त्रिपुरा में जीत के बावजूद क्यों जा सकती है सीएम माणिक साहा की कुर्सी ?
बीजेपी ने त्रिपुरा में शानदार जीत दर्ज की है। पार्टी को अपने दम पर पूर्ण बहुमत मिला है। राज्य में पार्टी की अगुवाई मुख्यमंत्री माणिक साहा ने की है, लेकिन फिर भी बीजेपी नेतृत्व बदल सकती है। इसकी वजह महिला मतदाता हैं।

त्रिपुरा में बीजेपी पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में काबिज रही है तो उसमें मुख्यमंत्री डॉक्टर माणिक साहा का योगदान काफी बड़ा है। उनकी बदौलत पार्टी को पांच साल की एंटी-इंकंबेंसी पर काबू पाने में सहायता मिली। कांग्रेस-सीपीएम ने हाथ मिला लिया था। टिपरा मोथा पार्टी बहुत बड़ी चुनौती बनकर उभरी। लेकिन, साहा ने अपनी शांत और निर्विवाद छवि से सबसे लोहा लिया और पार्टी की सत्ता में वापसी कराई। लेकिन, फिर भी चर्चा है कि राज्य में भाजपा नेतृत्व परिवर्तन पर विचार कर रही है। जबकि, साहा ही भाजपा के सीएम के चेहरा हैं, यह बात नेताओं ने सार्वजनिक तौर पर कही थी। आइए जानते हैं कि फिर ऐसा क्या हुआ कि लीडरशिप बदलने की बात कही जा रही है।

त्रिपुरा में नेतृत्व बदल सकती है बीजेपी ?
त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री माणिक साहा ही भाजपा के लिए सीएम का चेहरा थे। यह बात औपचारिक थी। लेकिन, जब पार्टी ने धमाकेदार जीत दर्ज करके सत्ता में कायम रही है तो चर्चा चल रही है कि पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व प्रदेश में मुख्यमंत्री बदलने पर विचार कर सकता है। चर्चा है कि पार्टी केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्यमंत्री प्रतिमा भौमिक को त्रिपुरा की कमान सौंपने की सोच रही है। इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि इसके माध्यम से पार्टी लोकसभा चुनाव से पहले 'पूर्वोत्तर क्षेत्र और पूरे देश को एक सही संदेश देना चाहती है।'

त्रिपुरा में साहा के नेतृत्व में जीती है बीजेपी
गौरतलब है कि पेशे से डेंटल सर्जन और निर्विवाद छवि वाले नेता माणिक साहा का त्रिपुरा के बहुकोणीय मुकाबले में भाजपा को दोबारा पूर्ण बहुमत दिलाने में बहुत ही बड़ा योगदान रहा है। एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक यदि टॉप लीडरशिप प्रतिमा भौमिक को त्रिपुरा में मुख्यमंत्री बनाने का फैसला करती है तो साहा को केंद्र में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। पार्टी के सामने असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनवाल का उदाहरण है। 2021 में असम में शानदार जीत के बावजूद पार्टी ने राज्य में सीएम का चेहरा बदलने में संकोच नहीं किया और सोनवाल को केंद्र में मंत्री बनाकर असम की कमान हिमंत बिस्वा सरमा को सौंप दी, जो पूर्वोत्तर में भाजपा के सबसे बड़े चेहरा बनकर उभरे हैं।

प्रतिमा भौमिक के बहाने महिलाओं को बड़ा संदेश सकती है पार्टी
हालांकि, पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि हो सकता है कि मुख्यमंत्री बदलने का यह फैसला तत्काल न हो। क्योंकि, अभी साहा ने पार्टी की जीत सुनिश्चित करवाई है, इसलिए इस तरह का फैसला कुछ समय बाद भी लिया जा सकता है। अगर बीजेपी साहा की जगह भौमिक को विधायक दल का नेता बनाती है तो वह उत्तर-पूर्व के इतिहास की पहली महिला मुख्यमंत्री होंगी। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, 'इसे खारिज नहीं किया जा सकता है। केंद्र माणिक साहा को केंद्र सरकार में भेज सकता है, यदि उन्हें (भौमिक को) नियुक्त करने का फैसला किया गया तो।' भाजपा ऐसे समय में प्रतिमा भौमिक को त्रिपुरा की बागडोर देने की सोच रही है, जब महिलाओं के बीच पार्टी के बढ़े जनाधार को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश स्पष्ट है।

महिलाओं के बीच भाजपा का बढ़ा है जनाधार
भाजपा को पता है कि त्रिपुरा के आदिवासी बहुल इलाकों में झटका खाने के बावजूद महिलाओं के समर्थन ने इसकी सत्ता में वापसी में बहुत बड़ी भूमिका निभाई है। चुनाव आयोग के आंकड़ों से भी साफ है कि राज्य में महिलाओं ने पुरुषों के मुकाबले ज्यादा मतदान किया है। 16 फरवरी के चुनाव में 86.12% पुरुषों ने वोट दिया, जबकि वोट देने वाली महिलाओं का प्रतिशत 89.17% रहा। प्रदेश में बीजेपी सरकार ने महिलाओं के लिए कई सारे कार्यक्रमों की शुरुआत की है, जिससे उनके जीवन में बहुत अधिक बदलाव आया है। राज्य की सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 33% आरक्षण दिया गया है। इसी तरह महिलाओं के स्वास्थ्य और पोषण, शिक्षा और वित्तीय समर्थन के साथ-साथ, महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों पर नकेल कसे जाने से भी आधी आबादी में भाजपा का जनाधार बढ़ाने का काम किया है।
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महिलाओं को अपना 'साइलेंट वोटर' मानती है भाजपा
बीजेपी नेताओं ने संकेत दिया है कि 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले महिलाओं के लिए कई और योजनाएं और कार्यक्रम शुरू किए जा सकते हैं। क्योंकि, त्रिपुरा ही नहीं, विभिन्न राज्यों में महिलाओं का वोट प्रतिशत पुरुषों के मुकाबले ज्यादा रह रहा है। पीएम मोदी खुद पार्टी के इस जनाधार से जुड़ने का कोई भी मौका नहीं छोड़ते। लालकिले से अपने भाषण में भी वह महिलाओं के प्रति सम्मान का संदेश देने से नहीं चूकते हैं। अक्सर वह अपनी पार्टी के नेताओं को याद दिलाते हैं कि महिलाएं बीजेपी की 'साइलेट वोटर' हैं। कई राज्यों के परिणाम ने जब चुनाव विश्लेषकों को चौंकाया है तो उनकी वजह यह 'साइलेंट वोटर' ही मानी जाती हैं। त्रिपुरा के एक बीजेपी नेता ने कहा है, 'इस संदेश को आगे ले जाने के लिए पार्टी नेतृत्वी महिला मुख्यमंत्री पर विचार कर सकता है।'
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