The Kerala Story: तीव्र वादम्, लव जिहादम्

मलयालम इतनी संस्कृतनिष्ठ भाषा है कि उसमें जिहाद शब्द के लिए जगह नहीं है। मानों उन्हें लगता है कि इससे उनकी भाषा अपवित्र हो जायेगी। इसलिए वो जिहाद के लिए तीव्रवाद शब्द प्रयोग करते हैं।

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मलयालम भाषा में संस्कृत का इतना गहरा प्रभाव है कि क्रूरता या हिंसा न उनकी भाषा में है और न उस भाषा को बोलने वालों के स्वभाव में। अगर वहां की नर्सें देश दुनिया में अपने सेवाभाव से प्रशंसा पा रही हैं तो इसका अर्थ यह भी है कि सेवा भाव उनके स्वभाव में है। संभवत: इसी सेवाभाव और विनम्रता को प्रदर्शित करने के लिए केरल सरकार ने कभी केरल को 'गॉड्स ओन कन्ट्री' (God's own Country) बताकर उसका प्रचार किया था।

वह 2009-10 का समय था। केरल टूरिज्म का गॉड्स ओन कन्ट्री वाला श्लोगन पूरे उत्तर भारत में मशहूर हो गया था। लेकिन इसी समय एक पर्चा जो अंग्रेजी में लिखा हुआ था, वह भी इंटरनेट पर तैरता हुआ उत्तर भारत तक पहुंचा था। वह पर्चा केरल के सेवा भाव की नहीं बल्कि मजहबी कट्टरता और क्रूरता की कहानी कहता था। इस पर्चे में लव जिहाद नामक किसी योजना की चर्चा की गयी थी और बताया गया था कि हिन्दू धर्म की लड़कियों को लव जिहाद में फंसाने के लिए केरल में कैसे काम किया जा रहा है।

यह पर्चा किसने बनाया, पता नहीं। फिर भी एकबारगी पर्चे पर लिखी गयी बातों पर यकीन करना मुश्किल था। उस समय आज के जैसा सोशल मीडिया प्रभावी नहीं था। बहुत कम लोग इस पर सक्रिय थे। फिर भी जो कोई इस पर्चे को सोशल मीडिया पर शेयर करता तो उसको कहा जाता कि वह नफरत फैला रहा है। लव जिहाद जैसी कोई बात नहीं है। ये सब आरएसएस वालों का प्रोपेगेण्डा है जो हिन्दू मुस्लिम को बांटना चाहते हैं।

लेकिन आज एक दशक बाद अब धूल झड़ चुकी है। इन दस बारह सालों में केरल से लेकर कश्मीर तक ऐसी सैकड़ों या फिर हजारों कहानियां सामने आ चुकी हैं जिसमें मुस्लिम समुदाय के नौजवान ने किसी हिन्दू, सिख, जैन या फिर ईसाई लड़की के साथ प्रेम के नाम पर धोखाधड़ी की। उसे इस्लाम कबूल करवाया और उससे निकाह किया। कई मामलों में यातना प्रताड़ना के अनगिनत किस्से भी रिकार्ड पर हैं। उत्तर भारत के कुछ भाजपा शासित राज्यों जिसमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश शामिल हैं उन्होंने अपने यहां सिर्फ धर्मांतरण के लिए होने वाले विवाह को रोकने वाले कानून भी बना दिये। लेकिन उत्तर आने से पहले फिर लौटते हैं केरल की तरफ।

2009-10 में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया का जोर केरल में बढ़ रहा था। प्रतिबंधित स्टूडेण्ट इस्लामिक मूवमेन्ट ऑफ इंडिया से पैदा हुआ पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया घोषित तौर पर भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने के लिए काम कर रहा था। इसके लिए उसने तीव्रवाद (जिहाद) का रास्ता चुना था जिसके लिए हरी वर्दी वाली एक मिलिशिया भी तैयार कर रहा था। जो तस्वीरें सामने आयीं उसमें कोट्टयम और इदुक्की सीमा पर पीएफआई द्वारा सशस्त्र संघर्ष का प्रशिक्षण दिया जा रहा था। उस समय ये तस्वीरें एक से दो साल पुरानी बतायी गयी थीं।

यही वह समय था जब केरल पुलिस के एक तेजतर्रार अफसर रहे लोकनाथ बेहरा को 2009 में एनआईए में शामिल किया गया। लोकनाथ बेहरा की प्रतिभा को देखते हुए उन्हें एनआईए में टेरर फंडिग को पकड़ने का काम सौंपा गया था। लोकनाथ बेहरा को बड़ी सफलता उसी केरल में मिली जहां की पुलिस में वो अपनी सेवाएं देकर आये थे। 2012 में एनआईए ने केरल में जाली नोटों के एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया। इस जांच पड़ताल में एनआई के सामने यह बात उभरकर सामने आयी कि केरल आतंकवाद का सिरमौर राज्य बन चुका है।

यह वही दौर था जब सीरिया और अफगानिस्तान में अलग अलग इस्लामिक समूहों द्वारा जिहाद की जंग लड़ी जा रही थी। अब शायद ही किसी को याद हो लेकिन उस समय वह घटना राष्ट्रीय चर्चा का विषय बनी थी जब 2015 में यूएई से केरल के चार नौजवानों को डिपोर्ट किया गया था जो यूएई के रास्ते सीरिया जिहाद के लिए जा रहे थे। इन्होंने ही बताया कि वो सिर्फ चार नहीं है। ऐसे 22 लोग अलग अलग तरीके से जिहाद के लिए सीरिया जा चुके हैं जिनमें 6 महिलाएं भी हैं। वो सब आईएसआईएस की ओर से लड़ने के लिए गये हैं।

2012 से 2018 के बीच ऐसी कई घटनाएं सामने आयीं जिसमें केरल में इस्लामिक आतंकवाद की जड़ें मजबूत होने के सबूत मिले। यहां एक बात और महत्वपूर्ण थी। माओवादी और पीएफआई केरल में एक दूसरे से गठजोड़ कर चुके थे। कुछ माओवादी बाद में पुलिस एनकाउण्टर में मारे भी गये। खैर, लोकनाथ बेहरा जब डीजीपी बनकर दोबारा केरल लौटे तो उन्होंने इस्लामिक आतंकवाद को खत्म करने के लिए सघन अभियान चलाया। एन्टी टेररिस्ट फोर्स का गठन किया जिसे लोकनाथ बेहरा भारत की सबसे बेहतरीन एटीएस में से एक मानते हैं। 2021 में जब वो रिटायर हुए तो उन्होंने राज्य में इस्लामिक आतंकवाद के होने का जिक्र तो किया लेकिन साथ में यह भी कहा कि केरल पुलिस की सक्रियता के कारण अब इसमें कमी आ रही है।

लेकिन यह तो इस्लामिक आतंकवाद का वह हिस्सा है जो पुलिस से लेकर एनआईए तक की जांच का हिस्सा रहा। वह हिस्सा जिसे लव जिहाद कहा गया, वह न तो पुलिस की जांच का विषय बना और न एनआईए की जांच का। ऐसा भी नहीं था कि राज्य में लव जिहाद सिर्फ आईएसआईएस या तालिबान की लड़ाई में भेजने के लिए तैयार किये जा रहे थे। यह ज्यादा व्यापक षड्यंत्र था जिसके जरिए अंतत: राज्य में मुस्लिम जनसंख्या वृद्धि दर को 12 प्रतिशत के ग्रोथ से भी ऊपर ले जाना था। अथिरा की कहानी किसी आइसिस में जाकर जिहादी बनने की कहानी तो नहीं थी। लेकिन उसके होम्योपैथी कालेज में उसे पीएफआई के लोगों ने ही जाल बिछाकर लव जिहाद में फंसाया और 2017 में उसका केस पीएफआई ने सुप्रीम कोर्ट तक लड़ा। सुप्रीम कोर्ट में पीएफआई के पैसे पर कपिल सिब्बल से लेकर हर नामी वामी वकील अथिरा के हादिया बन जाने को जायज ठहराने के लिए खड़ा था।

2021 में पहली बार एक सिरियन मालाबर कैथोलिक आर्चबिशप पलाई ने साफ तौर पर आरोप लगाया कि राज्य में बहुत व्यवस्थित तरीके से लव जिहाद चल रहा है। उन्होंने इसे मलयालम में तीव्रवाद (जिहाद) कहते हुए बताया कि एक खास समुदाय द्वारा हिन्दू और ईसाई लड़कियों का मष्तिष्क प्रक्षालन (माइंड वाश) किया जाता है। उन्होंने कहा "अगर कोई ये मानता है कि केरल में लव जिहाद नहीं है तो वह अपनी आंखों को बंद करके चारों ओर अंधेरा समझना चाहता है। जो लोग इसके न होने की बात करते हैं उनका कोई न कोई लाभ है। फिर चाहे वह लाभ राजनीतिक हो या कुछ और।"

बिशप पलाई ने कहा कि "यह लव नहीं है, यह लड़ाई करने का एक तरीका है। वो सीधे तौर पर केरल में जिहाद नहीं कर सकते इसलिए उन्होंने ये तरीका चुना है।" इसके साथ ही उन्होंने नारकोटिक्स जिहाद की बात भी कही कि बहुत सुनियोजित तरीके से (हिन्दू और ईसाई) नौजवानों को ड्रग्स के जाल में फंसाया जा रहा है। जूस और सॉफ्ट ड्रिंक के माध्यम से नौजवानों को नारकोटिक्स दिया जा रहा है।" बिशप पलाई ने ये भी कहा कि केरल में इसके लिए एक हलाल अर्थव्यवस्था खड़ी की गयी है जिसके जरिए इन कामों के लिए पैसा इकट्ठा किया जाता है। बिशप पलाई की शिकायत थी कि इतना सब होने के बाद भी केरल की मीडिया इसको रिपोर्ट नहीं करती।

केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के लिए ये मानना सचमुच कठिन होगा कि कोई जिहाद के लिए लव करता होगा। आखिर उनकी अपनी तलाकशुदा बेटी वीणा ने भी 2020 में मोहम्मद रियास से मैरिज किया है। हो सकता है उनकी सॉफ्टवेयर इंजिनियर बेटी ने कॉमरेड रियास से मैरिज करने से पहले इस्लाम कबूल न किया हो या यह भी हो सकता है कि कॉमरेड मोहम्मद रियास खुद इस्लाम को अफीम मानकर त्याग कर चुके हों। लेकिन वीणा की कहानी केरल की कहानी तो नहीं है।

इसी दौर में दर्जनों ऐसे मामले सामने आये हैं जब कई हिन्दू लड़कियां रजिस्ट्रार ऑफिस पहुंची है अपना धर्म बदलने की सूचना देने के लिए। उनको अपना धर्म बदलकर इस्लाम इसलिए स्वीकार करना पड़ा है ताकि वह उससे निकाह कर सकें जिससे उनको मोहब्बत है। इनकी कहानी निमिषा या सोनिया सेबेस्टियन जैसी भले न हो कि उन्हें इस्लामिक जिहाद में उतारा जाए लेकिन विवाह के लिए धर्म बदलने की अनिवार्य इस्लामिक शर्त का पालन तो ये भी कर रही हैं। फिर वो किसी साधारण नागरिक विजयन की बेटी पीवी विद्या हो, या फिर मोहनन पिल्लई की बेटी दिव्या हो। गोपीनाथन पिल्लई की बेटी कृष्णा प्रिया हो या प्रदीपन की बेटी उत्थरा हो। ये सब अपना परिवार, धर्म, समाज छोड़कर सिर्फ इसलिए जा चुकी हैं क्योंकि इन्हें किसी मोमिन से निकाह करना था।

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    इसलिए केरला स्टोरी सिर्फ उन लड़कियों की कहानी भर नहीं है जो आईएसआईएस ज्वाइन कर लेती हैं। केरला स्टोरी उन सैकड़ों हजारों लड़कियों की कहानी भी है जो निकाह के नर्क में छलांग लगा रही हैं बिना कुछ जाने, बिना कुछ समझे। एक फिल्म से तो उस अतुल्या अशोकन की जिन्दगी पर भी कोई फर्क कहां पड़ता है जिसने अभी कुछ दिन पहले ही इस्लाम कबूल करके रिसाल मंसूर से निकाह कर लिया और बड़े गर्व के साथ इंस्टाग्राम पर वह निकाहनामा भी शेयर कर रही है जिसमें उसे दयापूर्ण मेहर देने का वादा किया गया है। ये मेहर क्या होता है और इस्लामिक निकाह में इसे किसी लड़की को देने का वादा क्यों किया जाता है, उसे इसकी बुनियादी जानकारी भी नहीं होगी। लेकिन कभी सिर पर दुपट्टा न रखनेवाली अतुल्या अशोकन निकाह के बाद बड़े गर्व से हिजाब की पाबंद जरूर हो गयी है।

    (इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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