Tunnel Rescue: सिलक्यारा सुरंग में होगी बाबा बौखनाथ की जय?

Tunnel Rescue: जिस समय भारतीय क्रिकेट टीम अहमदाबाद के नरेन्द्र मोदी स्टेडियम में ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों के हाथ विश्वकप फाइनल में पराजय झेल रही थी ठीक उसी समय में ऑस्ट्रेलिया के ही एक प्रोफेसर उत्तरकाशी के सिल्क्यारा सुरंग में फंसे 41 मजदूरों की जान बचाने के उद्देश्य से भारत पहुंच रहे थे। अगले दिन जब देशभर के अखबार ऑस्ट्रेलिया के हाथों क्रिकेट में पराजय की खबरों से भरे पड़े थे उसी समय ऑस्ट्रेलिया के प्रोफेसर आर्नाल्ड डिक्स सिल्क्यारा में सुरंग की जांच पड़ताल कर रहे थे।

लेकिन अपना काम शुरु करने से पहले वो बाबा बौखनाथ के उस अस्थाई मंदिर के सामने पहुंचे जिसे आनन फानन में तैयार किया गया था। घुटनों पर बैठकर बाबा बौखनाथ का आशीर्वाद लिया और अपने काम में जुट गये। मीडिया से बात करते हुए बस इतना कहा कि अभी तक के इंतजाम बेहतर हैं। उम्मीद है जल्द ही 41 मजदूर बाहर आयेंगे। यह सब उम्मीद भरी बातें 20 नवंबर की हैं। लेकिन 12 नवंबर से 19 नवंबर तक उत्तरकाशी के सिल्क्यारा में सबकुछ निराशाजनक ही था।

Uttarkashi Tunnel collapse baba bokhnag in Silkyara Tunnel

दीपावली के दिन से धंस चुकी सुरंग की अंधेरी गुफा में फंसे 41 मजदूर अभी तक बाहर की रोशनी नहीं देख पाये हैं। पहाड़ ने दोनों ही ओर से उनका रास्ता बंद कर दिया है। उन्हें बचाने के लिए निश्चित रूप से भारत सरकार की ओर से हर संभव प्रयास शुरु किये गये लेकिन 19 नवंबर तक सब असफल। कोई भी ड्रिलिंग मशीन वैकल्पिक रास्ता बनाकर उन तक नहीं पहुंच पा रही थी। वह अमेरिकन ऑगर मशीन भी नहीं जो ऐसे ही काम के लिए जानी जाती है। दो मशीनें लाईं गयी और दोनों ही फेल।

तब स्थानीय लोगों ने कहा कि सुरंग बनाने से पहले यहां मौजूद बाबा बौखनाथ का मंदिर तोड़ दिया गया था। अगर तत्काल उनका अस्थाई मंदिर बना दिया जाए तो बाबा बौखनाथ जरूर कृपा करेंगे और इस समस्या का समाधान निकलेगा। 19 नवंबर को ही लोहे का एक अस्थाई मंदिर बनाकर सुरंग के मुहाने पर वहीं खड़ा कर दिया गया जहां पूर्व में उनका स्थान होता था। यह सब इसलिए हो सका क्योंकि उत्तराखंड सरकार के सलाहकार भास्कर खुलबे 18 नवंबर को वहां पहुंचे थे। खुलबे पहाड़ के ही हैं इसलिए पहाड़ में इन बातों का क्या महत्व होता है इसको बहुत अच्छे से समझते हैं।

19 नवंबर को मंदिर बनने के बाद से ही चमत्कारिक रूप से सिल्क्यारा में साइंस सफल होने लगी। पहली बार वहां काम रहे इंजीनियरों को यह ख्याल आया कि अगर हॉरिजोंटल गलियारा नहीं बन पा रहा है तो क्यों न वर्टिकल एस्केप टनल बनाया जाए? डीआरडीओ और एचएसआईडीसीएल के इंजीनियरों और वैज्ञानिकों के अतिरिक्त आर्नाल्ड डिक्स जैसे विशेषज्ञ भी इस विचार से सहमत दिखे। जहां सुरंग में धंसान हुई है वहां वर्टिकल (ऊपर से नीचे) जाने पर बहुत ज्यादा ड्रिलिंग नहीं करनी होगी। फिर 900 एमएम की ड्रिलिंग की बजाय 800 एमएम की ड्रिलिंग का निर्णय लिया गया ताकि त्वरित गति से काम हो सके। सरकार को उम्मीद है कि अगर सबकुछ ठीक चला तो गुरुवार तक कोई अच्छी खबर आ सकती है।

लेकिन विकल्प सिर्फ वर्टिकल ड्रिलिंग का ही सामने नहीं आया। पहले 4 इंच डायमीटर के पाइप से जो पहुंच बनायी गयी थी, उसके साथ एक दूसरी 6 इंच डायमीटर की पाइप भी सुरंग में फंसे लोगों तक पहुंचने में सफल हो गयी। यह एक और बड़ी उपलब्धि थी क्योंकि अब टनल में फंसे लोगों के लिए पका हुआ भोजन भी उपलब्ध कराया जा सकता है। इसके साथ ही डीआरडीओ ने अपने रोबोट भी सुरंग में उतार दिये और विशेष कैमरा भी वहां तक पहुंचाया जा चुका है जिसके जरिए अब देश उनको सही सलामत देख चुका है।

अंदर जिस तरह से वहां फंसे लोगों ने अपने आपको संभाल रखा है यह उनकी जीवटता और साहस का ही परिणाम है। एक बंद सुरंग में जिसके एक ओर पहाड़ और दूसरी ओर पहाड़ का मलबा हो उसके बीच जिन्दा रहने का हौसला रख पाना ही कोई सामान्य साहस की बात नहीं है। आश्चर्यजनक रूप से वो सभी पूर्ण स्वस्थ दिख रहे हैं।

इसमें कोई दो राय नहीं कि केन्द्र सरकार ने वहां फंसे कामगारों को सुरक्षित बचाने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ रखी है। चोटी के एक्सपर्ट और समूची प्रशासनिक मशीनरी जो संभव है वह कर रही है। इसके लिए न तो खर्च की परवाह की जा रही है और न ही संसाधनों की। जैसे भी हो, उन 41 कामगारों को जीवित बाहर निकालने की जद्दोजहद जारी है।

लेकिन प्रकृति के सामने इंसानी प्रगति की अपनी सीमाएं हैं। भारत में ऐसे न जाने कितने किस्से लोक में प्रचलित हैं जब कहीं कोई देवता या फिर साधु संत नाराज हो गये तो वहां पूरी कोशिश के बाद भी वह काम नहीं किया जा सका। ऐसा ही एक किस्सा लखनऊ का है जो नींब करौरी बाबा से जुड़ा हुआ है। पचास के दशक में लखनऊ में गोमती नदी के तट पर उन्होंने एक संकटमोचन हनुमान मंदिर बनवा दिया था। नदी में बाढ़ आयी को शासन ने मंदिर को दोषी मानते हुए बाढ़ के पानी से प्रशासनिक भवनों को खतरा बता दिया।

प्रशासन ने पूरी कोशिश की कि वह मंदिर वहां से हट जाए। इसके लिए सरकार ने 25 हजार रूपये नकद मंदिर को दान भी दिया लेकिन नींब करौरी बाबा ने साफ कह दिया कि मंदिर नहीं हटेगा, गोमती मैया चाहें तो बहा ले जाएं। इसी बीच उसी जगह से थोड़ा आगे मंकी सेतु के बगल में एक नया सेतु बनाने का प्रस्ताव हुआ। इसे बनाने का ठेका मुंबई के एसबी जोशी को मिला। पुल बनना शुरु तो हुआ लेकिन व्यवधान बहुत आने लगा। सारी तकनीकी दक्षताएं जवाब देने लगी। उधर ठेकेदार जोशी का बेटा भी गंभीर बीमार हो गया।

ऐसे में किसी ने उन्हें सलाह दी कि अगर वो उस मंदिर वाले बाबा से मिलें तो हो सकता है उनकी समस्याओं का समाधान हो जाए। जोशी नींब करौरी बाबा से मिले तो बाबा ने न सिर्फ पुल बन जाने का आशीर्वाद दिया बल्कि वह 25 हजार रूपया भी दे दिया जो प्रशासन से उन्हें मंदिर हटाने के लिए मिला था। बाबा ने कहा कि बाकी पैसे अपनी ओर से लगाकर सेतु के बगल में हनुमान जी का एक मंदिर बनवा देना। पुल तो बना ही आज गोमटी तट और सेतु वाला मंदिर दोनों मौजूद हैं। उस पुल का नाम भी हनुमान सेतु कर दिया गया। हनुमान सेतु वाला मंदिर आज लखनऊ की पहचान में शामिल है और उसे एक सिद्ध मंदिर के रूप में लोक मान्यता मिली हुई है।

जहां तक पहाड़ की बात है तो वहां तो जगह जगह सिद्ध योगी ही निवास करते हैं। पहाड़ के लोकमानस में देवी देवता उनके आराध्य नहीं बल्कि मालिक हैं। वो जो कुछ करते हैं उससे पहले अपने देवता की अनुमति लेते हैं। ऐसे में इसे सिर्फ संयोग के रूप में ही नहीं देखा जाना चाहिए कि बाबा बौखनाथ का अस्थाई मंदिर बना देने के बाद राहत एवं बचाव कार्य सुगम होने लगा। पहाड़ के लिए यह एक यथार्थ है और इससे वहां कोई इंकार नहीं करता। अच्छा यह है कि साइंटिफिक और इंजीनियरिंग दिमाग वालों को भी यह बात दिखावे के लिए ही सही समझ में आयी है।

उम्मीद करनी चाहिए स्थानीय लोक देवता बाबा बौखनाथ 41 लोगों के परिवारों को निराश नहीं करेंगे और जल्द से जल्द उन सबको सुरक्षित बाहर निकालने का रास्ता सुझाएंगे जो इस समय सुरंग में फंसे हुए हैं। यही सच्चे अर्थों में बाबा बौखनाथ की जय होगी और सही संदेश भी कि विकास के नाम पर पहाड़ और पहाड़ की मान्यताओं से खिलवाड़ कितना भारी पड़ सकता है।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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