IAS Lokhande Prashant Sitaram कौन हैं? CBSE के नए चेयरमैन बने, गृह मंत्रालय से सीधा लिंक!
CBSE New Chairman IAS Lokhande Prashant Sitaram: केंद्र सरकार ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया है। CBSE चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता को मंगलवार (2 जून 2026) को अचानक तबादला कर दिया गया। इस फैसले के पीछे कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षा में लागू की गई नई डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली (On-Screen Marking - OSM) में कथित अनियमितताओं और व्यापक छात्र शिकायतों को मुख्य वजह माना जा रहा है।
सरकार ने राहुल सिंह के स्थान पर गृह मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव IAS लोखंडे प्रशांत सीताराम को CBSE का नया चेयरमैन नियुक्त किया है। यह बदलाव शिक्षा मंत्रालय और पूरे देश के छात्र-छात्राओं के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि CBSE देश की सबसे बड़ी शिक्षा बोर्डों में से एक है।

CBSE क्या है? समझें इसके महत्व को
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अधीन कार्यरत स्वायत्त संस्था है। यह देशभर के हजारों स्कूलों में कक्षा 10 और 12 की बोर्ड परीक्षाएं आयोजित करती है। लगभग 1.8 करोड़ से ज्यादा छात्र-छात्राएं इससे जुड़े हैं। CBSE का पाठ्यक्रम (Curriculum), परीक्षा पैटर्न और मूल्यांकन प्रक्रिया पूरे देश में मानक माने जाते हैं।
यह बोर्ड न सिर्फ स्कूली शिक्षा बल्कि NEP 2020, डिजिटल शिक्षा और मूल्यांकन सुधारों का भी अग्रणी है। CBSE के फैसले लाखों छात्रों के भविष्य, कॉलेज एडमिशन और करियर को सीधे प्रभावित करते हैं।
IAS Rahul Singh का Transfer क्यों? OSM विवाद की पूरी कहानी समझें..
राहुल सिंह (1996 बैच IAS, बिहार कैडर) CBSE चेयरमैन के पद पर थे। हाल ही में उन्हें दो साल का एक्सटेंशन भी मिला था, लेकिन कक्षा 12 की 2026 परीक्षाओं के बाद स्थिति बदल गई।
CBSE ने इस साल पहली बार पूर्ण रूप से On-Screen Marking (OSM) सिस्टम लागू किया। लगभग 98 लाख उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर डिजिटल रूप से मूल्यांकन किया गया। लेकिन परिणाम घोषित होने के बाद (13 मई 2026) बड़े पैमाने पर शिकायतें आईं:
- स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाएं धुंधली (blurry)।
- कई पृष्ठ गायब।
- मूल और डिजिटल कॉपी में Mismatch।
- अचानक पास प्रतिशत में गिरावट (88.39% से घटकर 85.2%)।
- री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया में भी दिक्कतें।
छात्रों और अभिभावकों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए। सोशल मीडिया पर वायरल मामलों में युवा साइबर सुरक्षा शोधकर्ताओं ने टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताएं और सिक्योरिटी वल्नरेबिलिटीज़ (जैसे हार्ड-कोडेड पासवर्ड) उजागर कीं। ठेकेदार कंपनी Coempt EduTeck पर favoritism के आरोप लगे। सरकार ने एक सदस्यीय जांच समिति (S Radha Chauhan के नेतृत्व में) गठित की। इसी विवाद के चलते राहुल सिंह (Rahul Singh) और हिमांशु गुप्ता (Himanshu Gupta) को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया। शिक्षा मंत्री ने छात्रों को असुविधा के लिए जिम्मेदारी ली और री-इवैल्यूएशन का आश्वासन दिया।
Who Is IAS Lokhande Prashant Sitaram: लोखंडे प्रशांत सीताराम कौन हैं? कितने अनुभवी?
लोखंडे प्रशांत सीताराम (जन्म: 20 नवंबर 1973) AGMUT कैडर (2001 बैच) के अनुभवी IAS अधिकारी हैं। वे वर्तमान में गृह मंत्रालय, नई दिल्ली में अतिरिक्त सचिव के पद पर कार्यरत हैं (1 अप्रैल 2026 से)।
शैक्षणिक योग्यता
- बीई (मैकेनिकल इंजीनियरिंग) : पुणे विश्वविद्यालय।
- स्नातकोत्तर डिप्लोमा (इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग) : NITIE मुंबई।
करियर हाइलाइट्स:
- संयुक्त सचिव, निदेशक, उप सचिव, निजी सचिव, परामर्शदाता, उपायुक्त और सचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य अनुभव।
- गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के रूप में आंतरिक सुरक्षा, सीमा प्रबंधन, आपदा प्रबंधन और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े काम।
- दो बार सराहनीय सेवा के लिए राज्य पुरस्कार (स्वर्ण) से सम्मानित।
- भाषाएं: अंग्रेजी, हिंदी और मराठी में पूर्ण प्रवीणता।
उनका इंजीनियरिंग बैकग्राउंड और प्रशासनिक अनुभव उन्हें डिजिटल सुधार, प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने और बड़े संगठनों के प्रबंधन के लिए उपयुक्त बनाता है। गृह मंत्रालय जैसी संवेदनशील मंत्रालय में काम करने का अनुभव उन्हें सख्ती से सुधार लागू करने में मदद करेगा।
यह नियुक्ति क्यों महत्वपूर्ण?
- डिजिटल सुधारों पर फोकस: लोखंडे का टेक्निकल बैकग्राउंड OSM जैसी डिजिटल प्रणालियों को और बेहतर बनाने में कारगर साबित हो सकता है।
- स्थिरता और विश्वसनीयता: विवाद के बाद CBSE को नई ऊर्जा और विश्वसनीय नेतृत्व की जरूरत थी।
- गृह मंत्रालय का लिंक: केंद्र सरकार की कई योजनाएं (विशेषकर सुरक्षा और प्रशासनिक) शिक्षा से जुड़ी हैं। उनका अनुभव CBSE को और बेहतर समन्वय बनाने में मदद करेगा।
- छात्र-केंद्रित सुधार: उम्मीद है कि वे री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया को तेज करेंगे, पारदर्शिता बढ़ाएंगे और भविष्य में OSM सिस्टम को मजबूत बनाएंगे।
CBSE के सामने चुनौतियां
नए चेयरमैन को कई चुनौतियों का सामना करना होगा:
- OSM सिस्टम की कमियों को दूर करना।
- छात्रों का विश्वास बहाल करना।
- NEP 2020 के तहत पाठ्यक्रम सुधार जारी रखना।
- री-इवैल्यूएशन और फोटोकॉपी प्रक्रिया को आसान बनाना।
- बोर्ड परीक्षाओं की गोपनीयता और सिक्योरिटी सुनिश्चित करना।
एक नई शुरुआत?
IAS लोखंडे प्रशांत सीताराम की नियुक्ति CBSE के लिए नई शुरुआत का प्रतीक है। राहुल सिंह के कार्यकाल में डिजिटलीकरण की दिशा में बड़े कदम उठाए गए, लेकिन क्रियान्वयन में कमियां सामने आईं। अब लोखंडे के इंजीनियरिंग माइंड और प्रशासनिक अनुभव से उम्मीद है कि CBSE और अधिक पारदर्शी, कुशल और छात्र-अनुकूल बनेगा। लाखों छात्रों की किस्मत इससे जुड़ी है। नए चेयरमैन से पूरे देश की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि वे विवाद को कितनी जल्दी समाप्त कर बोर्ड को नई ऊंचाइयों पर ले जाते हैं।













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