने महाकोशल संभाग पर अधिक है और यहां से बगावत की चिंगारियां उठने लगी हैं।
टिकट बंटवारे पर संगठन में पशोपेश
हाल ही में संपन्न हुए गुजरात विधानसभा चुनाव से पूर्व भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने मुख्यमंत्री सहित पूरे मंत्रिमंडल को ही बदल डाला था। यहां तक कि कई बड़े नेताओं को चुनाव लड़ने से वंचित किया गया। इसका सकारात्मक परिणाम भी आया और गुजरात में पहली बार किसी पार्टी ने तीन चौथाई बहुमत के साथ सरकार में वापसी की। गुजरात के बाद मध्य प्रदेश ही वह राज्य है जहां भाजपा का कैडर और संगठन की उपस्थिति जमीनी स्तर तक है। यही कारण है कि मध्य प्रदेश में भाजपा की पिछली हार ने नेतृत्व को हिला कर रख दिया था। तब भी टिकट बंटवारे में भाई-भतीजावाद जमकर चला था और संगठन के सुझावों को सिरे से नकार दिया गया था। नतीजा सबके सामने था।
इस बार संगठन 2018 की गलती नहीं दोहराना चाहता। विकास यात्रा के बहाने संगठन के पास जो रिपोर्ट पहुंची है उसने इतना तो तय कर दिया है कि 2023 के विधानसभा चुनाव में लगभग 20 प्रतिशत टिकट बदले जाएंगे। गाहे-बगाहे चेहरा बदलने की चर्चा जोर पकड़ती है किन्तु शिवराज सिंह को प्रदेश की राजनीति से दूर करना इतना आसान नहीं है। वे न तो येदयुरप्पा की भांति उम्र की सीमा से ऊपर हैं और न ही वसुंधरा राजे की तरह संगठन में अलग-थलग। बल्कि वे संभवतः एकलौते ऐसे भाजपाई मुख्यमंत्री हैं जो गाजे-बाजे के साथ संघ कार्यालय जाते हैं और उनका प्रचार-तंत्र उसे भुनाता भी इसी प्रकार है।
ऐसे में संगठन के सामने दोहरे प्रश्न हैं। पहला- क्या एक निर्वाचित और मजबूत मुख्यमंत्री को दरकिनार करके टिकटों का बंटवारा स्वयं करे या दूसरा- क्या 2018 की तरह शिवराज सिंह चौहान को फ्रीहैंड दे। दोनों स्थितियों में राजनीतिक दांव-पेंच होंगे और यह भी नहीं भूलना चाहिए कि ज्योतिरादित्य सिंधिया अब भाजपा में हैं और लोकप्रियता के मामले में शिवराज सिंह से उन्नीस ही हैं।
अपने सभी पूर्व कांग्रेसी समर्थकों का सिंधिया भाजपा में अच्छा पुनर्वास करवा चुके हैं और मजबूत नेता के तौर पर उभर रहे हैं। वर्ष के अंत तक मध्य प्रदेश अब राजनीति का अखाड़ा बनेगा और यहां से निकला जीत का मंत्र ही 2024 में ब्रह्मास्त्र बनेगा।
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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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