Startups in India: जोश के साथ होश भी रखें तो सफल होंगे भारतीय स्टार्टअप्स
Startups in India: आईटी में भारतीय इंजीनियरों के बढ़ते वर्चस्व से भारत में स्टार्टअप इकोसिस्टम का तेजी से विस्तार हुआ है। दुनिया के स्तर पर यूनिकॉर्न की सूची में भारत, अमेरिका और चीन के बाद तीसरे स्थान पर है। इंग्लैंड का नंबर भारत के बाद आता है।

हुरून ग्लोबल यूनिकॉर्न इंडेक्स 2022 की रिपोर्ट के अनुसार इस साल की पहली छमाही में भारत ने 14 नए यूनिकॉर्न जोड़े जिसके साथ कुल यूनिकॉर्न की संख्या 68 हो गई। भारत में लगभग 105 स्टार्ट-अप ने 2018 से 2022 के बीच यूनिकॉर्न का दर्जा प्राप्त किया था, लेकिन पिछले पांच वर्षों में कई भारतीय स्टार्ट-अप ने अपना यूनिकॉर्न दर्जा खोया भी है।
हाल ही में आपने बायजू को लेकर कार्ति चिदंबरम का एक पत्र सोशल मीडिया में पढ़ा होगा। चिदंबरम का प्रश्न बायजू के वित्तीय लेखों के प्रस्तुतीकरण को लेकर था जिसका जवाब तो खुद समय दे देगा लेकिन भारत के स्टार्टअप कमोबेश इसी तरह की चुनौतियों से जूझ रहें हैं।
ओवर वैल्यूएशन एवं जरुरत से ज्यादा आग्रही और आक्रामक होना भी स्टार्टअप की लंबी उम्र में बाधा बन रहा है। फंडिंग मिलने के कारण बहुतों का लक्ष्य लाभ कमाने से ज्यादा नुकसान होने पर भी केवल विस्तार और फंडिंग पर है। बायजू भारत की सबसे बड़ी यूनिकॉर्न है लेकिन वह भी घाटे में है। ओयो हो, उड़ान हो या फ्लिपकार्ट हो सब अभी घाटे में ही हैं।
कुपोषण का शिकार बनते स्टार्टअप आइडिया
आज देश में हर रोज युवाओं के मन में स्टार्टअप आईडिया जन्म लेता है। जानकारी के अभाव और इकोसिस्टम का पोषण न मिल पाने के कारण स्टार्टअप आईडिया कुपोषण का शिकार हो वहीं दम तोड़ देता है। ऐसा नहीं है कि देश में सिर्फ 100 यूनिकॉर्न बनने की क्षमता है।
अगर युवाओं के इन सपनों को पर्याप्त इकोसिस्टम और मार्गदर्शन दे दिया जाय तो यूनिकॉर्न इस एक सैकड़े से कई गुना हो सकते हैं। ऐसे में भारत से कोई पराग अग्रवाल या सुंदर पिचाई अमेरिका नहीं जायेगा। विदेशियों के लिये भारत आकर नौकरी करना आकर्षक हो जायेगा। इसके लिये भारतीय युवाओं को जानना चाहिये कि स्टार्टअप इकोसिस्टम में क्या क्या शामिल है और कैसे इसकी शुरुआत करनी चाहिये।
शुरू में उद्यमी अपने खुद के धन, या मित्रों, रिश्तेदारों से या फिर क्राउड फंडिंग के माध्यम से निवेश जुटा सकता है। उनसे वह कुछ न्यूनतम शेयर या फंडिंग आने पर ब्याज सहित लौटाने का अनुबंध कर सकता है। इसे सीड फंडिंग कहते हैं। सीड फंडिंग प्रदान करने के लिए कुछ एंजेल इन्वेस्टर्स और प्लेटफॉर्म भी उपलब्ध हैं। उद्यमी उनसे भी संपर्क कर सकते हैं। उद्यमियों को निवेशकों में दिलचस्पी जगाने के लिए यदि लाभ हानि के कुछ आंकड़े सामने रख दिये जायें तो निवेश में आसानी होती है। यदि उसने अपने आईडिया पर पहले से ही कुछ काम कर लिया है तो निवेशक आसानी से तैयार हो जाते हैं।
सीड फंडिंग और बिजनेस में कुछ आंकलन के बाद सीरीज ए फंडिंग के लिए वेंचर कैपिटलिस्ट/प्राइवेट इक्विटी फंड्स को फंडिंग के लिए संपर्क कर सकते हैं।
इसके बाद फंडिंग के कई सीरीज जैसे की बी, सी, डी आदि होते हैं जो आगे की सीरीज के साथ ग्रोथ स्टेज फंडिंग के रूप में जाने जाते हैं। ऐसे निवेशकों को एंजल इंवेस्टर, वेंचर कैपिटलिस्ट, प्राइवेट इक्विटी, मेंटर्स, इनक्यूबेटर्स आदि बोला जाता है।
इनकी विस्तृत जानकारी इंटरनेट से जुटाई जा सकती है। ये निवेशक निवेश के साथ व्यवसाय को बढ़ाने के लिए तकनीकी, कानूनी, प्रबंधकीय साथ में मार्केटिंग कौशल भी प्रदान करते हैं। आपने देखा होगा कि कई स्टार्टअप भारी नुकसान में हैं फिर भी निवेशक पैसा लगाते हैं क्योंकि निवेशक वर्तमान से ज्यादा भविष्य को महत्व देते हैं।
निवेशक व्यवसाय को अपनी नज़रों से और डिस्काउंटेड कैश फ्लो विधि पर तथा आपके बिजनेस मॉडल, टीम और अब तक के प्रदर्शन के आधार पर मूल्यांकन करते हैं। इसलिये यदि वर्तमान में हानि है तो भी निवेशक तैयार होते हैं। भारत में एक समय 105 स्टार्टअप ने यूनिकॉर्न का तमगा हासिल किया है, मतलब प्रत्येक का मूल्यांकन 7500 करोड़ से ज्यादा का है और उसमें से तो कई अभी भी नुकसान में चल रहें हैं।
जानकारी के लिये गूगल के साथ www.startupindia.gov.in, पर भी जाया जा सकता है। यह भारत सरकार की अच्छी पहल है। यहां स्टार्टअप के लिये कई मुफ्त संसाधन और ज्ञान प्राप्त हो जाता है। इसमें कैसे एक स्टार्टअप बनाया जाए और वित्त पोषण सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ उठाया जाए, नेटवर्किंग की जाए इत्यादि की जानकारी मिल जाती है।
आजकल तो स्टार्टअप रियलिटी शो भी आने लगे हैं जहां उद्यमी का आईडिया क्लिक होने पर तत्काल निवेश मिलता है। शार्क टैंक नवोदित उद्यमी के स्टार्टअप के लिए एक प्रसिद्ध यूएस टीवी श्रृंखला है, जो सोनी टीवी के माध्यम से भारत में भी आई थी।
इकलौता इश्क होना चाहिए स्टार्टअप
हालांकि निवेशक चुनने में अक्सर भारतीय युवा चूक कर जाते हैं। स्टार्ट अप के निवेशक भी स्टार्ट अप के माइंड सेट के ही होने चाहिये। निवेशक उद्यमी का बिजनेस और उसके आईडिया के प्रति पागलपन ही देखता है। इसलिये फंडिंग पाने वाले स्टार्टअप के फाउंडर आपको उस आईडिया के प्रति दीवाने जैसे दिखते हैं। अगर आपका स्टार्टअप आपका साइड बिजनेस है तो निवेशक नहीं आते हैं।
दरअसल स्टार्टअप की पहली शर्त है इकलौता इश्क और वो भी इकलौते इश्क की तरह बेइंतहा पागलपन। सम्पूर्ण फोकस, इकलौता इश्क और 24 घण्टे मेहनत स्टार्टअप की पहली शर्त होती है। अगर आप इस इकलौते इश्क में डूब गये तो आपकी सफलता असंदिग्ध है। स्टार्टअप ना तो टाइमपास का गेम है ना तो यह साधारण बिजनेस है। यह धैर्य और लंबी लड़ाई भी मांगता है। हो सकता है कि शुरू में नुकसान हो, लोग ताना मारें, लेकिन आपकी अपने आईडिया के प्रति दृढ़ता और निरंतरता और उसके प्रति आपकी आशक्ति और पागलपन एक इन्वेस्टर जरूर देखता है।
नंबर से ज्यादा आपका आईडिया और उसके प्रति आपका समर्पण ही निवेशक देखता है, तब जाकर फंड का गठबंधन आपके साथ करता है। एक उद्यमी को हमेशा ध्यान रखना चाहिये कि स्टार्टअप के लिए पारम्परिक निवेशक से निवेश ना लें। ऐसे निवेशक पहले माह से ही लाभ लेना चाहते हैं जबकि साधारणतया स्टार्टअप में कई बार लाभ शुरू होने में कई साल लग जाते हैं।
लंबा समय लगने के कारण पारम्परिक निवेशक उसके लिये संकट बन सकते हैं और उसका आईडिया जल्द लाभ के चक्कर में जल्दी डिस्काउंट हो सकता है। इसलिये वह स्टार्टअप इकोसिस्टम वाले निवेशक से ही निवेश लें। ऐसे निवेशक स्टार्टअप की मानसिकता से वाकिफ होते हैं।
भारतीय स्टार्टअप को फंडिंग और एक्सेल शीट पर बननेवाले परिणाम से बाहर निकल कर बिजनेस को थामना पड़ेगा और टॉप लाइन के साथ साथ बॉटम लाइन में संतुलन बनाना पड़ेगा। उन्हें एग्जिट के माइंड सेट की जगह प्रॉफिट का माइंड सेट बनाना पड़ेगा। यदि ऐसा होता है तो भारत में स्टार्ट अप जर्नी सक्सेस हो सकती है अन्यथा आपका आइडिया एक बुलबुला बन कर कुछ समय बाद फट जायेगा।
यह भी पढ़ें: People of Indian Origin: सनातन संस्कृति और मूल्यों में छिपी हैं विदेश में बसे भारतवंशियों की सफलता
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
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