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Rishi Sunak: ब्रिटेन को आर्थिक संकट से उबारने की उम्मीद हैं ऋषि सुनक

Rishi Sunak: भारत के पवित्र त्यौहार दीपावली पर भारतीय मूल के हिन्दूवंशी ऋषि सुनक ग्रेट ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री बन गए। बनना तो उनको पांच सितंबर को ही था। तब बोरिस जॉनसन के इस्तीफे के बाद कंजरवेटिव पार्टी में नए नेता को लेकर चुनाव हुआ। तब इस दक्षिणपंथी पार्टी के अंदर नस्लवाद की नकारात्मकता बड़ा मुद्दा बना। अर्थवेत्ता सुनक हार गए। लिज ट्रस जीत गईं। तब सुनक जरूरी सौ सांसदों का समर्थन नहीं जुटा पाए थे। लेकिन ट्रस की वह जीत 45 दिनों में ही हार में तब्दील हो गई।

UK PM rishi Sunak generates hope for Britain

क्योंकि ब्रिटेन को फिलहाल नस्लवाद के अहंकार की रक्षा की नहीं बल्कि आर्थिक हालत में बदलाव की आवश्यकता है। ऋषि सुनक के प्रधानमंत्री बनते ही यूके के शेयर बाज़ार में लंबे समय के बाद आए भारी उछाल ने यह बात समझा दी है। अब पीएम सुनक को साबित करना है कि वह वास्तव में ब्रिटेन के तारणहार बन पाते हैं या नहीं।

ब्रिटेन की आर्थिक स्थिति खराब है। नया निवेश नहीं आ रहा। आर्थिक सुधार के प्रयास में कॉमनवेथ गेम्स तक उपयोगी साबित नहीं हो पाया। अन्य आर्थिक बूस्टर के उपाय विफल हुए जा रहे हैं।

पिछली सदी तक जिसका सूरज कभी अस्त नहीं होता था उस उपनिवेशवादी देश यूनाइटेड किंगडम की ऐसी दुर्दशा होगी, किसी ने सोचा तक नहीं था। एक तो कोविड से दुनिया को मिला कोरोना महामारी का अभिशाप। ऊपर से 2020 में यूके के यूरोपीय यूनियन से बाहर आने के फैसले ने गोरों के देश की आर्थिक कमर तोड़ रखी है।

रूस यूक्रेन युद्ध ने ज़ख्म पर नमक छिड़कने का काम किया है। समूचे यूरोप की इकोनॉमी को भंवर में फंसा रखा है और यूनाइटेड किंगडम में निराशा का माहौल है।

नए प्रधानमंत्री ऋषि सुनक कंजरवेटिव पार्टी में पूर्व प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर की उन्मुक्त आर्थिक नीतियों के अध्येता और प्रशंसक हैं। बोरिस जॉनसन की सरकार में वित्त मंत्री थे। पांच जुलाई को उनको मुक्कमल तौर पर लगा कि पीएम जॉनसन की नीतियां ब्रिटेन को आर्थिक गर्त में डूबने से बचा नहीं सकती तो वह इस्तीफा देकर अलग हो गए।

उनके पीछे अन्य मंत्रियों के इस्तीफे का तांता लग गया। जॉनसन को मजबूर होकर इस्तीफा देना पड़ा और भारतीय मूल के ब्रिटेन के प्रधानमंत्री होने की नींव पड़ गई।

ब्रिटेन में पड़ोसी पाकिस्तान और बांग्लादेशियों को मिलाकर भारतवंशियों की कुल आबादी पांच फीसदी है। इस अल्पसंख्यक आबादी के बीच से किसी का प्रधानमंत्री बन जाना किसी चमत्कार से कम नहीं। खासकर तब जब उसी देश के उपनिवेशवादी मानते रहे हों कि भारतीयों में राज काज चलाने की क्षमता नहीं है।

पीएम सुनक को अगले 18 महीनों में साबित करना है कि उनके नेतृत्व में कंजरवेटिव पार्टी ही बेस्ट है। उनके सीमित कार्यकाल में ही ब्रिटेन में अगला चुनाव होना है। नए पीएम मेगा आईटी कंपनी इन्फोसिस के मालिक नारायण मूर्ति और सुधा मूर्ति के दामाद हैं। इनकी पत्नी अक्षिता मूर्ति साढ़े चार सौ करोड़ डॉलर के पारिवारिक संपदा की मालकिन हैं।

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उनके जरिए भारत की आजादी के 75वें वर्ष में दुनिया वालों ने हमारी अव्वल कूटनीतिक समझ और नेतृत्व गुण पर भरोसा किया है। यह अद्भुत संयोग है कि ब्रिटेन वालों ने यह फैसला उस वक्त किया है, जब दीपावाली की अतिशबाजियां चल रही थीं।

ब्रिटिश पीएम ऋषि सुनक के दादा रामदास सुनक गुजरांवाला से क्लर्क का काम करने 1935 नैरोबी शिफ्ट हुए। दिल्ली से दादी सुहाग रानी सुनक 1937 नैरोबी पहुंची। ऋषि के पिता यशवीर सुनक का जन्म केन्या में हुआ लेकिन वो 1960 में ब्रिटेन आ बसे और पेशे से जनरल फिजिशियन हैं। मां ऊषा सुनक फार्मिस्ट और जन्म से तंजानियाई हैं।

ऋषि सुनक का पैतृक घर गुजरांवाला (वर्तमान पाकिस्तान) में हैं। इसलिए अविभाजित भारत में गुजरांवाला से होने की वजह से भारतीय अपना, तो केन्या के लोग इनके दादा की वजह से अपना मानते हैं। मूल जो हों पर पेशे से दो चिकित्सक दंपति यशवीर और ऊषा सुनक की संतान पीएम ऋषि सुनक ब्रिटिश नागरिक हैं। मतलब एक वैश्विक नागरिक को आर्थिक मुश्किल के दौर में फंसे ग्रेट ब्रिटेन के सांसदों ने बड़े उम्मीद से अपना प्रधानमंत्री चुना है।

नाम के अनुरूप ऋषि ब्रिटेन के लिंकन कॉलेज से दर्शनशास्त्र के गंभीर छात्र रहे हैं। राजनीति और इकोनॉमिक्स की पढ़ाई की है। मशहूर स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय से स्कॉलरशिप पर एमबीए की डिग्री हासिल की है। गोल्डमैन सैस जैसे इन्वेस्टमेंट फर्म में नौकरी की। कोविड के मुश्किल दौर में ब्रिटेन ट्रेजरी के मुख्य सचिव की प्रशंसनीय जिम्मेदारी निभाई है।

कूटनीति और राजनीति में भारतीय मूल के लोगों का दिमाग अव्वल है, यह अकेले ग्रेट ब्रिटेन ही नहीं दुनिया मानती है। आज महज़ कैरेबियन मुल्क ही नहीं 30 से ज्यादा मुल्कों की सरकार में भारतीय मूल के लोग महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वो जहां हैं वहां रहकर उस देश को बेहतर बनाने का प्रयास कर रहे हैं। ब्रिटेन के राजा चार्ल्स से भी अधिक संपत्ति रखनेवाले ऋषि सुनक को भी अब ब्रिटेन की बिगड़ती आर्थिक स्थिति को सुधारकर अपने आप को साबित करना है।

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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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